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Bulandshahar News: बुलंदशहर के हर ब्लॉक में बनेगा स्थायी हेलीपैड
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बुलंदशहर। बुलंदशहर जिले की प्रशासनिक और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। शासन ने जिले के सभी 16 विकासखंडों में स्थायी हेलीपैड बनाने की योजना तैयार की है।
करीब 12.80 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। अभी तक 11 ब्लॉक क्षेत्रों में सरकारी भूमि चिह्नित कर ली गई है जबकि शेष पांच विकासखंडों में जमीन चयन का कार्य अंतिम चरण में है।
प्रशासन का मानना है कि स्थायी हेलीपैड बनने से केवल मुख्यमंत्री, राज्यपाल और केंद्रीय मंत्रियों के दौरे ही आसान नहीं होंगे बल्कि प्राकृतिक आपदा, सड़क दुर्घटनाओं, चिकित्सा आपातकाल और राहत एवं बचाव अभियानों में भी हेलीकॉप्टरों का तेजी से संचालन किया जा सकेगा।
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प्रत्येक ब्लॉक में होगा एक आधुनिक हेलीपैड
योजना के अनुसार प्रत्येक विकासखंड में लगभग 0.25 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर हेलीपैड बनाया जाएगा। प्रत्येक हेलीपैड पर लगभग 80 लाख रुपये खर्च होंगे। इस प्रकार जिले के सभी 16 विकासखंडों में निर्माण पर कुल 12.80 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
हेलीपैड का प्लेटफॉर्म 26×26 मीटर आकार का होगा। इससे बड़े हेलीकॉप्टर भी सुरक्षित रूप से उतर और उड़ान भर सकेंगे। परिसर तक पहुंचने के लिए 5.5 मीटर चौड़ी सीसी सड़क बनाई जाएगी। स्ट्रीट लाइट, जल निकासी, समतलीकरण और सुरक्षा संबंधी अन्य सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
11 ब्लॉकों में जमीन चयन पूरा
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले के बुलंदशहर, सिकंदराबाद, ऊंचागांव समेत 11 विकासखंडों में उपयुक्त सरकारी भूमि का चयन किया जा चुका है। शेष पांच ब्लॉकों में राजस्व और लोक निर्माण विभाग संयुक्त रूप से जमीन का अंतिम निरीक्षण कर रहे हैं। सभी स्थानों का चयन पूरा होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के आधार पर निर्माण प्रक्रिया शुरू होगी।
जिला प्रशासन ने शासन के निर्देशों के अनुरूप परियोजना का प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया है। अब बजट स्वीकृत होने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि शासन से धनराशि मिलते ही निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू कराया जाएगा। वर्तमान में जिले में मुख्यमंत्री, राज्यपाल या अन्य वीवीआईपी के दौरे से पहले प्रशासन को अस्थायी हेलीपैड तैयार करना पड़ता है।
इसके लिए जमीन समतल करने, सुरक्षा घेरा बनाने, पहुंच मार्ग तैयार करने और अन्य व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त समय और सरकारी धन खर्च होता है। स्थायी हेलीपैड बनने के बाद यह पूरी प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी।
आपदा के समय मिलेगी बड़ी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मिलेगा। बाढ़, आंधी, भीषण दुर्घटनाओं या अन्य आपात स्थितियों में राहत सामग्री, चिकित्सा दल और बचाव टीमों को सीधे प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाया जा सकेगा। गंभीर मरीजों को एयर एंबुलेंस के माध्यम से बड़े अस्पतालों तक ले जाने में भी आसानी होगी।
विकास परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार
जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, गंगा एक्सप्रेसवे और औद्योगिक विकास की विभिन्न योजनाओं के बीच बुलंदशहर का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रत्येक विकासखंड में स्थायी हेलीपैड बनने से प्रशासनिक गतिविधियों, निवेशकों के भ्रमण और उच्च स्तरीय निरीक्षण कार्यक्रमों को भी सुविधा मिलेगी।
जरूरत पड़ने पर सेना, अर्द्धसैनिक बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) तथा राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) भी इन हेलीपैड का उपयोग कर सकेंगे। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में प्रतिक्रिया समय कम होगा और राहत कार्य अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकेंगे।
कोट
शासन के निर्देश पर जिले के सभी 16 विकासखंडों में स्थायी हेलीपैड प्रस्तावित हैं। अब तक 11 ब्लॉक क्षेत्रों में सरकारी भूमि चिह्नित की जा चुकी है, जबकि शेष स्थानों पर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। बजट स्वीकृत होने के बाद टेंडर जारी कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। राहुल शर्मा, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
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करीब 12.80 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। अभी तक 11 ब्लॉक क्षेत्रों में सरकारी भूमि चिह्नित कर ली गई है जबकि शेष पांच विकासखंडों में जमीन चयन का कार्य अंतिम चरण में है।
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प्रशासन का मानना है कि स्थायी हेलीपैड बनने से केवल मुख्यमंत्री, राज्यपाल और केंद्रीय मंत्रियों के दौरे ही आसान नहीं होंगे बल्कि प्राकृतिक आपदा, सड़क दुर्घटनाओं, चिकित्सा आपातकाल और राहत एवं बचाव अभियानों में भी हेलीकॉप्टरों का तेजी से संचालन किया जा सकेगा।
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प्रत्येक ब्लॉक में होगा एक आधुनिक हेलीपैड
योजना के अनुसार प्रत्येक विकासखंड में लगभग 0.25 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर हेलीपैड बनाया जाएगा। प्रत्येक हेलीपैड पर लगभग 80 लाख रुपये खर्च होंगे। इस प्रकार जिले के सभी 16 विकासखंडों में निर्माण पर कुल 12.80 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
हेलीपैड का प्लेटफॉर्म 26×26 मीटर आकार का होगा। इससे बड़े हेलीकॉप्टर भी सुरक्षित रूप से उतर और उड़ान भर सकेंगे। परिसर तक पहुंचने के लिए 5.5 मीटर चौड़ी सीसी सड़क बनाई जाएगी। स्ट्रीट लाइट, जल निकासी, समतलीकरण और सुरक्षा संबंधी अन्य सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
11 ब्लॉकों में जमीन चयन पूरा
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले के बुलंदशहर, सिकंदराबाद, ऊंचागांव समेत 11 विकासखंडों में उपयुक्त सरकारी भूमि का चयन किया जा चुका है। शेष पांच ब्लॉकों में राजस्व और लोक निर्माण विभाग संयुक्त रूप से जमीन का अंतिम निरीक्षण कर रहे हैं। सभी स्थानों का चयन पूरा होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के आधार पर निर्माण प्रक्रिया शुरू होगी।
जिला प्रशासन ने शासन के निर्देशों के अनुरूप परियोजना का प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया है। अब बजट स्वीकृत होने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि शासन से धनराशि मिलते ही निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू कराया जाएगा। वर्तमान में जिले में मुख्यमंत्री, राज्यपाल या अन्य वीवीआईपी के दौरे से पहले प्रशासन को अस्थायी हेलीपैड तैयार करना पड़ता है।
इसके लिए जमीन समतल करने, सुरक्षा घेरा बनाने, पहुंच मार्ग तैयार करने और अन्य व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त समय और सरकारी धन खर्च होता है। स्थायी हेलीपैड बनने के बाद यह पूरी प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी।
आपदा के समय मिलेगी बड़ी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मिलेगा। बाढ़, आंधी, भीषण दुर्घटनाओं या अन्य आपात स्थितियों में राहत सामग्री, चिकित्सा दल और बचाव टीमों को सीधे प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाया जा सकेगा। गंभीर मरीजों को एयर एंबुलेंस के माध्यम से बड़े अस्पतालों तक ले जाने में भी आसानी होगी।
विकास परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार
जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, गंगा एक्सप्रेसवे और औद्योगिक विकास की विभिन्न योजनाओं के बीच बुलंदशहर का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रत्येक विकासखंड में स्थायी हेलीपैड बनने से प्रशासनिक गतिविधियों, निवेशकों के भ्रमण और उच्च स्तरीय निरीक्षण कार्यक्रमों को भी सुविधा मिलेगी।
जरूरत पड़ने पर सेना, अर्द्धसैनिक बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) तथा राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) भी इन हेलीपैड का उपयोग कर सकेंगे। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में प्रतिक्रिया समय कम होगा और राहत कार्य अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकेंगे।
कोट
शासन के निर्देश पर जिले के सभी 16 विकासखंडों में स्थायी हेलीपैड प्रस्तावित हैं। अब तक 11 ब्लॉक क्षेत्रों में सरकारी भूमि चिह्नित की जा चुकी है, जबकि शेष स्थानों पर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। बजट स्वीकृत होने के बाद टेंडर जारी कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। राहुल शर्मा, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग