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सुनिह अरज हमार हे छठी मईया...
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वलीपुरा नहर के घाट पर छठ पर्व की पूर्व संध्या पर वेदी पर दीपक जलाती महिला।
- फोटो : BULANDSHAHR
सुनिह अरज हमार हे छठी मईया...
बुलंदशहर। आस्था का महापर्व छठ को लेकर मंगलवार को बाजारों में भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने फलों व पूजन सामग्रियों की खरीदारी की। वहीं दूसरी ओर महिलाओं ने नहाय खाय के बाद मंगलवार को शाम में खरना किया। बुधवार को दिनभर महिलाएं निर्जला व्रत रहकर पूजा अर्चना करेंगी। शाम में डूबते सूर्य व अगले दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
संतान के स्वास्थ्य व उनकी दीर्घायु की कामना के लिए छठ पूजा सोमवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हुई। दूसरे दिन महिलाओं ने खरना किया। इस दौरान गन्ने के रस व गुड़ की खीर का प्रसाद ग्रहण किया। छठ पूजा के लिए लोगों ने वलीपुरा नहर पर बेदी बनाई है। बुधवार की शाम अस्ताचलगामी और बृहस्पतिवार को उगते सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाएगा। छठ पूजा कमेटी के के अध्यक्ष बृजेंद्र त्रिपाठी और मंत्री कुशेश्वर यादव ने बताया कि महापर्व को लेकर लोगों में उत्साह है। व्रत रखने वाली महिलाएं निर्जला व्रत रखकर शाम में वलीपुरा गंग नहर में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर पूजन करेंगी।
खरना का महत्व
खरना का मतलब शुद्धिकरण भी होता है। इस दिन छठ पूजा का विशेष प्रसाद बनाने की परंपरा है। खरना के दिन प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत की शुरुआत होती है। खरना के दिन से छठ पूजा समाप्त होने तक व्रत करने वाले लोग चादर बिछाकर जमीन पर सोते हैं। मान्यता है कि जो भी व्रती छठ के नियमों का पालन करती हैं, उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। व्रती छठ पूजा के पूर्ण होने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करते हैं।
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सूर्यदेव को अर्घ्य का समय
बुधवार शाम : 05:28 बजे
बृहस्पतिवार सुबह : 06:36 बजे
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बुलंदशहर। आस्था का महापर्व छठ को लेकर मंगलवार को बाजारों में भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने फलों व पूजन सामग्रियों की खरीदारी की। वहीं दूसरी ओर महिलाओं ने नहाय खाय के बाद मंगलवार को शाम में खरना किया। बुधवार को दिनभर महिलाएं निर्जला व्रत रहकर पूजा अर्चना करेंगी। शाम में डूबते सूर्य व अगले दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
संतान के स्वास्थ्य व उनकी दीर्घायु की कामना के लिए छठ पूजा सोमवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हुई। दूसरे दिन महिलाओं ने खरना किया। इस दौरान गन्ने के रस व गुड़ की खीर का प्रसाद ग्रहण किया। छठ पूजा के लिए लोगों ने वलीपुरा नहर पर बेदी बनाई है। बुधवार की शाम अस्ताचलगामी और बृहस्पतिवार को उगते सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाएगा। छठ पूजा कमेटी के के अध्यक्ष बृजेंद्र त्रिपाठी और मंत्री कुशेश्वर यादव ने बताया कि महापर्व को लेकर लोगों में उत्साह है। व्रत रखने वाली महिलाएं निर्जला व्रत रखकर शाम में वलीपुरा गंग नहर में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर पूजन करेंगी।
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खरना का महत्व
खरना का मतलब शुद्धिकरण भी होता है। इस दिन छठ पूजा का विशेष प्रसाद बनाने की परंपरा है। खरना के दिन प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत की शुरुआत होती है। खरना के दिन से छठ पूजा समाप्त होने तक व्रत करने वाले लोग चादर बिछाकर जमीन पर सोते हैं। मान्यता है कि जो भी व्रती छठ के नियमों का पालन करती हैं, उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। व्रती छठ पूजा के पूर्ण होने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करते हैं।
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सूर्यदेव को अर्घ्य का समय
बुधवार शाम : 05:28 बजे
बृहस्पतिवार सुबह : 06:36 बजे