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Bulandshahar News: बुलंदशहर बना यूपी का रोल मॉडल.. हाईकोर्ट ने सराहना के साथ पूरे प्रदेश में लागू किया फॉर्मूला

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 18 Sep 2026 10:40 PM IST
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Bulandshahr becomes a role model for UP; High Court praises the initiative and implements the formula across the entire state.
बुलंदशहर एसएसपी दिनेश कुमार सिंह।
बुलंदशहर। आपराधिक न्याय प्रणाली को वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने की दिशा में बुलंदशहर ने पूरे उत्तर प्रदेश के सामने एक मिसाल पेश की है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुलंदशहर पुलिस और न्यायपालिका की संयुक्त फॉरेंसिक पहल को नज़ीर मानते हुए इसकी प्रशंसा की है।
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उच्च न्यायालय ने इस मॉडल को मील का पत्थर करार देते हुए प्रमुख सचिव (विधि) और पुलिस महानिदेशक को आदेश दिया है कि बुलंदशहर के जिला जज और एसएसपी की तर्ज पर प्रदेश के सभी जिलों में ऐसे विशेष फॉरेंसिक प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से संचालित कराए जाएं।
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उच्च न्यायालय ने अपने आदेश के पैरा-13 में विशेष रूप से संज्ञान लेते हुए उल्लेख किया कि बुलंदशहर के जिला जज संजय सिंह प्रथम और एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के लिए फोरेंसिक साइंस पर एक बेहतरीन कौशल संवर्धन कार्यशाला का आयोजन किया।
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यह कार्यशाला निदेशक, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) उत्तर प्रदेश के समन्वय से 17 सितंबर को आयोजित की गई।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जिला जज व एसएसपी आपराधिक न्याय प्रणाली में सभी हितधारकों को फोरेंसिक ज्ञान से समृद्ध करने के इस शानदार योगदान के लिए विशेष प्रशंसा के पात्र हैं।
न्यायालय ने यह भी कहा कि मेडिको-लीगल और वैज्ञानिक साक्ष्यों के सही संकलन के लिए राज्य सरकार व विधि विभाग से नियमित अंतराल पर ऐसी फोरेंसिक कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव विधि और डीजीपी उत्तर प्रदेश को निर्देशित किया है कि वे राज्य विधि अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के लिए इस प्रकार के कौशल संवर्धन कार्यक्रम आयोजित करें। साथ ही, प्रदेश भर के सभी जिला जजों को निर्देशित किया है कि वे बुलंदशहर के जिला जज की तरह अपने-अपने जिलों में न्यायिक अधिकारियों के लिए फोरेंसिक साइंस वर्कशॉप का आयोजन करें।

वैज्ञानिक विवेचना से बढ़ेगी सजा की दर

कानून के जानकारों का मानना है कि अक्सर गंभीर मुकदमों में मौका-ए-वारदात से फोरेंसिक साक्ष्य सही तरीके से संकलित न होने या मेडिको-लीगल पहलुओं की समुचित समझ न होने से अपराधियों को लाभ मिल जाता है।
बुलंदशहर में पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को एक मंच पर लाकर दी गई इस फोरेंसिक ट्रेनिंग से न केवल गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित होगी, बल्कि अदालतों में मुकदमों के निस्तारण और दोषियों को सजा दिलाने की दर में भी ऐतिहासिक सुधार आएगा।


कोट
- आपराधिक विवेचनाओं में अब पारंपरिक तौर-तरीकों के बजाय वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका निर्णायक हो चुकी है। उच्च न्यायालय द्वारा हमारे इस प्रयास को सराहा है, पूरे जिले की पुलिस और न्यायिक परिवार के लिए यह गौरव का विषय है। इस मार्गदर्शन से हमारी टीम का उत्साहवर्धन हुआ है। - दिनेश कुमार सिंह, एसएसपी

बुलंदशहर एसएसपी दिनेश कुमार सिंह।

बुलंदशहर एसएसपी दिनेश कुमार सिंह।

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