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Bulandshahar News: उपभोक्ता आयोग के आदेश का पालन न करने पर बीडीए सचिव तलब
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बुलंदशहर। वर्ष 1992 में आवंटित प्लॉट पर कब्जा न देने और उपभोक्ता आयोग के आदेशों का पालन न करने के मामले में बीडीए सचिव को उपभोक्ता फोरम ने तलब किया है। इसके लिए नौ अक्टूबर की तारीख तय करते हुए पेश होने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एसएसपी को पत्र लिखकर निर्देशित किया है कि उक्त नोटिस को बीडीए सचिव को तामील किया जाए।
उपभोक्ता आयोग के जनसंपर्क अधिकारी शेखर वर्मा ने बताया कि देवीपुरा प्रथम निवासी प्यारेलाल ने वर्ष 1992 में बुलंदशहर विकास प्राधिकरण के कार्यालय में भूखंड आवंटन के लिए पंजीकरण किया था। इसके लिए 24 सितंबर 1992 को पंजीकरण की धनराशि 8980 रुपये जमा की गई थी। नौ जनवरी 1993 को विभाग के अधिकारियों ने उनके लिए भूखंड आरक्षित होने की जानकारी दी थी। जिस पर प्राधिकरण की ओर से 13440 रुपये का चालान भी जमा कराया गया था। आरोप है कि इसके बाद शेष धनराशि किश्तों में देने की बात कही थी, लेकिन प्राधिकरण अधिकारियों ने न तो भूखंड पर कब्जा दिया और न ही शेष धनराशि किश्तों में लेने के लिए कोई विवरण दिया।
मामले में उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई थी। जिस पर 17 दिसंबर 2019 को आयोग ने आदेश दिए थे कि पीड़ित द्वारा जमा की गई धनराशि को समायोजित करते हुए भूखंड का बैनामा किया जाए, यदि बैनामा कराना संभव नहीं है तो जमा की गई धनराशि पर वर्ष 1992 से 18 फीसदी की दर से ब्याज दिया जाए। इसके बाद भी बीडीए अधिकारियों ने कोई पालन नहीं किया था। जिस पर राज्य उपभोक्ता आयोग की शरण ली, जहां से भी पीड़ित के पक्ष में आदेश दिए थे। इसके बाद भी बीडीए अधिकारियों ने आदेश का पालन नहीं किया। अब उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी ने बुलंदशहर विकास प्राधिकरण की सचिव ज्योत्सना यादव को नोटिस जारी करते हुए नौ अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।
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उपभोक्ता आयोग के जनसंपर्क अधिकारी शेखर वर्मा ने बताया कि देवीपुरा प्रथम निवासी प्यारेलाल ने वर्ष 1992 में बुलंदशहर विकास प्राधिकरण के कार्यालय में भूखंड आवंटन के लिए पंजीकरण किया था। इसके लिए 24 सितंबर 1992 को पंजीकरण की धनराशि 8980 रुपये जमा की गई थी। नौ जनवरी 1993 को विभाग के अधिकारियों ने उनके लिए भूखंड आरक्षित होने की जानकारी दी थी। जिस पर प्राधिकरण की ओर से 13440 रुपये का चालान भी जमा कराया गया था। आरोप है कि इसके बाद शेष धनराशि किश्तों में देने की बात कही थी, लेकिन प्राधिकरण अधिकारियों ने न तो भूखंड पर कब्जा दिया और न ही शेष धनराशि किश्तों में लेने के लिए कोई विवरण दिया।
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मामले में उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई थी। जिस पर 17 दिसंबर 2019 को आयोग ने आदेश दिए थे कि पीड़ित द्वारा जमा की गई धनराशि को समायोजित करते हुए भूखंड का बैनामा किया जाए, यदि बैनामा कराना संभव नहीं है तो जमा की गई धनराशि पर वर्ष 1992 से 18 फीसदी की दर से ब्याज दिया जाए। इसके बाद भी बीडीए अधिकारियों ने कोई पालन नहीं किया था। जिस पर राज्य उपभोक्ता आयोग की शरण ली, जहां से भी पीड़ित के पक्ष में आदेश दिए थे। इसके बाद भी बीडीए अधिकारियों ने आदेश का पालन नहीं किया। अब उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी ने बुलंदशहर विकास प्राधिकरण की सचिव ज्योत्सना यादव को नोटिस जारी करते हुए नौ अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।
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