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Bulandshahar News: 50 करोड़ से काली नदी की सफाई के लिए चलेगा अभियान
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बुलंदशहर। काली नदी को साफ करने के लिए केंद्र सरकार ने 50 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है। इस धनराशि से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने के साथ नदी के किनारे पौधरोपण किया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अगस्त में काम शुरू होने की उम्मीद है।
कभी काली जिले की प्रमुख नदी हुआ करती थी। इसका पानी भी लोग पीते थे। गुलावठी इलाके से जिले प्रवेश करके काली नदी छतारी होते हुए अलीगढ़ जिले में प्रवेश कर जाती है। करीब 110 किलोमीटर के इस सफर में काली नदी में कई गंदे नाले गिरते हैं। इससे पानी इतना गंदा हो चुका है कि पास में खड़ा होना भी मुश्किल होता है। नदी का पाट कई जगह अवैध कब्जे का भी शिकार है। राज्य सरकार ने नमामि गंगे अभियान के तहत करीब चार माह पहले 50 करोड़ रुपये का बजट जारी किया था। चार विभागों के अधिकारियों को नदी के दोनों किनारों पर पौधे लगाने के साथ ही जमीन से अवैध कब्जा हटवाने के लिए निर्देशित किया था। अधिकारियों ने नीर फाउंडेशन के साथ मिलकर योजना तैयार की और 72 हजार पौधे लगाने का कार्य शुरू कराया था। अब केंद्र सरकार ने भी 50 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। इससे नदी में गिरने वाले नालों पर एसटीपी लगाकर गंदे पानी को साफ किया जाएगा।
कागजों में चल रहा संरक्षित एरिया
काली नदी के किनारों पर दोनों ओर दो-दो सौ मीटर जमीन को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। इसके लिए बोर्ड भी लगाए गए हैं लेकिन केवल कागजों में ही इसे संरक्षित एरिया घोषित कर दिया गया है। मौके पर काली नदी की जमीन पर अवैध प्लॉटिंग करने के साथ ही मकान भी खड़े कर दिए गए हैं।
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नमामि गंगे अभियान के तहत राज्य सरकार के बाद केंद्र सरकार की ओर से 50 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। धनराशि से काम कराने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। अगस्त से इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। प्रयास है कि काली नदी को फिर से साफ और स्वच्छ बनाया जा सके। जिससे सिंचाई के लिए भी पानी मिल सके। - कुलदीप मीणा, सीडीओ
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कभी काली जिले की प्रमुख नदी हुआ करती थी। इसका पानी भी लोग पीते थे। गुलावठी इलाके से जिले प्रवेश करके काली नदी छतारी होते हुए अलीगढ़ जिले में प्रवेश कर जाती है। करीब 110 किलोमीटर के इस सफर में काली नदी में कई गंदे नाले गिरते हैं। इससे पानी इतना गंदा हो चुका है कि पास में खड़ा होना भी मुश्किल होता है। नदी का पाट कई जगह अवैध कब्जे का भी शिकार है। राज्य सरकार ने नमामि गंगे अभियान के तहत करीब चार माह पहले 50 करोड़ रुपये का बजट जारी किया था। चार विभागों के अधिकारियों को नदी के दोनों किनारों पर पौधे लगाने के साथ ही जमीन से अवैध कब्जा हटवाने के लिए निर्देशित किया था। अधिकारियों ने नीर फाउंडेशन के साथ मिलकर योजना तैयार की और 72 हजार पौधे लगाने का कार्य शुरू कराया था। अब केंद्र सरकार ने भी 50 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। इससे नदी में गिरने वाले नालों पर एसटीपी लगाकर गंदे पानी को साफ किया जाएगा।
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कागजों में चल रहा संरक्षित एरिया
काली नदी के किनारों पर दोनों ओर दो-दो सौ मीटर जमीन को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। इसके लिए बोर्ड भी लगाए गए हैं लेकिन केवल कागजों में ही इसे संरक्षित एरिया घोषित कर दिया गया है। मौके पर काली नदी की जमीन पर अवैध प्लॉटिंग करने के साथ ही मकान भी खड़े कर दिए गए हैं।
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नमामि गंगे अभियान के तहत राज्य सरकार के बाद केंद्र सरकार की ओर से 50 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। धनराशि से काम कराने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। अगस्त से इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। प्रयास है कि काली नदी को फिर से साफ और स्वच्छ बनाया जा सके। जिससे सिंचाई के लिए भी पानी मिल सके। - कुलदीप मीणा, सीडीओ