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दूसरी लहर में भी बच्चों से हारा कोरोना वायरस
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दूसरी लहर में भी बच्चों से हारा कोरोना वायरस
बुलंदशहर। कोरोना की दूसरी लहर में भी बच्चों ने वायरस को कुशलता से हरा दिया। एक अप्रैल से 19 मई तक जनपद में दस साल या उससे कम उम्र के 326 बच्चे संक्रमित हुए। इनमें से 321 बच्चे ठीक हो गए हैं जबकि शेष पांच का उपचार चल रहा है।
साल 2020 में कोरोना की पहली लहर में जिले में दस वर्ष या उससे कम उम्र के 220 बच्चे संक्रमित हुए। एक अप्रैल 2021 से 19 मई तक दूसरी लहर मेें 326 बच्चे संक्रमित मिले हैं। इनमें 52 बच्चे ऐसे हैं जिनकी उम्र तीन वर्ष से कम है। पहली और दूसरी लहर में जिले में कुल 546 बच्चे संक्रमित हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि बच्चों तक कोरोना संक्रमण पहुंचने में उनके परिजन की घर से बाहर आवाजाही और लापरवाही बड़ी वजह है।
बच्चों की ढाल है उनकी इम्यूनिटी
बच्चों की मजबूत रोग प्रतिरोधक शक्ति कोरोना को हरा रही है। छोटे बच्चों की इम्यूनिटी बुजुर्गों और युवाओं से कहीं अधिक मजबूत होती है। 99 फीसदी बच्चे होम आइसोलेशन में ही पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। अभिभावक बाहर से घर लौटें तो बच्चों से मिलते वक्त सावधानी बरतें। बच्चा अगर एक-दो साल का है तो उसे बाहरी लोगों से दूर रखें।
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डॉ. एमपी सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल
ग्राफ के लिए आंकड़े: 0 से 10 वर्ष तक के आयु वर्ग में
90 फीसदी बच्चे होम आइसोलेशन में ही हुए ठीक
326 बच्चे संक्रमित हुए कोरोना की दूसरी लहर में
321 बच्चे संक्रमित हुए कोरोना की पहली लहर में
52 बच्चे तीन वर्ष तक के आयु वर्ग में
5 बच्चों का अभी चल रहा है इलाज
बच्चों में ये हो सकते हैं लक्षण
- बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, थकावट, सूंघने की क्षमता में कमी आना।
- नाक बहना, मांसपेशियों में तकलीफ, गले में खराश।
- कुछ बच्चों को दस्त, उल्टी और पेट दर्द भी हो सकता है।
ऐसा है तो तत्काल डॉक्टर के पास जाएं
-बच्चे को यदि पांच दिन से अधिक बुखार है, ज्यादा उल्टियां और दस्त हो रहे हैं, शरीर पर लाल दाने पड़ गए, आंख में लाली है तो देर न करें, तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।
होम आइसोलेशन में ही दी मात
कुछ दिन पूर्व मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जांच कराई तो तीन वर्षीय पुत्र अद्वित की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। चिकित्सकों के मार्ग दर्शन में दवाएं लेने से दोनों ही होम आइसोलेशन में ही ठीक हो गए।
अंजू रानी, हरि एंकलेव निवासी,
घर में ही लीं दवाएं
एक वर्षीय बेटे और मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी तो उसे होम आइसोलेशन में ही दवाएं लीं। सुबह-शाम गर्म पानी में नींबू डालकर पीया। जिससे स्वास्थ्य पर अच्छा असर हुआ और दोनों जल्दी कोरोना को मात देने में सफल रहे।
डॉ. पूनम लाल, आरके पुरम निवासी
बच्चों के लिए जिला अस्पताल में अलग आईसीयू
कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर में बच्चों के चपेट में आने की संभावना बताई जा रही हैं। इससे निपटने के लिए और बच्चों को कोविड से बचाने के लिए शासन के निर्देशानुसार तैयारियां की जा रही हैं। जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) बनाया जा रहा हैं। बेड और उपकरणों की मांग की गई हैं। एक माह से कम उम्र के बच्चों को जिला महिला अस्पताल में बन रहे के विशेष वार्ड में रखा जाएगा। लक्षण दिखते समय ही उपचार मिल जाए तो संक्रमित बच्चे अन्य फ्लू की तरह ठीक हो जाते हैं। थोड़ी सी लापरवाही घातक साबित हो सकती है। एक वर्ष तक के बच्चों को स्तनपान और उससे बड़े बच्चों के खानपान में विशेष ध्यान देने की जरूरत हैं। - डॉ. भवतोष शंखधर, सीएमओ
डरें नहीं, पुख्ता इंतजाम
कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सतत प्रयास किया जा रहा है। बच्चों को इस बीमारी से बचाने के लिए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। जिला अस्पताल के साथ ही वीआईआईटी कोविड हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक वार्ड बनाया जा रहा है। - रविंद्र कुमार जिलाधिकारी
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बुलंदशहर। कोरोना की दूसरी लहर में भी बच्चों ने वायरस को कुशलता से हरा दिया। एक अप्रैल से 19 मई तक जनपद में दस साल या उससे कम उम्र के 326 बच्चे संक्रमित हुए। इनमें से 321 बच्चे ठीक हो गए हैं जबकि शेष पांच का उपचार चल रहा है।
साल 2020 में कोरोना की पहली लहर में जिले में दस वर्ष या उससे कम उम्र के 220 बच्चे संक्रमित हुए। एक अप्रैल 2021 से 19 मई तक दूसरी लहर मेें 326 बच्चे संक्रमित मिले हैं। इनमें 52 बच्चे ऐसे हैं जिनकी उम्र तीन वर्ष से कम है। पहली और दूसरी लहर में जिले में कुल 546 बच्चे संक्रमित हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि बच्चों तक कोरोना संक्रमण पहुंचने में उनके परिजन की घर से बाहर आवाजाही और लापरवाही बड़ी वजह है।
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बच्चों की ढाल है उनकी इम्यूनिटी
बच्चों की मजबूत रोग प्रतिरोधक शक्ति कोरोना को हरा रही है। छोटे बच्चों की इम्यूनिटी बुजुर्गों और युवाओं से कहीं अधिक मजबूत होती है। 99 फीसदी बच्चे होम आइसोलेशन में ही पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। अभिभावक बाहर से घर लौटें तो बच्चों से मिलते वक्त सावधानी बरतें। बच्चा अगर एक-दो साल का है तो उसे बाहरी लोगों से दूर रखें।
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डॉ. एमपी सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल
ग्राफ के लिए आंकड़े: 0 से 10 वर्ष तक के आयु वर्ग में
90 फीसदी बच्चे होम आइसोलेशन में ही हुए ठीक
326 बच्चे संक्रमित हुए कोरोना की दूसरी लहर में
321 बच्चे संक्रमित हुए कोरोना की पहली लहर में
52 बच्चे तीन वर्ष तक के आयु वर्ग में
5 बच्चों का अभी चल रहा है इलाज
बच्चों में ये हो सकते हैं लक्षण
- बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, थकावट, सूंघने की क्षमता में कमी आना।
- नाक बहना, मांसपेशियों में तकलीफ, गले में खराश।
- कुछ बच्चों को दस्त, उल्टी और पेट दर्द भी हो सकता है।
ऐसा है तो तत्काल डॉक्टर के पास जाएं
-बच्चे को यदि पांच दिन से अधिक बुखार है, ज्यादा उल्टियां और दस्त हो रहे हैं, शरीर पर लाल दाने पड़ गए, आंख में लाली है तो देर न करें, तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।
होम आइसोलेशन में ही दी मात
कुछ दिन पूर्व मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जांच कराई तो तीन वर्षीय पुत्र अद्वित की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। चिकित्सकों के मार्ग दर्शन में दवाएं लेने से दोनों ही होम आइसोलेशन में ही ठीक हो गए।
अंजू रानी, हरि एंकलेव निवासी,
घर में ही लीं दवाएं
एक वर्षीय बेटे और मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी तो उसे होम आइसोलेशन में ही दवाएं लीं। सुबह-शाम गर्म पानी में नींबू डालकर पीया। जिससे स्वास्थ्य पर अच्छा असर हुआ और दोनों जल्दी कोरोना को मात देने में सफल रहे।
डॉ. पूनम लाल, आरके पुरम निवासी
बच्चों के लिए जिला अस्पताल में अलग आईसीयू
कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर में बच्चों के चपेट में आने की संभावना बताई जा रही हैं। इससे निपटने के लिए और बच्चों को कोविड से बचाने के लिए शासन के निर्देशानुसार तैयारियां की जा रही हैं। जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) बनाया जा रहा हैं। बेड और उपकरणों की मांग की गई हैं। एक माह से कम उम्र के बच्चों को जिला महिला अस्पताल में बन रहे के विशेष वार्ड में रखा जाएगा। लक्षण दिखते समय ही उपचार मिल जाए तो संक्रमित बच्चे अन्य फ्लू की तरह ठीक हो जाते हैं। थोड़ी सी लापरवाही घातक साबित हो सकती है। एक वर्ष तक के बच्चों को स्तनपान और उससे बड़े बच्चों के खानपान में विशेष ध्यान देने की जरूरत हैं। - डॉ. भवतोष शंखधर, सीएमओ
डरें नहीं, पुख्ता इंतजाम
कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सतत प्रयास किया जा रहा है। बच्चों को इस बीमारी से बचाने के लिए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। जिला अस्पताल के साथ ही वीआईआईटी कोविड हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक वार्ड बनाया जा रहा है। - रविंद्र कुमार जिलाधिकारी