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गंगा में छोड़े जाएंगे 3500 कछुए
Updated Wed, 21 Nov 2018 01:00 AM IST
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गंगा में छोड़े जाएंगे 3500 कछुए
बुलंदशहर। गंगा नदी में कछुआ छोड़कर उसे निर्मल बनाने के लिए की जा रही पहल तेज हो गई है। गंगा में नमामि गंगे योजना के तहत कछुए छोड़ने की तैयारी अंतिम चरण में है। प्रथम चरण में 3500 कछुए छोड़े जाएंगे। कछुए हस्तिनापुर से गंगा के रामसर साइड में छोड़े जाएंगे। भारत सरकार नमामि गंगे के तहत गंगा नदी को अविरल और निर्मल बनाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। इस कार्य पर सरकार पैसा भी पानी की तरह बहा रही है। साथ ही कई महत्वपूर्ण कार्य कर गंगा को निर्मल बनाने की दिशा में काम किए जा चुके हैं। गंगा किनारे पौधे रोपित कर उसे प्रदूषण से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। हाल ही में सरकार ने गंगा में गिरने वाले गंदे नालों को भी बंद करवाने के निर्देश जारी किए हैं। इस कार्य में वन विभाग के साथ वर्ल्ड वाइल्ड फारेस्ट के अलावा समाजसेवी संस्थाओं का भी विशेष सहयोग लिया जा रहा है। पिछले दिनों सरकार ने गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए कछुए छोड़ने का निर्णय लिया था। अब गंगा में कछुए छोड़कर निर्मल बनाने की दिशा में पहल शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि प्रथम चरण में गंगा नदी में हस्तिनापुर से गंगा के रामसर साइड में 3500 कछुए छोड़ने की योजना है। मंडलीय वन संरक्षक अधिकारी वीके जैन और डीएफओ एनके उपाध्याय ने बताया कि गंगा नदी में कछुआ छोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। इसके लिए अंतिम रणनीति भी बना ली गई है।
हस्तिनापुर और झारखंड हैचरी से आएंगे कछुए
- गंगा नदी को अविरल और निर्मल बनाने के लिए कछुआ हस्तिनापुर और झारखंड की हैचरी से लाए जाएंगे। यहां पर बड़ी संख्या में कछुआ का पालन हो रहा है। इसके लिए दोनों हैचरी से विभागीय अफसरों ने संपर्क भी साधना शुरू कर दिया है। प्रथम चरण के बाद दूसरे चरण में और भी कछुए छोड़े जाएंगे।
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बुलंदशहर। गंगा नदी में कछुआ छोड़कर उसे निर्मल बनाने के लिए की जा रही पहल तेज हो गई है। गंगा में नमामि गंगे योजना के तहत कछुए छोड़ने की तैयारी अंतिम चरण में है। प्रथम चरण में 3500 कछुए छोड़े जाएंगे। कछुए हस्तिनापुर से गंगा के रामसर साइड में छोड़े जाएंगे। भारत सरकार नमामि गंगे के तहत गंगा नदी को अविरल और निर्मल बनाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। इस कार्य पर सरकार पैसा भी पानी की तरह बहा रही है। साथ ही कई महत्वपूर्ण कार्य कर गंगा को निर्मल बनाने की दिशा में काम किए जा चुके हैं। गंगा किनारे पौधे रोपित कर उसे प्रदूषण से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। हाल ही में सरकार ने गंगा में गिरने वाले गंदे नालों को भी बंद करवाने के निर्देश जारी किए हैं। इस कार्य में वन विभाग के साथ वर्ल्ड वाइल्ड फारेस्ट के अलावा समाजसेवी संस्थाओं का भी विशेष सहयोग लिया जा रहा है। पिछले दिनों सरकार ने गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए कछुए छोड़ने का निर्णय लिया था। अब गंगा में कछुए छोड़कर निर्मल बनाने की दिशा में पहल शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि प्रथम चरण में गंगा नदी में हस्तिनापुर से गंगा के रामसर साइड में 3500 कछुए छोड़ने की योजना है। मंडलीय वन संरक्षक अधिकारी वीके जैन और डीएफओ एनके उपाध्याय ने बताया कि गंगा नदी में कछुआ छोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। इसके लिए अंतिम रणनीति भी बना ली गई है।
हस्तिनापुर और झारखंड हैचरी से आएंगे कछुए
- गंगा नदी को अविरल और निर्मल बनाने के लिए कछुआ हस्तिनापुर और झारखंड की हैचरी से लाए जाएंगे। यहां पर बड़ी संख्या में कछुआ का पालन हो रहा है। इसके लिए दोनों हैचरी से विभागीय अफसरों ने संपर्क भी साधना शुरू कर दिया है। प्रथम चरण के बाद दूसरे चरण में और भी कछुए छोड़े जाएंगे।
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