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फर्जी एस्टीमेट देने के मामले में बिजली निगम के एक्सइएन निलंबित
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फर्जी एस्टीमेट देने के मामले में बिजली निगम के एक्सइएन निलंबित
बुलंदशहर। औरंगाबाद में एक निर्माणाधीन फैक्टरी को कनेक्शन जारी करने के लिए रिश्वत की मांग और न देने पर 1.65 करोड़ का फर्जी एस्टीमेट देने के मामले में एक्सइएन को निलंबित कर दिया गया है। फिलहाल एक्सइएन को डिस्कॉम कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
25 फरवरी को औरंगाबाद क्षेत्र में एक निर्माणाधीन बायमेड नामक फैक्टरी के लिए संचालक ने 500 किलोवाट के कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। इसके बाद कुछ अधिकारियों ने फैक्टरी मालिक से संपर्क साधते हुए रिश्वत की पेशकश कर दी। मांग पूरी न होने पर अधिकारियों ने इस पर आपत्ति लगाते हुए निर्माण कार्य पूरा न होने का दावा करते हुए कनेक्शन जारी करने पर रोक लगा दी। इसके बाद एक ठेकेदार के माध्यम से 1.65 करोड़ रुपये का फर्जी एस्टीमेट थमा दिया। मामले की शिकायत बिजली निगम के चेयरमैन एम देवराज तक पहुंची तो चेयरमैन के निर्देश पर एमडी ने डिस्कॉम के एसई संजय गर्ग को प्रकरण की जांच सौंपी। उन्होंने बुधवार ही को न केवल कार्यालय में जांच पड़ताल करते हुए अधिकारियों के बयान लिए थे, बल्कि साइट का भी निरीक्षण किया था। बताया जा रहा है कि मालिक ने एसडीओ के माध्यम से एस्टीमेट प्राप्त होने की बात कही। जबकि एसडीओ ने जांच अधिकारी को बताया था कि एक्सइएन के कहने पर कनेक्शन के आवेदन में आपत्ति लगाई थी।
बिना हस्ताक्षर के एस्टीमेट से बढ़ी परेशानी
फैक्टरी मालिक को बिजली निगम के एक ठेकेदार ने अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी एस्टीमेट सौंप दिया। इस एस्टीमेट पर किसी भी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे। जिसके चलते जांच अधिकारी ने माना कि एस्टीमेट बिना एक्सइएन की अनुमति और उनके संज्ञान में लाए हुए नहीं बनाया जा सकता है। ऐसे में उन्होंने एक्सइएन को प्राथमिक जांच में दोषी पाते हुए अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी।
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एमडी की ओर से एक्सइएन के खिलाफ कार्रवाई की गई है। अवकाश होने के कारण अभी तक कार्यालय में कोई आदेश नहीं मिला है। जल्द ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - गिरीश नारायण मिश्रा, एसई बिजली निगम
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बुलंदशहर। औरंगाबाद में एक निर्माणाधीन फैक्टरी को कनेक्शन जारी करने के लिए रिश्वत की मांग और न देने पर 1.65 करोड़ का फर्जी एस्टीमेट देने के मामले में एक्सइएन को निलंबित कर दिया गया है। फिलहाल एक्सइएन को डिस्कॉम कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
25 फरवरी को औरंगाबाद क्षेत्र में एक निर्माणाधीन बायमेड नामक फैक्टरी के लिए संचालक ने 500 किलोवाट के कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। इसके बाद कुछ अधिकारियों ने फैक्टरी मालिक से संपर्क साधते हुए रिश्वत की पेशकश कर दी। मांग पूरी न होने पर अधिकारियों ने इस पर आपत्ति लगाते हुए निर्माण कार्य पूरा न होने का दावा करते हुए कनेक्शन जारी करने पर रोक लगा दी। इसके बाद एक ठेकेदार के माध्यम से 1.65 करोड़ रुपये का फर्जी एस्टीमेट थमा दिया। मामले की शिकायत बिजली निगम के चेयरमैन एम देवराज तक पहुंची तो चेयरमैन के निर्देश पर एमडी ने डिस्कॉम के एसई संजय गर्ग को प्रकरण की जांच सौंपी। उन्होंने बुधवार ही को न केवल कार्यालय में जांच पड़ताल करते हुए अधिकारियों के बयान लिए थे, बल्कि साइट का भी निरीक्षण किया था। बताया जा रहा है कि मालिक ने एसडीओ के माध्यम से एस्टीमेट प्राप्त होने की बात कही। जबकि एसडीओ ने जांच अधिकारी को बताया था कि एक्सइएन के कहने पर कनेक्शन के आवेदन में आपत्ति लगाई थी।
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बिना हस्ताक्षर के एस्टीमेट से बढ़ी परेशानी
फैक्टरी मालिक को बिजली निगम के एक ठेकेदार ने अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी एस्टीमेट सौंप दिया। इस एस्टीमेट पर किसी भी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे। जिसके चलते जांच अधिकारी ने माना कि एस्टीमेट बिना एक्सइएन की अनुमति और उनके संज्ञान में लाए हुए नहीं बनाया जा सकता है। ऐसे में उन्होंने एक्सइएन को प्राथमिक जांच में दोषी पाते हुए अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी।
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एमडी की ओर से एक्सइएन के खिलाफ कार्रवाई की गई है। अवकाश होने के कारण अभी तक कार्यालय में कोई आदेश नहीं मिला है। जल्द ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - गिरीश नारायण मिश्रा, एसई बिजली निगम