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माता-पिता को याद कर फफक पड़ते हैं बच्चे
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माता-पिता को याद कर फफक पड़ते हैं बच्चे
बुलंदशहर। कोरोना संक्रमण से दिवंगत हुए शिक्षक माता-पिता को याद कर उनके बच्चे फफक पड़ते हैं। परिजनों के अनुसार, किसी ने अपनी बेटी को आईएएस और किसी ने शिक्षक बनने का सपना देखा था, लेकिन अब उन्हें यह अधूरा होता दिखाई दे रहा है। जनपद में कोरोना से दिवंगत हुए शिक्षकों के परिवार का कुछ यू छलका दर्द...।
लाडली बेटी पूछती है मम्मी कब आएंगे पापा
सिकंदराबाद क्षेत्र के गांव चचोई स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधान अध्यापक राकेश कुमार की चार मई को कोरोना से मौत हो गई थी। उनकी तबीयत चुनाव ड्यूटी के बाद खराब हुई थी। उनका परिवार गाजियाबाद हिंडन एयरफोर्स के पास करहेरा कॉलोनी में रहता है। परिजन उन्हें याद करते ही फफक पड़ते हैं। उनकी तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी संध्या की शादी हो चुकी है। दूसरी बेटी 28 वर्षीय निशा एमएससी कर रही है। छोटी बेटी 13 वर्षीय गरिमा आठवीं कक्षा में है। पत्नी सुषमा ने बताया कि छोटी बेटी गरिमा उनकी सबसे लाडली थी। वह हमेशा कहते थे कि संध्या की तो शादी हो गई। निशा शिक्षक बन जाए और गरिमा को आईएएस बनाऊंगा। वह गरिमा को पढ़ाने के साथ हमेशा कहा करते थे कि मेरा कोई बेटा नहीं है और तू मेरी लाडली बेटी और आईएएस बनकर मेरा नाम रोशन करना। अब गरिमा दिन में कई बार पूछती रहती है कि मम्मी पापा कब आएंगे, लेकिन मैं अपने को किसी तरह संभाल कर उसे समझाने का प्रयास कर रही हूं।
मुझे और बहन को टीचर बनाने का सपना देखती थी मां
उच्च प्राथमिक विद्यालय उस्मापुर में सहायक अध्यापिका रहीं पुष्पा पुंडीर का कोरोना से चार मई को निधन हो गया था। उनका परिवार नगर के मोहल्ला देवीपुरा में रहता है। पति राकेश कुमार भी शिक्षक हैं। बड़ा बेटा मयंक, जो बीटीसी कर रहा है, उसने बताया कि पहले तो मां को याद कर मयंक के आंखों में आंसू आ गए। अपने आप को संभालते हुए बताया कि मेरी छोटी बहन रिचा इस समय डीएलएड की पढ़ाई कर रही है। मां हम दोनों भाई-बहन को बहुत प्यार करती थी। मां हमेशा कहती थी कि मेरे दोनों बच्चे शिक्षक बन जाएंगे तो वह मेरे लिए सबसे ज्यादा खुशी का दिन होगा। रिचा की शादी शिक्षक बनने के बाद ही करूंगी, ताकि वह जहां भी जाए, उस परिवार पर बोझ न बने। अब मां के चले जाने के बाद हमें शिक्षक बनने का वह सपना भी अपने साथ ले गई, जिसे उन्होंने देखा था। अब तो हम भाई-बहनों के पास मां की याद और पिता का ही सहारा बचा है।
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अभी शासन से कोरोना से दिवंगत शिक्षकों को दी जाने वाली मदद के बारे में कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। शासन की ओर से मांगी गई दिवंगत शिक्षक व कर्मचारियों की सूची दोबारा तैयार की जा रही है। यह सूची जल्द तैयार कर शासन को भेजी जाएगी।
- अखंड प्रताप सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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बुलंदशहर। कोरोना संक्रमण से दिवंगत हुए शिक्षक माता-पिता को याद कर उनके बच्चे फफक पड़ते हैं। परिजनों के अनुसार, किसी ने अपनी बेटी को आईएएस और किसी ने शिक्षक बनने का सपना देखा था, लेकिन अब उन्हें यह अधूरा होता दिखाई दे रहा है। जनपद में कोरोना से दिवंगत हुए शिक्षकों के परिवार का कुछ यू छलका दर्द...।
लाडली बेटी पूछती है मम्मी कब आएंगे पापा
सिकंदराबाद क्षेत्र के गांव चचोई स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधान अध्यापक राकेश कुमार की चार मई को कोरोना से मौत हो गई थी। उनकी तबीयत चुनाव ड्यूटी के बाद खराब हुई थी। उनका परिवार गाजियाबाद हिंडन एयरफोर्स के पास करहेरा कॉलोनी में रहता है। परिजन उन्हें याद करते ही फफक पड़ते हैं। उनकी तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी संध्या की शादी हो चुकी है। दूसरी बेटी 28 वर्षीय निशा एमएससी कर रही है। छोटी बेटी 13 वर्षीय गरिमा आठवीं कक्षा में है। पत्नी सुषमा ने बताया कि छोटी बेटी गरिमा उनकी सबसे लाडली थी। वह हमेशा कहते थे कि संध्या की तो शादी हो गई। निशा शिक्षक बन जाए और गरिमा को आईएएस बनाऊंगा। वह गरिमा को पढ़ाने के साथ हमेशा कहा करते थे कि मेरा कोई बेटा नहीं है और तू मेरी लाडली बेटी और आईएएस बनकर मेरा नाम रोशन करना। अब गरिमा दिन में कई बार पूछती रहती है कि मम्मी पापा कब आएंगे, लेकिन मैं अपने को किसी तरह संभाल कर उसे समझाने का प्रयास कर रही हूं।
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मुझे और बहन को टीचर बनाने का सपना देखती थी मां
उच्च प्राथमिक विद्यालय उस्मापुर में सहायक अध्यापिका रहीं पुष्पा पुंडीर का कोरोना से चार मई को निधन हो गया था। उनका परिवार नगर के मोहल्ला देवीपुरा में रहता है। पति राकेश कुमार भी शिक्षक हैं। बड़ा बेटा मयंक, जो बीटीसी कर रहा है, उसने बताया कि पहले तो मां को याद कर मयंक के आंखों में आंसू आ गए। अपने आप को संभालते हुए बताया कि मेरी छोटी बहन रिचा इस समय डीएलएड की पढ़ाई कर रही है। मां हम दोनों भाई-बहन को बहुत प्यार करती थी। मां हमेशा कहती थी कि मेरे दोनों बच्चे शिक्षक बन जाएंगे तो वह मेरे लिए सबसे ज्यादा खुशी का दिन होगा। रिचा की शादी शिक्षक बनने के बाद ही करूंगी, ताकि वह जहां भी जाए, उस परिवार पर बोझ न बने। अब मां के चले जाने के बाद हमें शिक्षक बनने का वह सपना भी अपने साथ ले गई, जिसे उन्होंने देखा था। अब तो हम भाई-बहनों के पास मां की याद और पिता का ही सहारा बचा है।
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अभी शासन से कोरोना से दिवंगत शिक्षकों को दी जाने वाली मदद के बारे में कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। शासन की ओर से मांगी गई दिवंगत शिक्षक व कर्मचारियों की सूची दोबारा तैयार की जा रही है। यह सूची जल्द तैयार कर शासन को भेजी जाएगी।
- अखंड प्रताप सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी