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Bulandshahar News: उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला, श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी भरेगी 3.72 लाख का बकाया टैक्स
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बुलंदशहर। वाहन का टैक्स जमा न करने और उपभोक्ता को बेवजह परेशान करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड पर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने कंपनी को वाहन पर बकाया 3,72,951 रुपये का टैक्स जमा करने का आदेश सुनाया है। इसके साथ ही पीड़ित को मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय के रूप में 30 हजार रुपये अदा करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग के जन सूचना अधिकारी शेखर वर्मा ने बताया कि तहसील स्याना क्षेत्र के गांव बरौली वासुदेवपुर निवासी दीपक राघव ने वर्ष 2015 में महिंद्रा जायलो कार खरीदने के लिए श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी से 3,77,157 रुपये का ऋण लिया था। उन्होंने 5.50 लाख रुपये नकद भी दिए थे। बाद में फाइनेंस कंपनी ने वाहन के टैक्स भुगतान 4.78 लाख रुपये की प्रक्रिया दिखाई लेकिन हकीकत में परिवहन विभाग में टैक्स जमा नहीं हुआ। इसके चलते वाहन पर भारी बकाया खड़ा हो गया।
दीपक राघव का आरोप था कि टैक्स बकाया रहने के कारण कंपनी के कर्मचारी उन्हें लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। उन्होंने पहले एआरटीओ कार्यालय बुलंदशहर में गुहार लगाई। कोई समाधान न निकलने पर उन्होंने न्याय के लिए जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली। आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश हससैन कुरैशी व सदस्य नीलम कुमारी की पीठ ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया।
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पीठ ने पाया कि टैक्स जमा कराने में फाइनेंस कंपनी स्तर पर घोर लापरवाही बरती गई। आयोग ने आदेश दिया कि कंपनी 45 दिन के भीतर 3,72,951 रुपये का टैक्स जमा कराए। ऐसा न करने पर 7 मार्च 2024 से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित रकम अदा करनी होगी। इसके अलावा 20 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति व 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भुगतान करने होंगे।
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आयोग के जन सूचना अधिकारी शेखर वर्मा ने बताया कि तहसील स्याना क्षेत्र के गांव बरौली वासुदेवपुर निवासी दीपक राघव ने वर्ष 2015 में महिंद्रा जायलो कार खरीदने के लिए श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी से 3,77,157 रुपये का ऋण लिया था। उन्होंने 5.50 लाख रुपये नकद भी दिए थे। बाद में फाइनेंस कंपनी ने वाहन के टैक्स भुगतान 4.78 लाख रुपये की प्रक्रिया दिखाई लेकिन हकीकत में परिवहन विभाग में टैक्स जमा नहीं हुआ। इसके चलते वाहन पर भारी बकाया खड़ा हो गया।
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दीपक राघव का आरोप था कि टैक्स बकाया रहने के कारण कंपनी के कर्मचारी उन्हें लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। उन्होंने पहले एआरटीओ कार्यालय बुलंदशहर में गुहार लगाई। कोई समाधान न निकलने पर उन्होंने न्याय के लिए जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली। आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश हससैन कुरैशी व सदस्य नीलम कुमारी की पीठ ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया।
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पीठ ने पाया कि टैक्स जमा कराने में फाइनेंस कंपनी स्तर पर घोर लापरवाही बरती गई। आयोग ने आदेश दिया कि कंपनी 45 दिन के भीतर 3,72,951 रुपये का टैक्स जमा कराए। ऐसा न करने पर 7 मार्च 2024 से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित रकम अदा करनी होगी। इसके अलावा 20 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति व 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भुगतान करने होंगे।