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फसाद की जड़ 2800 बीघा ग्रामसभा की जमीन
अमर उजाला ब्यूरो, सिकंदराबाद
Updated Sun, 19 Jun 2016 12:08 AM IST
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गुस्से में किसान
- फोटो : अमर उजाला
चकबंदी के विरोध और समर्थन में हो रहे प्रदर्शन के पीछे प्रसाद की असल जड़ ग्रामसभा की 2800 बीघा जमीन है।
चकबंदी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसान पहले ग्राम समाज की जमीन चिन्हित कर मुक्त कराने की मांग कर रहे हैं। वही चकबंदी का समर्थन करने वाले भी ग्राम समाज की भूमि को मुक्त कराने की बात करते है, लेकिन उन्होंने आज तक प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं लिया।
बता दें कि ग्राम झाझर का 52 हजार बीघा जमीन का रकबा है। जिसमे 2800 बीघा जमीन ग्राम समाज की है। इसमें तालाबों, पोखरों, कस्टोडियन, विनोबाभव आदि की जमीन शामिल है। इस पर अवैध रूप से लोगों ने कब्जा कर रखा है।
चकबंदी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों की मांग है कि चकबंदी प्रक्रिया के दौरान, रास्तों, खेतों की सिचाई के लिए नालियों, तालाबों, खेल के मैदान, शमशान, पोखरों, आदि मदों की पूर्ति 2800 बीघा ग्राम समाज की जमीन से की जाए। यदि कमी पड़े तो उसके बाद किसानों की जमीनों से आवश्यकता अनुसार कटौती की जाए।
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चकबंदी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसान पहले ग्राम समाज की जमीन चिन्हित कर मुक्त कराने की मांग कर रहे हैं। वही चकबंदी का समर्थन करने वाले भी ग्राम समाज की भूमि को मुक्त कराने की बात करते है, लेकिन उन्होंने आज तक प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं लिया।
बता दें कि ग्राम झाझर का 52 हजार बीघा जमीन का रकबा है। जिसमे 2800 बीघा जमीन ग्राम समाज की है। इसमें तालाबों, पोखरों, कस्टोडियन, विनोबाभव आदि की जमीन शामिल है। इस पर अवैध रूप से लोगों ने कब्जा कर रखा है।
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चकबंदी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों की मांग है कि चकबंदी प्रक्रिया के दौरान, रास्तों, खेतों की सिचाई के लिए नालियों, तालाबों, खेल के मैदान, शमशान, पोखरों, आदि मदों की पूर्ति 2800 बीघा ग्राम समाज की जमीन से की जाए। यदि कमी पड़े तो उसके बाद किसानों की जमीनों से आवश्यकता अनुसार कटौती की जाए।
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