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Bulandshahar News: आंकड़ों में चमक रहा बुलंदशहर, सड़कों पर सिसक रही स्वच्छता

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 01 Oct 2026 11:14 PM IST
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Bulandshahr shines in the statistics, while cleanliness struggles on the streets.
जहांगीराबाद में लगा कूड़े-कचरे का ढेर। संवाद
बुलंदशहर। 12 साल पहले तक जिस गांव की पहचान खेतों में बिखरी गंदगी से होती थी, आज उसी गांव की पहचान चमकते शौचालय और कूड़े से बनती खाद से हो रही है। तस्वीर बदली है, सोच बदली है, लेकिन यह तस्वीर अभी आधी ही बदली है, क्योंकि फाइलों में जो बुलंदशहर चमक रहा है, वही बुलंदशहर सड़कों पर आज भी कचरे में सिसक रहा है।
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2 अक्तूबर 2014 को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत का जो सपना दिखाया था, उसने बुलंदशहर की 946 ग्राम पंचायतों के 1156 राजस्व गांवों की तस्वीर बदल दी है। कभी खुले में शौच के लिए मजबूर जिले में अब 2.74 लाख से अधिक परिवारों के पास अपना इज्जतघर है।
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जिले में स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान चल रहा है, जिसकी थीम है- स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत-विकसित भारत। पोस्टर-बैनर तो हर चौराहे पर हैं, पर पालिका और पंचायतों की सड़कों पर पड़े कचरे के ढेर इन दावों की पोल खोल रहे हैं।
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फाइलों में ओडीएफ, जमीन पर कचरा
प्रशासन के आंकड़े कहते हैं कि जिले के सभी 1156 गांव ओडीएफ हो चुके हैं और शासन से इसका सत्यापन भी हो चुका है। इस वित्तीय वर्ष में 4,510 शौचालयों का लक्ष्य मिला था, जिसमें से 1500 का निर्माण अंतिम चरण में है। अब तक कुल 2.74 लाख से अधिक शौचालय बन चुके हैं। ये आंकड़ा सिर्फ निर्माण का नहीं, 2.74 लाख परिवारों की बदली हुई मानसिकता का है।
अब लड़ाई शौचालय से आगे निकल गई है। गांवों में ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन का मॉडल लागू हो रहा है। करीब 900 कूड़ा पृथक्करण केंद्र बनाए गए हैं। गांव-गांव में सोखता गड्ढे, खाद गड्ढे और वर्मी कंपोस्ट तैयार हो रहे हैं। गीले कचरे से जैविक खाद बन रही है, जो सीधे किसानों के खेतों में जा रही है।
सिकंदराबाद में लगी प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट तो पूरे प्रदेश के लिए मॉडल बन गई है। इस पूरे सिस्टम को खड़ा करने में 200 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च हो चुकी है। पिछले साल दो करोड़ और इस साल करीब पांच करोड़ रुपये स्वच्छता के नाम पर आए हैं।

बदलाव के नायक और सम्मान
इस बदलाव के पीछे सिर्फ सरकारी मशीनरी नहीं, सामाजिक ताकत भी है। गंगा किनारे के गांवों को स्वच्छ बनाने में जीवनधारा फाउंडेशन के अध्यक्ष हरिओम शर्मा का बड़ा योगदान रहा है। परदादा-परदादी एजुकेशनल सोसायटी ने बच्चों को स्वच्छता दूत बना दिया है, जो घर-घर जाकर लोगों को समझा रहे हैं।
इतना ही नहीं, काम का सम्मान भी मिला है। राज्य स्तर पर राजघाट, शहजादपुर कनैनी, सारंगपुर और कनैनी ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत किया गया है। जिला स्तर पर 100 से अधिक पंचायतों को सम्मान मिला है। अनूपशहर और सिकंदराबाद की पंचायतें घर-घर कूड़ा संग्रह और पृथक्करण में सबसे आगे हैं।
सेहत पर दिखा असर, मौतों में आई कमी
स्वच्छता का सबसे बड़ा इनाम सेहत के रूप में मिला है। गांवों में संचारी रोग नियंत्रण अभियान के साथ स्वच्छता ने मिलकर बीमारियों को हराया है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इस वर्ष डेंगू के महज 8 और मलेरिया के 16 केस ही सामने आए हैं, जबकि पिछले वर्षों में डेंगू के 77 और मलेरिया के 53 केस आते थे। 12 साल पहले बुखार से हर साल 200 से अधिक मौतें होती थीं, इस साल अभी तक यह संख्या 10 पर सिमट गई है। डिप्थीरिया जैसे रोग भी लगभग खत्म होने की कगार पर हैं।

दूसरा पहलू - जहां फेल हो रहा सिस्टम
इसी चमकदार तस्वीर का दूसरा पहलू काला है। गांव ओडीएफ हो गए, पर शहर और गांव कचरा-कचरा हो रहे हैं। बुलंदशहर, खुर्जा, सिकंदराबाद, अनूपशहर, डिबाई, गुलावठी, जहांगीराबाद नगर पालिका और बीबीनगर, खानपुर, बुगरासी, औरंगाबाद, छतारी, पहासू, ककोड़, नरौरा नगर पंचायतों की सड़कों पर सुबह कचरे के ढेर लगे मिलते हैं। घर-घर कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां कागजों में दौड़ रही हैं, जीपीएस में चल रही हैं, पर मोहल्लों में कूड़ा सड़कों पर बिखरा है।
900 पृथक्करण केंद्रों का दावा है, पर जमीनी हकीकत ये है कि कई केंद्रों पर ताला लटका है। कूड़ा पृथक्करण के बजाय खुले में फेंका जा रहा है। आंकड़ों की चमक और सड़कों की गंदगी के बीच का यही गैप सिस्टम की सबसे बड़ी नाकामी है। जब तक पालिका और पंचायतें अपनी सड़कों से कचरा नहीं हटाएंगी, तब तक 1156 गांवों के ओडीएफ होने का सच अधूरा ही रहेगा।

बोले डीएम -
स्वच्छ भारत अभियान ने केवल शौचालय निर्माण तक सीमित न रहकर लोगों की सोच में बदलाव लाने का काम किया है। अब प्रशासन का जोर ओडीएफ प्लस की व्यवस्थाओं को बनाए रखने और गांवों में स्वच्छता बढ़ाने पर है। स्वच्छता को स्थायी बनाने के लिए हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। - कुमार हर्ष, डीएम

जहांगीराबाद में लगा कूड़े-कचरे का ढेर। संवाद

जहांगीराबाद में लगा कूड़े-कचरे का ढेर। संवाद

जहांगीराबाद में लगा कूड़े-कचरे का ढेर। संवाद

जहांगीराबाद में लगा कूड़े-कचरे का ढेर। संवाद

जहांगीराबाद में लगा कूड़े-कचरे का ढेर। संवाद

जहांगीराबाद में लगा कूड़े-कचरे का ढेर। संवाद

जहांगीराबाद में लगा कूड़े-कचरे का ढेर। संवाद

जहांगीराबाद में लगा कूड़े-कचरे का ढेर। संवाद

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