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छुट्टा पशुओं के कारण जा रहीं ‘जिंदगी’ प्रशासन बेखबर
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छुट्टा पशुओं के कारण जा रहीं ‘जिंदगी’ प्रशासन बेखबर
बुलंदशहर। जनपद में छुट्टा पशुओं के हमले और हादसों में लगातार लोग जान गंवा रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री की प्रमुख गोआश्रय स्थल योजना में छुट्टा पशुओं को रखना फेल साबित हो रहा है। बीते कुछ माह में जनपद में करीब चार से पांच लोग हमले और हादसे का शिकार हो चुके हैं।
जहांगीरपुर थाना क्षेत्र के गांव कपना निवासी शीलेंद्र उर्फ साहिल (8) पुत्र जयवीर सिंह पर शनिवार देर शाम छुट्टा गोवंश ने के हमले में जान चली गई। इससे पूर्व भी उक्त गोवंश एक ग्रामीण को गंभीर रुप से घायल कर चुका है। इससे पहले फरवरी माह में ही डिबाई सीएचसी पर तैनात एक एंबुलेंस चालक की बाइक में छुट्टा पशु ने टक्कर मार दी। हादसे में उसकी मौत हो गई थी। करीब चार माह पूर्व सिकंदराबाद थाना क्षेत्र में भी एक छुट्टा पशु के हमले में एक ग्रामीण की मौत हो गई थी। जिसके बाद क्षेत्र में कई दिनों तक छुट्टा पशुओं के खिलाफ लोगों ने आवाज भी बुलंद की थी। वहीं, बीते दिनों स्याना-नरसेना क्षेत्र में एक किसान को छुट्टा पशु ने पटककर मार डाला था। इसके अलावा नगर कोतवाली बुलंदशहर क्षेत्र में बीते दिनों एक न्यायिक अधिकारी के पुत्र व कर्मी मंडी क्षेत्र में दो छुट्टा पशुओं के हमले के कारण हादसे का शिकार हो गए थे। हालांकि मामले में कोई शिकायत नहीं की गई थी। पिछले दिनों में स्याना, शिकारपुर, पहासू, डिबाई और अनूपशहर आदि जगहों पर आवारा गोवंश द्वारा हमला कर लोगों को घायल करने के मामले भी सामने आ चुके हैं।
व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और आवारा पशुओं से निजात दिलाने में मशीनरी फेल
बुलंदशहर। कई माह का लंबा समय बीत जाने के बाद भी जनपद के निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और आवारा पशुओं से निजात दिलाने में मशीनरी अब तक फेल है। आश्रय स्थलों की स्थिति दयनीय है और लगातार गोवंश मर रहे हैं। वह किसानों की फसल चौपट करने के साथ-साथ लगातार लोगों पर हमला भी कर रहे हैं।
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शासन के आदेश पर जिला प्रशासन ने जनपद की 158 न्याय पंचायतों पर 152 और 17 निकाय क्षेत्रों में निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों के लिए जमीन चिन्हित कर बनाने का निर्णय लिया। अफसरों ने इन सभी का निर्माण करवाने के साथ ही शुरूआत में आवारा गोवंश से निजात दिलाने के लिए अभियान चलाकर उन्हें आश्रय स्थल भी भेजा। इनके संचालन के लिए पहले एक करोड़ और दूसरी बार में दो करोड़ से अधिक की राशि प्राप्त हुई। बावजूद इसके आश्रय स्थलों पर अभी भी व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हैं और उनमें जनपद भर में आज भी घूम रहे आवारा पशुओं को नहीं भेजा गया है। कई ऐसे स्थल भी हैं, जहां अभी तक व्यवस्थाएं तो दूर की बात, उनका निर्माण भी शुरू नहीं हुआ है। चारा न होने और अव्यवस्थाओं के मामले कई बार उजागर हो चुके हैं। लापरवाही के चलते जनपद भर में बड़ी संख्या में आवारा गोवंश इधर-उधर घूम रहे हैं। आए दिन खेतों में घुसकर पशु जो किसानों की फसलों को चौपट कर रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक आश्रय स्थलों पर करीब आठ हजार आवारा गोवंश आदि पशुओं को ही भेजा जा सका है। अब बारिश के मौसम में आश्रय स्थलों पर अव्यवस्थाओं के चलते गोवंश को बचाना तो दूर की बात बन रहे कीचड़ आदि की समस्या भी बनने लगी है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी एवं निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल के नोडल अधिकारी डॉ. लक्ष्मी नारायण का कहना है कि आश्रय स्थलों पर व्यवस्थाओं को सुधारा जा रहा है। जल्द ही सभी व्यवस्थाएं पूरी कर दी जाएंगी। जो अब आवारा गोवंश घूम रहे हैं। वह काफी आक्रामक हैं और उन्हें पकड़ पाना आसान नहीं है। इन्हें पकड़कर आश्रय स्थल पर पहुंचाने की रणनीति बनाई जा रही है।
