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Bulandshahar News: करंट से महिला की मौत पर देना होगा मुआवजा
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बुलंदशहर। घर में बिजली चेकिंग के दौरान केबल खींचने और करंट से महिला की मौत के मामले में स्थाई लोक अदालत ने पीड़ित परिजनों को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मुआवजे की राशि पर घटना की तारीख से सात फीसदी की दर से ब्याज भी दिया जाएगा।
सात जून 2018 को खुर्जा के मुंडाखेड़ा निवासी रेखा अपने घर पर थीं। इसी दौरान अवर अभियंता सतीश, अधिशासी अभियंता और उपखंड अधिकारी मौके पर पहुंचे और रेखा से बिल से संबंधित दस्तावेज मांगे। रेखा के पति महेश चंद ने आरोप लगाया कि जब रेखा अंदर दस्तावेज देख रहीं थीं तो आरोपियों ने उनके केबिल में झटका मारा। इसके बाद रेखा बाहर आई तो केबल पर पैर लगने से वह करंट की चपेट में आ गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। आठ जून को मामले में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद विभाग ने मामले में पीड़ित परिजनों को मुआवजा देने से इन्कार कर दिया था। इसके चलते पीड़ित की ओर से स्थाई लोक अदालत में वाद दायर किया गया। स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष अरुण चंद्र श्रीवास्तव, सदस्य नीतू सिंह और लक्ष्मीकांत पचौरी ने ऊर्जा निगम के अधिकारियों को नोटिस जारी किया। इस पर अधिकारियों ने जवाब दिया कि रेखा के परिसर में अवैध रूप से ई-रिक्शा चार्ज किया जा रहा था। चेकिंग के दौरान ई-रिक्शा चार्जिंग का केबल हटाया गया था। जबकि हड़बड़ाहट में रेखा का पैर खुद ही केबल पर पड़ा था। इसके चलते दुर्घटना में किसी भी अधिकारी-कर्मचारी का दोष नहीं है और ऐसे में पीड़ित पक्ष मुआवजा पाने का अधिकारी नहीं है। दोनों पक्षों की ओर से सबूत और साक्ष्यों के आधार पर स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष अरुण चंद्र श्रीवास्तव ने रेखा की मौत के लिए ऊर्जा निगम के अधिकारियों को दोषी पाया और अधिशासी अभियंता खुर्जा को निर्देश दिए हैं कि पीड़ित परिजनों को 6.65 लाख रुपये की धनराशि घटना की तारीख से सात फीसदी ब्याज समेत दी जाए। यदि 45 दिन में आदेश का पालन नहीं किया गया तो इसके बाद पीड़ित की ओर से सिविल न्यायालय में वाद दायर किया जाएगा।
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सात जून 2018 को खुर्जा के मुंडाखेड़ा निवासी रेखा अपने घर पर थीं। इसी दौरान अवर अभियंता सतीश, अधिशासी अभियंता और उपखंड अधिकारी मौके पर पहुंचे और रेखा से बिल से संबंधित दस्तावेज मांगे। रेखा के पति महेश चंद ने आरोप लगाया कि जब रेखा अंदर दस्तावेज देख रहीं थीं तो आरोपियों ने उनके केबिल में झटका मारा। इसके बाद रेखा बाहर आई तो केबल पर पैर लगने से वह करंट की चपेट में आ गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। आठ जून को मामले में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद विभाग ने मामले में पीड़ित परिजनों को मुआवजा देने से इन्कार कर दिया था। इसके चलते पीड़ित की ओर से स्थाई लोक अदालत में वाद दायर किया गया। स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष अरुण चंद्र श्रीवास्तव, सदस्य नीतू सिंह और लक्ष्मीकांत पचौरी ने ऊर्जा निगम के अधिकारियों को नोटिस जारी किया। इस पर अधिकारियों ने जवाब दिया कि रेखा के परिसर में अवैध रूप से ई-रिक्शा चार्ज किया जा रहा था। चेकिंग के दौरान ई-रिक्शा चार्जिंग का केबल हटाया गया था। जबकि हड़बड़ाहट में रेखा का पैर खुद ही केबल पर पड़ा था। इसके चलते दुर्घटना में किसी भी अधिकारी-कर्मचारी का दोष नहीं है और ऐसे में पीड़ित पक्ष मुआवजा पाने का अधिकारी नहीं है। दोनों पक्षों की ओर से सबूत और साक्ष्यों के आधार पर स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष अरुण चंद्र श्रीवास्तव ने रेखा की मौत के लिए ऊर्जा निगम के अधिकारियों को दोषी पाया और अधिशासी अभियंता खुर्जा को निर्देश दिए हैं कि पीड़ित परिजनों को 6.65 लाख रुपये की धनराशि घटना की तारीख से सात फीसदी ब्याज समेत दी जाए। यदि 45 दिन में आदेश का पालन नहीं किया गया तो इसके बाद पीड़ित की ओर से सिविल न्यायालय में वाद दायर किया जाएगा।
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