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विद्यालय के जर्जर भवन का गिरा प्लास्टर, दो बच्चे हुए चोटिल
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विद्यालय के जर्जर भवन का गिरा प्लास्टर, दो बच्चे हुए चोटिल
ककोड़। क्षेत्र के गांव धनौरा में प्राथमिक विद्यालय नंबर दो में जर्जर भवन के कमरे की छत का प्लास्टर गिरने से शनिवार को दो बच्चे चोटिल हो गए। यह स्कूल काफी दिनों से जर्जर हाल है और 170 बच्चों की जान खतरे में है। इससे अफसर अंजान हैं और शिक्षकों का कहना है कि कई बार शिकायत के बाद भी किसी ने सुध नहीं ली है।
धनौरा प्राथमिक विद्यालय नंबर दो की प्रधानाध्यापिका शशिबाला ने बताया कि स्कूल में दो कमरे हैं और यह भवन पिछले काफी समय से जर्जर हाल है। यहां पर कक्षाएं चलाने और बच्चों को पढ़ाते समय डर बना रहता है कि कोई हादसा न हो जाए। भवन के कमरों की छत से हर समय प्लाटर टूट कर गिरता रहता है। ऐसा नहीं है कि इस समस्या से विभागीय अधिकारियों को अवगत न करवाया हो, लेकिन आज तक किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने बताया कि शनिवार की सुबह करीब 10.30 बजे विद्यालय के बरामदे का प्लास्टर अचानक गिर गया। जिस समय प्लास्टर गिर उस समय बच्चे बरामदें में बैठकर पढ़ रहे थे। बताया कि प्लास्टर के गिरने से दो बच्चे मामूली रूप से चोटिल हो गए। बताया कि विद्यालय का भवन काफी समय से जर्जर है। विद्यालय में मात्र तीन कमरे एक बरामदा है। एक कमरा आंगनबाड़ी को दिया गया है। विद्यालय में 170 बच्चे दो कमरों और बरामदे में बैठते हैं।
जर्जर भवनों की है लंबी फेहरिस्त
जिलें संचालित बेसिक शिक्षा विभाग के जर्जर स्कूल भवनों की लंबी फेहरिस्त है। शिकारपुर क्षेत्र के गांव चित्सौन स्थित स्कूल और गांव पूठरी समेत कई जर्जर स्कूलों का निरीक्षण कर खुलासा किया गया था। बावजूद इसके किसी ने भी अभी तक कोई सुध नहीं ली है। जबकि लोगों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही किसी भी बड़े हादसे को न्यौता दे सकती है। बता दें कि विभागीय अफसर लगातार मिशन कायाकल्प के तहत स्कूलों में अनेक विकास कार्य करवाने के दावे कर रहे हैं। बावजूद इसके स्कूलों की हालत दयनीय है।
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कोट
स्कूल के प्रति उच्च अधिकारियों से कई बार शिकायत कर चुके हैं। आज तक भी किसी ने संज्ञान नहीं ली है। यदि इस जर्जर भवन की ओर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसका कारण यह है कि आए दिन कमरों की छत से प्लास्टर गिरता रहता है। - विकास, ग्राम प्रधान
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ककोड़। क्षेत्र के गांव धनौरा में प्राथमिक विद्यालय नंबर दो में जर्जर भवन के कमरे की छत का प्लास्टर गिरने से शनिवार को दो बच्चे चोटिल हो गए। यह स्कूल काफी दिनों से जर्जर हाल है और 170 बच्चों की जान खतरे में है। इससे अफसर अंजान हैं और शिक्षकों का कहना है कि कई बार शिकायत के बाद भी किसी ने सुध नहीं ली है।
धनौरा प्राथमिक विद्यालय नंबर दो की प्रधानाध्यापिका शशिबाला ने बताया कि स्कूल में दो कमरे हैं और यह भवन पिछले काफी समय से जर्जर हाल है। यहां पर कक्षाएं चलाने और बच्चों को पढ़ाते समय डर बना रहता है कि कोई हादसा न हो जाए। भवन के कमरों की छत से हर समय प्लाटर टूट कर गिरता रहता है। ऐसा नहीं है कि इस समस्या से विभागीय अधिकारियों को अवगत न करवाया हो, लेकिन आज तक किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने बताया कि शनिवार की सुबह करीब 10.30 बजे विद्यालय के बरामदे का प्लास्टर अचानक गिर गया। जिस समय प्लास्टर गिर उस समय बच्चे बरामदें में बैठकर पढ़ रहे थे। बताया कि प्लास्टर के गिरने से दो बच्चे मामूली रूप से चोटिल हो गए। बताया कि विद्यालय का भवन काफी समय से जर्जर है। विद्यालय में मात्र तीन कमरे एक बरामदा है। एक कमरा आंगनबाड़ी को दिया गया है। विद्यालय में 170 बच्चे दो कमरों और बरामदे में बैठते हैं।
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जर्जर भवनों की है लंबी फेहरिस्त
जिलें संचालित बेसिक शिक्षा विभाग के जर्जर स्कूल भवनों की लंबी फेहरिस्त है। शिकारपुर क्षेत्र के गांव चित्सौन स्थित स्कूल और गांव पूठरी समेत कई जर्जर स्कूलों का निरीक्षण कर खुलासा किया गया था। बावजूद इसके किसी ने भी अभी तक कोई सुध नहीं ली है। जबकि लोगों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही किसी भी बड़े हादसे को न्यौता दे सकती है। बता दें कि विभागीय अफसर लगातार मिशन कायाकल्प के तहत स्कूलों में अनेक विकास कार्य करवाने के दावे कर रहे हैं। बावजूद इसके स्कूलों की हालत दयनीय है।
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स्कूल के प्रति उच्च अधिकारियों से कई बार शिकायत कर चुके हैं। आज तक भी किसी ने संज्ञान नहीं ली है। यदि इस जर्जर भवन की ओर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसका कारण यह है कि आए दिन कमरों की छत से प्लास्टर गिरता रहता है। - विकास, ग्राम प्रधान