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छह चिताएं एक साथ जलती देख सिहर उठे लोगों के दिल
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छह चिताएं एक साथ जलती देख सिहर उठे लोगों के दिल
खुर्जा। शुक्रवार रात डिबाई स्थित फायर स्टेशन के निकट सड़क हादसा हुआ था। जिसमें ईको कार सवार छह लोगों की मौत हो गई थी। और एक युवती गंभीर रुप से घायल हो गई थी। घटना में हताहत हुए लोगों की पहचान खुर्जा देहात के गांव सैंदा फरीदपुर निवासी वीरेंद्र कुमार व उनके परिवार के अन्य सदस्यों के रूप में हुई थी। शुक्रवार सुबह वीरेंद्र कुमार को उसकी ससुराल थाना चंदौसी क्षेत्र के गांव बैटा से सूचना मिली कि उसकी सास जावित्री (70) का निधन हो गया है। सूचना पर शुक्रवार सुबह वीरेंद्र अपनी पत्नी शीला देवी व अन्य परिजनों के साथ ईको कार से अपनी ससुराल गए थे। सास का अंतिम संस्कार होने के बाद देर शाम वह कार से ही वापस अपने गांव लौट रहे थे। लेकिन, उनकी पत्नी शीला देवी अपने मायके में ही रुक गई थीं। जबकि, अन्य परिजन वापस लौट रहे थे।
डिबाई क्षेत्र में हुए हादसे में कार सवार परिवार के छह लोगों की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो बस बहुत तेज स्पीड में थी और टक्कर इतनी खतरनाक थी कि आसपास के लोग आवाज सुनकर गाड़ी की ओर भाग निकले।
मृतकों की शिनाख्त भूदेवी पत्नी कल्यान सिंह (60), रामवती पत्नी छत्रपाल (45), प्रताप पुत्र कांति सिंह (35), वीरेंद्र पुत्र कांति सिंह (45), रोहित पुत्र वीरेंद्र सिंह (18) और कलुआ पुत्र महेश (40) के रूप में हुई। जबकि, विमला पुत्री चुन्नी लाल गंभीर रूप से घायल हो गयी थी। जिसका हायर मेडिकल सेंटर में उपचार चल रहा है। शनिवार सुबह सभी के शव पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचे तो परिजनों में चीत्कार मच गई। गांव के श्मशान घाट पर छह चिताआें का अंतिम संस्कार किया गया। इसे देख हर किसी का दिल भी दहल उठा। वहीं, लोगों की आंखें नम हो गईं। शोकाकुल परिवार को सांत्वना देने के लिए खुर्जा एसडीएम लवि त्रिपाठी और सीओ सुरेश सिंह पहुंचे।
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अगले महीने रोहित की होनी थी शादी
जानकारी के अनुसार हादसे में मारे गए 18 वर्षीय रोहित की शादी बीते दिनों ही बदायूं क्षेत्र निवासी एक युवती से तय हुई थी। बताया गया कि अगले माह उसकी शादी होनी थी। लेकिन, शादी से पूर्व ही हादसे ने उसकी जिंदगी को लील लिया।
न रुकती शीला तो वो भी होती शिकार
एक ओर शीला की मां की मौत हुई, जहां वह अपने पति व अन्य परिवार के सदस्यों के साथ शुक्रवार सुबह शामिल होने के लिए पहुंची थी। लेकिन, शाम को वह अपने मायके में ही रुक गई। लेकिन, उसे क्या पता था कि कुछ ही देर में उसके पति व अन्य पारिवारिक सदस्यों की मौत की खबर उसे झकझोर कर रख देगी। परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वह वापस नहीं आई थी। अगर कार में वह भी सवार होती तो वह भी हादसे की शिकार होतीं।
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खुर्जा। शुक्रवार रात डिबाई स्थित फायर स्टेशन के निकट सड़क हादसा हुआ था। जिसमें ईको कार सवार छह लोगों की मौत हो गई थी। और एक युवती गंभीर रुप से घायल हो गई थी। घटना में हताहत हुए लोगों की पहचान खुर्जा देहात के गांव सैंदा फरीदपुर निवासी वीरेंद्र कुमार व उनके परिवार के अन्य सदस्यों के रूप में हुई थी। शुक्रवार सुबह वीरेंद्र कुमार को उसकी ससुराल थाना चंदौसी क्षेत्र के गांव बैटा से सूचना मिली कि उसकी सास जावित्री (70) का निधन हो गया है। सूचना पर शुक्रवार सुबह वीरेंद्र अपनी पत्नी शीला देवी व अन्य परिजनों के साथ ईको कार से अपनी ससुराल गए थे। सास का अंतिम संस्कार होने के बाद देर शाम वह कार से ही वापस अपने गांव लौट रहे थे। लेकिन, उनकी पत्नी शीला देवी अपने मायके में ही रुक गई थीं। जबकि, अन्य परिजन वापस लौट रहे थे।
डिबाई क्षेत्र में हुए हादसे में कार सवार परिवार के छह लोगों की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो बस बहुत तेज स्पीड में थी और टक्कर इतनी खतरनाक थी कि आसपास के लोग आवाज सुनकर गाड़ी की ओर भाग निकले।
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मृतकों की शिनाख्त भूदेवी पत्नी कल्यान सिंह (60), रामवती पत्नी छत्रपाल (45), प्रताप पुत्र कांति सिंह (35), वीरेंद्र पुत्र कांति सिंह (45), रोहित पुत्र वीरेंद्र सिंह (18) और कलुआ पुत्र महेश (40) के रूप में हुई। जबकि, विमला पुत्री चुन्नी लाल गंभीर रूप से घायल हो गयी थी। जिसका हायर मेडिकल सेंटर में उपचार चल रहा है। शनिवार सुबह सभी के शव पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचे तो परिजनों में चीत्कार मच गई। गांव के श्मशान घाट पर छह चिताआें का अंतिम संस्कार किया गया। इसे देख हर किसी का दिल भी दहल उठा। वहीं, लोगों की आंखें नम हो गईं। शोकाकुल परिवार को सांत्वना देने के लिए खुर्जा एसडीएम लवि त्रिपाठी और सीओ सुरेश सिंह पहुंचे।
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अगले महीने रोहित की होनी थी शादी
जानकारी के अनुसार हादसे में मारे गए 18 वर्षीय रोहित की शादी बीते दिनों ही बदायूं क्षेत्र निवासी एक युवती से तय हुई थी। बताया गया कि अगले माह उसकी शादी होनी थी। लेकिन, शादी से पूर्व ही हादसे ने उसकी जिंदगी को लील लिया।
न रुकती शीला तो वो भी होती शिकार
एक ओर शीला की मां की मौत हुई, जहां वह अपने पति व अन्य परिवार के सदस्यों के साथ शुक्रवार सुबह शामिल होने के लिए पहुंची थी। लेकिन, शाम को वह अपने मायके में ही रुक गई। लेकिन, उसे क्या पता था कि कुछ ही देर में उसके पति व अन्य पारिवारिक सदस्यों की मौत की खबर उसे झकझोर कर रख देगी। परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वह वापस नहीं आई थी। अगर कार में वह भी सवार होती तो वह भी हादसे की शिकार होतीं।