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वाह बीएसए साहब! मात्र 23 बच्चों को पढ़ा रहे पांच शिक्षक
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रमपुरा गांव के प्राथमिक विद्यालय में छोटे बच्चे जमीन पर और बड़े बच्चे बैंच पर बैठकर पढ़ाई करते हु
- फोटो : BULANDSHAHR
वाह साहब मात्र 23 बच्चों को पढ़ा रहे पांच शिक्षक
माई सिटी रिपोर्टर
बुलंदशहर। परिषदीय स्कूलों में शासन से लेकर प्रशासन और विभागीय आदेशों का कोई असर नहीं दिख रहा है। एक और जहां विभागीय अधिकारी कम शिक्षकों के होने का हवाला देते हैं। वहीं दूसरी ओर किसी स्कूल में 46 बच्चों को एक शिक्षक पढ़ा रहा है तो कहीं 23 बच्चों को पांच शिक्षक पढ़ा रहे हैं। इसका खुलासा मंगलवार को अमर उजाला द्वारा किए गए रमपुरा के दो परिषदीय स्कूलों के लाइव में हुआ। एक स्कूल में 23 बच्चों को पांच शिक्षक पढ़ाते मिले तो दूसरे में 72 बच्चों को तीन शिक्षक पढ़ा रहे थे। इस स्कूल के दो शिक्षक अवकाश पर बताए गए। शिक्षकों द्वारा बताए गए पंजीकृत बच्चों से भी बहुत कम बच्चे स्कूल में मौजूद रहे। इस दौरान बीएसए के दावों की भी पोल खुलती नजर आई।
बीएसए का दावा है कि एक ही परिसर में चल रहे स्कूलों को एक कर दिया गया है। जबकि यहां पर आज भी एक ही परिसर में दोनाें स्कूल अलग-अलग चल रहे हैं।
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सीन-1
अमर उजाला की टीम मंगलवार सुबह करीब 9.40 बजे पूर्व माध्यमिक विद्यालय रमपुरा पहुंची। यहां पर तैनात मुख्य अध्यापिका राजबाला ने बताया कि पांच शिक्षक और 50 बच्चे पंजीकृत हैं। जबकि स्कूल में मात्र 23 बच्चे ही पढ़ते मिले। जब बच्चे कम होने और नामांकन न बढ़ाने की बात की गई तो शिक्षिकाओं का कहना था कि अभी नामांकन नहीं हुआ है। जल्द ही नामांकन कर बच्चों की संख्या बढ़ाई जाएगी। एक शिक्षिका ने बताया कि वह आज ही अवकाश के बाद स्कूल पहुंची है और उसे नामांकन आदि की जानकारी नहीं है।
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सीन-2- प्राथमिक विद्यालय रमपुरा
परिसर में ही चल रहे प्राइमरी स्कूल में पांच शिक्षक तैनात बताए गए। मुख्य अध्यापिका कुसुमलता को सीएल पर और एक शिक्षामित्र को अवकाश पर बताया गया। इस स्कूल में 120 बच्चे पंजीकृत बताए गए, जबकि 72 बच्चे ही उपस्थित पाए गए। दो शिक्षकों के अवकाश पर होने के कारण कक्षा एक से चार तक के बच्चों को एक कक्षा में ही पढ़ाया जा रहा था, जबकि पांचवीं के बच्चों को दूसरे कक्ष में पढ़ाने की व्यवस्था मिली।
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कहीं मानक विहीन तो कहीं बना ही नहीं एमडीएम
पूर्व माध्यमिक विद्यालय रमपुरा में बच्चों के लिए एमडीएम के तहत दोपहर का भोजन तैयार किया जा रहा था। एक तो रसोई में चावल छोड़कर कुछ दिखाई नहीं दिया तो साथ ही भोजन मानक के अनुसार नहीं बनता मिला। 23 बच्चों के लिए एक किलो दाल बन रही थी। इसे पकाने के लिए एक कटी प्याज और कुछ लहसुन की पुटी के अलावा अन्य सामान भी जरूरत से कम प्रयोग किया गया। जबकि प्राइमरी स्कूल रमपुरा की रसोई बंद थी और खाना बनाने वाला रसोइयां भी नहीं था। इस समय इन बच्चों के लिए खाना बनता नहीं मिला।
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सिलिंडर चोरी, चूल्हे पर बन रहा खाना
अफसरों का आदेश है कि एमडीएम के तहत भोजन गैस सिलिंडर पर तैयार होना चाहिए। जबकि इन स्कूलों में चूल्हे पर बनता है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय का खाना भी चूल्हे पर बनता मिला। प्राइमरी स्कूल की बंद रसोई के बाहर भी चूल्हा बना हुआ मिला। चूल्हे में प्रयोग की जा रही लकड़ी से धुआं भी उठ रहा था। शिक्षकों ने सफाई दी कि पिछले दिनों सिलिंडर चोरी होने के कारण चूल्हे का प्रयोग किया जा रहा है।
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स्कूलों की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए समय-समय पर निरीक्षण कर खामियां मिलने पर कार्रवाई की जाती है। शिक्षकों को बच्चों की संख्या के आधार पर तैनात करने के लिए समायोजन की प्रक्रिया चल रही है। इन स्कूलों में जो भी खामियां मिली हैं। उनका पता कर दूर करवाने का काम किया जाएगा।
- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, बुलंदशहर
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माई सिटी रिपोर्टर
बुलंदशहर। परिषदीय स्कूलों में शासन से लेकर प्रशासन और विभागीय आदेशों का कोई असर नहीं दिख रहा है। एक और जहां विभागीय अधिकारी कम शिक्षकों के होने का हवाला देते हैं। वहीं दूसरी ओर किसी स्कूल में 46 बच्चों को एक शिक्षक पढ़ा रहा है तो कहीं 23 बच्चों को पांच शिक्षक पढ़ा रहे हैं। इसका खुलासा मंगलवार को अमर उजाला द्वारा किए गए रमपुरा के दो परिषदीय स्कूलों के लाइव में हुआ। एक स्कूल में 23 बच्चों को पांच शिक्षक पढ़ाते मिले तो दूसरे में 72 बच्चों को तीन शिक्षक पढ़ा रहे थे। इस स्कूल के दो शिक्षक अवकाश पर बताए गए। शिक्षकों द्वारा बताए गए पंजीकृत बच्चों से भी बहुत कम बच्चे स्कूल में मौजूद रहे। इस दौरान बीएसए के दावों की भी पोल खुलती नजर आई।
बीएसए का दावा है कि एक ही परिसर में चल रहे स्कूलों को एक कर दिया गया है। जबकि यहां पर आज भी एक ही परिसर में दोनाें स्कूल अलग-अलग चल रहे हैं।
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सीन-1
अमर उजाला की टीम मंगलवार सुबह करीब 9.40 बजे पूर्व माध्यमिक विद्यालय रमपुरा पहुंची। यहां पर तैनात मुख्य अध्यापिका राजबाला ने बताया कि पांच शिक्षक और 50 बच्चे पंजीकृत हैं। जबकि स्कूल में मात्र 23 बच्चे ही पढ़ते मिले। जब बच्चे कम होने और नामांकन न बढ़ाने की बात की गई तो शिक्षिकाओं का कहना था कि अभी नामांकन नहीं हुआ है। जल्द ही नामांकन कर बच्चों की संख्या बढ़ाई जाएगी। एक शिक्षिका ने बताया कि वह आज ही अवकाश के बाद स्कूल पहुंची है और उसे नामांकन आदि की जानकारी नहीं है।
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सीन-2- प्राथमिक विद्यालय रमपुरा
परिसर में ही चल रहे प्राइमरी स्कूल में पांच शिक्षक तैनात बताए गए। मुख्य अध्यापिका कुसुमलता को सीएल पर और एक शिक्षामित्र को अवकाश पर बताया गया। इस स्कूल में 120 बच्चे पंजीकृत बताए गए, जबकि 72 बच्चे ही उपस्थित पाए गए। दो शिक्षकों के अवकाश पर होने के कारण कक्षा एक से चार तक के बच्चों को एक कक्षा में ही पढ़ाया जा रहा था, जबकि पांचवीं के बच्चों को दूसरे कक्ष में पढ़ाने की व्यवस्था मिली।
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कहीं मानक विहीन तो कहीं बना ही नहीं एमडीएम
पूर्व माध्यमिक विद्यालय रमपुरा में बच्चों के लिए एमडीएम के तहत दोपहर का भोजन तैयार किया जा रहा था। एक तो रसोई में चावल छोड़कर कुछ दिखाई नहीं दिया तो साथ ही भोजन मानक के अनुसार नहीं बनता मिला। 23 बच्चों के लिए एक किलो दाल बन रही थी। इसे पकाने के लिए एक कटी प्याज और कुछ लहसुन की पुटी के अलावा अन्य सामान भी जरूरत से कम प्रयोग किया गया। जबकि प्राइमरी स्कूल रमपुरा की रसोई बंद थी और खाना बनाने वाला रसोइयां भी नहीं था। इस समय इन बच्चों के लिए खाना बनता नहीं मिला।
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सिलिंडर चोरी, चूल्हे पर बन रहा खाना
अफसरों का आदेश है कि एमडीएम के तहत भोजन गैस सिलिंडर पर तैयार होना चाहिए। जबकि इन स्कूलों में चूल्हे पर बनता है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय का खाना भी चूल्हे पर बनता मिला। प्राइमरी स्कूल की बंद रसोई के बाहर भी चूल्हा बना हुआ मिला। चूल्हे में प्रयोग की जा रही लकड़ी से धुआं भी उठ रहा था। शिक्षकों ने सफाई दी कि पिछले दिनों सिलिंडर चोरी होने के कारण चूल्हे का प्रयोग किया जा रहा है।
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स्कूलों की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए समय-समय पर निरीक्षण कर खामियां मिलने पर कार्रवाई की जाती है। शिक्षकों को बच्चों की संख्या के आधार पर तैनात करने के लिए समायोजन की प्रक्रिया चल रही है। इन स्कूलों में जो भी खामियां मिली हैं। उनका पता कर दूर करवाने का काम किया जाएगा।
- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, बुलंदशहर