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बुलंदशहर। जनपद में छुट्टा पशुओं के हमले और हादसों में लगातार लोग जान गंवा रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री की प्रमुख गोआश्रय स्थल योजना में छुट्टा पशुओं को रखना फेल साबित हो रहा है। बीते कुछ माह में जनपद में करीब चार से पांच लोग हमले और हादसे का शिकार हो चुके हैं।
जहांगीरपुर थाना क्षेत्र के गांव कपना निवासी शीलेंद्र उर्फ साहिल (8) पुत्र जयवीर सिंह पर शनिवार देर शाम छुट्टा गोवंश ने के हमले में जान चली गई। इससे पूर्व भी उक्त गोवंश एक ग्रामीण को गंभीर रुप से घायल कर चुका है। इससे पहले फरवरी माह में ही डिबाई सीएचसी पर तैनात एक एंबुलेंस चालक की बाइक में छुट्टा पशु ने टक्कर मार दी। हादसे में उसकी मौत हो गई थी। करीब चार माह पूर्व सिकंदराबाद थाना क्षेत्र में भी एक छुट्टा पशु के हमले में एक ग्रामीण की मौत हो गई थी। जिसके बाद क्षेत्र में कई दिनों तक छुट्टा पशुओं के खिलाफ लोगों ने आवाज भी बुलंद की थी। वहीं, बीते दिनों स्याना-नरसेना क्षेत्र में एक किसान को छुट्टा पशु ने पटककर मार डाला था। इसके अलावा नगर कोतवाली बुलंदशहर क्षेत्र में बीते दिनों एक न्यायिक अधिकारी के पुत्र व कर्मी मंडी क्षेत्र में दो छुट्टा पशुओं के हमले के कारण हादसे का शिकार हो गए थे। हालांकि मामले में कोई शिकायत नहीं की गई थी। पिछले दिनों में स्याना, शिकारपुर, पहासू, डिबाई और अनूपशहर आदि जगहों पर आवारा गोवंश द्वारा हमला कर लोगों को घायल करने के मामले भी सामने आ चुके हैं।
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व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और आवारा पशुओं से निजात दिलाने में मशीनरी फेल
बुलंदशहर। कई माह का लंबा समय बीत जाने के बाद भी जनपद के निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और आवारा पशुओं से निजात दिलाने में मशीनरी अब तक फेल है। आश्रय स्थलों की स्थिति दयनीय है और लगातार गोवंश मर रहे हैं। वह किसानों की फसल चौपट करने के साथ-साथ लगातार लोगों पर हमला भी कर रहे हैं।
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शासन के आदेश पर जिला प्रशासन ने जनपद की 158 न्याय पंचायतों पर 152 और 17 निकाय क्षेत्रों में निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों के लिए जमीन चिन्हित कर बनाने का निर्णय लिया। अफसरों ने इन सभी का निर्माण करवाने के साथ ही शुरूआत में आवारा गोवंश से निजात दिलाने के लिए अभियान चलाकर उन्हें आश्रय स्थल भी भेजा। इनके संचालन के लिए पहले एक करोड़ और दूसरी बार में दो करोड़ से अधिक की राशि प्राप्त हुई। बावजूद इसके आश्रय स्थलों पर अभी भी व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हैं और उनमें जनपद भर में आज भी घूम रहे आवारा पशुओं को नहीं भेजा गया है। कई ऐसे स्थल भी हैं, जहां अभी तक व्यवस्थाएं तो दूर की बात, उनका निर्माण भी शुरू नहीं हुआ है। चारा न होने और अव्यवस्थाओं के मामले कई बार उजागर हो चुके हैं। लापरवाही के चलते जनपद भर में बड़ी संख्या में आवारा गोवंश इधर-उधर घूम रहे हैं। आए दिन खेतों में घुसकर पशु जो किसानों की फसलों को चौपट कर रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक आश्रय स्थलों पर करीब आठ हजार आवारा गोवंश आदि पशुओं को ही भेजा जा सका है। अब बारिश के मौसम में आश्रय स्थलों पर अव्यवस्थाओं के चलते गोवंश को बचाना तो दूर की बात बन रहे कीचड़ आदि की समस्या भी बनने लगी है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी एवं निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल के नोडल अधिकारी डॉ. लक्ष्मी नारायण का कहना है कि आश्रय स्थलों पर व्यवस्थाओं को सुधारा जा रहा है। जल्द ही सभी व्यवस्थाएं पूरी कर दी जाएंगी। जो अब आवारा गोवंश घूम रहे हैं। वह काफी आक्रामक हैं और उन्हें पकड़ पाना आसान नहीं है। इन्हें पकड़कर आश्रय स्थल पर पहुंचाने की रणनीति बनाई जा रही है।