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बदले की आग ने सलाखों के पीछे पहुंचा दिया पूरा कुनबा
Updated Sat, 08 Jul 2017 10:24 PM IST
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बदले की आग ने सलाखों के पीछे पहुंचा दिया पूरा कुनबा
भाई के खून का बदला लेने के चक्कर में पूरा कुनबा सलाखों के पीछे पहुंच गया। बदले की आग से दो घरों में सन्नाटा पसर गया। एक-दूसरे के विरोधी 14 लोग जेल में बंद हैं।
इन दो हत्याओं के बाद पुलिस भविष्य में भी घटना की आशंका जता रही है। क्योंकि नईम की हत्या के बाद पुलिस ने चार आरोपियों को भले ही जेल भेज दिया था, लेकिन नईम के परिजनों को सुकून नहीं मिला। इसलिए लिए आरोपियों का खून बहाने की साजिश रच डाली।
27 सितंबर 2016 को खुर्जा देहात क्षेत्र के गांव हसनगढ़ में नईम की हत्या कर दी गई। उसकी हत्या के आरोप में शाहिद, नाहिद, वाहिद व मोहसीन को पुलिस ने जेल भेज दिया था, लेकिन नईम की हत्या का कारण आजतक साफ नहीं हो पाया।
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लोगों में चर्चा आज भी है कि नईम की हत्या कारण कुछ और ही था। जिसे लोग दबी जुबां में एक-दूसरे से कहते हैं। नईम की हत्या के बाद ही उसके परिजनों ने खून का बदला लेने के कसम खाई थी। क्योंकि नईम के परिजन कानून पर कम विश्वास करते हैं।
यदि वह कानून पर विश्वास करते तो कोर्ट के द्वारा नईम के हत्यारोपियों को सजा दिलाते। नईम के परिजन शुरू से ही खून का बदला खून चाहते थे। उन्हें बेसब्री से जेल में बंद आरोपियों के बाहर आने का इंतजार था।
शाहिद के जमानत पर जेल से बाहर आते ही वारदात की स्क्रिप्ट लिखना शुरू कर दिया। सस्ते रेट में सात मोबाइल खरीदे और शाहिद की रेकी शुरू कर दी। 22 जून की सुबह खुर्जा में फेल होने पर जेल से बाहर निकलने के बाद हत्या का प्लान बनाया।
वापसी के सभी रास्तों पर आरोपी खड़े थे। बताते हैं कि गवाह न बचे इसलिए रहीसा की भी हत्या कर दी। चलती बाइक पर गोली मारकर जब दोनों सड़क पर गिर गए तो शानू ठाकुर और शादाब ने एक-एक गोली दोनों के सिर में और उतार दी।
हत्या करने के बाद सभी आरोपी दिल्ली भाग गए थे। सभी की लोकेशन एक साथ आ रही थी। एसएसपी ने गिरफ्तार करने वाली टीम को पांच हजार रुपये का इनाम भी दिया है।
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भाई के खून का बदला लेने के चक्कर में पूरा कुनबा सलाखों के पीछे पहुंच गया। बदले की आग से दो घरों में सन्नाटा पसर गया। एक-दूसरे के विरोधी 14 लोग जेल में बंद हैं।
इन दो हत्याओं के बाद पुलिस भविष्य में भी घटना की आशंका जता रही है। क्योंकि नईम की हत्या के बाद पुलिस ने चार आरोपियों को भले ही जेल भेज दिया था, लेकिन नईम के परिजनों को सुकून नहीं मिला। इसलिए लिए आरोपियों का खून बहाने की साजिश रच डाली।
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27 सितंबर 2016 को खुर्जा देहात क्षेत्र के गांव हसनगढ़ में नईम की हत्या कर दी गई। उसकी हत्या के आरोप में शाहिद, नाहिद, वाहिद व मोहसीन को पुलिस ने जेल भेज दिया था, लेकिन नईम की हत्या का कारण आजतक साफ नहीं हो पाया।
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लोगों में चर्चा आज भी है कि नईम की हत्या कारण कुछ और ही था। जिसे लोग दबी जुबां में एक-दूसरे से कहते हैं। नईम की हत्या के बाद ही उसके परिजनों ने खून का बदला लेने के कसम खाई थी। क्योंकि नईम के परिजन कानून पर कम विश्वास करते हैं।
यदि वह कानून पर विश्वास करते तो कोर्ट के द्वारा नईम के हत्यारोपियों को सजा दिलाते। नईम के परिजन शुरू से ही खून का बदला खून चाहते थे। उन्हें बेसब्री से जेल में बंद आरोपियों के बाहर आने का इंतजार था।
शाहिद के जमानत पर जेल से बाहर आते ही वारदात की स्क्रिप्ट लिखना शुरू कर दिया। सस्ते रेट में सात मोबाइल खरीदे और शाहिद की रेकी शुरू कर दी। 22 जून की सुबह खुर्जा में फेल होने पर जेल से बाहर निकलने के बाद हत्या का प्लान बनाया।
वापसी के सभी रास्तों पर आरोपी खड़े थे। बताते हैं कि गवाह न बचे इसलिए रहीसा की भी हत्या कर दी। चलती बाइक पर गोली मारकर जब दोनों सड़क पर गिर गए तो शानू ठाकुर और शादाब ने एक-एक गोली दोनों के सिर में और उतार दी।
हत्या करने के बाद सभी आरोपी दिल्ली भाग गए थे। सभी की लोकेशन एक साथ आ रही थी। एसएसपी ने गिरफ्तार करने वाली टीम को पांच हजार रुपये का इनाम भी दिया है।