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71 आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर, कुछ में बांधे जा रहे पशु

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 08 Oct 2021 11:00 PM IST
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anganbadi center
अनूपशहर क्षेत्र के गांव मलकपुर में जर्जर आंगनबाड़ी भवन और बंधे पशु। - फोटो : BULANDSHAHR
71 आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर, कुछ में बांधे जा रहे पशु
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बुलंदशहर। नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के तहत आंगनबाड़ी केंद्र को प्ले स्कूल के रूप में विकसित करने के लिए काफी जोर आजमाइश करनी पड़ेगी।
जनपद में कुल 3967 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। जिसमें से 722 केंद्र बाल एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से बनवाए गए भवनों में संचालित हैं। इसमें से 71 केंद्र काफी जर्जर अवस्था में हैं। कहीं पर दरवाजे, कहीं छत और फर्श टूटी पड़ी है। दीवार गिरने की कगार पर पहुंच गई हैं। डीपोओ के अनुसार इन भवनों के ध्वस्तीकरण और मरम्मत के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है।
वहीं, अन्य केंद्र बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में संचालित किए जा रहे हैं। अनूपशहर क्षेत्र के गांव राजौर, करनपुर, पीर बियानी, रसूलपुर रिठौली, पिलखनवाली, दादुपुर नीला, हामिदपुर और सबलपुर आदि स्थानों पर आंगनबाड़ी केंद्र दयनीय स्थिति में हैं।
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जनपद के आंगनबाड़ी केंद्रों का विवरण
- आंगनबाड़ी केंद्रों के कुल लाभार्थी: 2,48,199
- आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत तीन से छह वर्ष तक बच्चों की संख्या: 58000
- कुपोषित बच्चों की संख्या: 7873
- छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों की संख्या: 1,28,025
- गर्भवती और धाती महिलाओं की संख्या: 54,266
एक हजार की आबादी पर एक आंगनबाड़ी केंद्र
विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिले में एक आंगनबाड़ी केंद्र एक हजार की आबादी पर स्थापित है। यहां पर तीन से छह साल तक के बच्चों का पंजीकरण होता है। केंद्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका बच्चों को अक्षर ज्ञान देने के अलावा उन्हें पुष्टाहार उपलब्ध करवाती हैं। साथ ही गर्भवती महिला और स्कूल न जाने वाली 14 वर्ष तक के किशोरियों के अलावा कुपोषित बच्चों के लिए पोषाहार उपलब्ध करवाया जाता है।
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केस एक : गांव मलकपुर
अनूपशहर क्षेत्र के गांव मलकपुर में दो आंगनबाड़ी केंद्र हैं। दोनों के भवन जर्जर हैं और इनका संचालन तीन साल से बंद है। एक केंद्र का भवन कभी भी गिर सकता है। दूसरे जर्जर भवन पर ग्रामीणाें ने कब्जा कर उसे अपने इस्तेमाल में लेना शुरू कर दिया है। ग्राम प्रधान बानो ने बताया कि नया केंद्र बनाए जाने की जरूरत है। इसके लिए अभी कोई आदेश नहीं मिला है।आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मालती देवी ने बताया कि बच्चाें को स्कूल भवन में बैठाया जा रहा है।
केस दो : आंचरू कलां
शिकारपुर क्षेत्र के गांव आंचरू कलां का आंगनबाड़ी केंद्र गांव के बाहर बना हुआ है और यह इस समय जर्जर हो चुका है। दो साल से संचालन नहीं हो रहा है। यहां पर कार्यरत कार्यकर्ता सुरेखा ने बताया कि बच्चों को प्राथमिक स्कूल में बुलाया जाता है और लाभार्थियों को पोषाहार का वितरण अपनेे घर से करती हैं। प्रधान अशोक ने बताया कि जर्जर हो चुके आंगनबाड़ी केंद्र के बारे में विभागीय अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

71 जर्जर हुए केंद्रों के ध्वस्तीकरण और मरम्मत के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है। बच्चों को संबंधित केंद्र के पास स्थित बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में बुलाया जाता है। आदेश मिलते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
- हरिओम वाजपेयी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल एवं पुष्टाहार विभाग।
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