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हिंदू वृद्ध का मुस्लिम लोगों ने अंतिम संस्कार कर दिया सांप्रदायिक सौहार्द का पैगाम
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हिंदू वृद्ध का मुस्लिम लोगों ने अंतिम संस्कार कर दिया सांप्रदायिक सौहार्द का पैगाम
सिकंदराबाद। नफरत की हवाओं के बीच औद्योगिक क्षेत्र के गांव निवासी ग्राम प्रधान ने एक हिंदू वृद्ध का अंतिम संस्कार कराकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की है। सूचना के बाद भी परिवार के लोगों के नहीं पहुंचने पर मुस्लिम समाज के लोगों ने अर्थी को कंधा दिया।
मूलरूप से सहारनपुर निवासी रमेश (65वर्ष) पुत्र रुतवा लाल पिछले 30-35 वर्षों से औद्योगिक क्षेत्र स्थित तेल मिल पर चाय की दुकान करते थे। हाल में वह तिलबेगमपुर स्थित हाजी अख्तर मेवाती के क्वार्टरों में किराए पर रह रहे थे। बताया कि मंगलवार दोपहर में रमेश की अचानक तबीयत खराब हो गई और बीमारी के कारण उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने किसी तरह उनकी पुत्री और भांजे के बारे में जानकारी कर उन्हें रमेश की मौत की सूचना दी। लेकिन उन लोगों ने आने से इनकार कर दिया। अपनों के साथ छोड़ देने पर मुस्लिम बहुल्य गांव तिलबेगमपुर के लोगों ने मृतक रमेश की अर्थी को कंधा दिया। और ग्राम प्रधान आजाद एवं गांव के अन्य मुस्लिम लोगों ने हिंदू रीति रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार कर के सांप्रदायिक सौहार्द, आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की है।
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सिकंदराबाद। नफरत की हवाओं के बीच औद्योगिक क्षेत्र के गांव निवासी ग्राम प्रधान ने एक हिंदू वृद्ध का अंतिम संस्कार कराकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की है। सूचना के बाद भी परिवार के लोगों के नहीं पहुंचने पर मुस्लिम समाज के लोगों ने अर्थी को कंधा दिया।
मूलरूप से सहारनपुर निवासी रमेश (65वर्ष) पुत्र रुतवा लाल पिछले 30-35 वर्षों से औद्योगिक क्षेत्र स्थित तेल मिल पर चाय की दुकान करते थे। हाल में वह तिलबेगमपुर स्थित हाजी अख्तर मेवाती के क्वार्टरों में किराए पर रह रहे थे। बताया कि मंगलवार दोपहर में रमेश की अचानक तबीयत खराब हो गई और बीमारी के कारण उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने किसी तरह उनकी पुत्री और भांजे के बारे में जानकारी कर उन्हें रमेश की मौत की सूचना दी। लेकिन उन लोगों ने आने से इनकार कर दिया। अपनों के साथ छोड़ देने पर मुस्लिम बहुल्य गांव तिलबेगमपुर के लोगों ने मृतक रमेश की अर्थी को कंधा दिया। और ग्राम प्रधान आजाद एवं गांव के अन्य मुस्लिम लोगों ने हिंदू रीति रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार कर के सांप्रदायिक सौहार्द, आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की है।
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