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सर्वे भी हुआ नोटिस भी दिया...फिर भी नहीं सुधरी %काली’ की दशा
Updated Fri, 19 Oct 2018 10:44 PM IST
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सर्वे भी हुआ नोटिस भी दिया...नहीं सुधरी ‘काली’ की दशा
बुलंदशहर। वर्ष 2016 में काली नदी को प्रदूषित करने वालों के खिलाफ एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया था। इसके तहत एनजीटी के निर्देश पर बीडीए ने सर्वे भी किया था। साथ ही ऐसे तत्वों को चिन्हित कर उन्हें नोटिस जारी किए गए थे, जो काली नदी को गंदा करने में सहायक थे, लेकिन इतना समय बीत जाने और किए गए प्रयास के बाद भी काली नदी की दशा नहीं सुधर सकी है।
जनपद के चार ब्लॉकों से गुजरने वाली काली नदी के आसपास करीब पांच हजार और व्यावसायिक प्लांट बने हुए हैं। काली नदी जनपद के चार ब्लॉक अगौता, बुलंदशहर शिकारपुर और पहासू से होकर गुजर रही है। बुलंदशहर काली नदी पुल के आसपास करीब तीन हजार परिवार बसे हैं। आबादी क्षेत्र में जल निकासी का सही प्रबंधन नहीं होने से वहां का गंदा पानी काली नदी में बहा दिया जाता है। इससे काली नदी जहरीली हो चुकी है। काली नदी को वजूद में लाने के लिए एनजीटी ने वर्ष 2016 में जिला प्रशासन को नोटिस भेज ऐसे तत्वों को चिन्हित करने का आदेश दिया है, जो नदी को गंदा करने में लगे हुए हैं। एनजीटी ने कहा कि जो लोग काली नदी में गंदा पानी बहा रहे हैं। वह जल्द ऐसी व्यवस्था कर लें ताकि गंदा पानी काली नदी में न गिरे। यदि पानी गिराया भी जाए तो ट्रीटमेंट के बाद गिराया जाना चाहिए। यह सभी कार्य बीडीए को सौंपा गया था, लेकिन अभी तक सभी काम शून्य ही हैं।
नहीं रुके गंदे नाले
एनजीटी ने जिला प्रशासन को आदेश दिया था कि काली नदी में गिरने वाले गंदे नालों को बंद कराया जाए। इसके बावजूद जिला प्रशासन न तो सजग हुआ न ही गिरने वाले नालों का पानी रोक पाया है। पानी का ट्रीटमेंट करवाना तो दूर की बात है। फैक्ट्री आदि से निकलने वाला गंदा पानी भी लगातार नदी मेें पहुंच रहा है।
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नदी के आसपास का पानी भी हो चुका दूषित
काली नदी के आसपास गांवों का पानी भी दूषित हो चुका है। नदी के आसपास चारों ब्लॉकों में करीब 80 गांव आते हैं। साथ ही नगर क्षेत्र एक बड़ा हिस्सा भी इसके संपर्क में है।
काली नदी में आर्सेनिक फ्लोराइड
जलनिगम की रिपोर्ट पहले ही खुलासा कर चुकी है कि काली नदी के पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे हानिकारक तत्व हैं। यह तत्व स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। इससे कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने की संभावना अधिक रहती है। साथ ही कई और बीमारियां भी लोगों को चपेट में ले लेती हैं। इस तरह के मामले पूर्व में कई बार सामने आते रहे हैं।
कोट
काली नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। गंदे नाले का पानी रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही एनजीटी के आदेश पर सख्त रवैया अपनाया जाएगा। - ज्ञानेंद्र वर्मा, सचिव बीडीए।
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बुलंदशहर। वर्ष 2016 में काली नदी को प्रदूषित करने वालों के खिलाफ एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया था। इसके तहत एनजीटी के निर्देश पर बीडीए ने सर्वे भी किया था। साथ ही ऐसे तत्वों को चिन्हित कर उन्हें नोटिस जारी किए गए थे, जो काली नदी को गंदा करने में सहायक थे, लेकिन इतना समय बीत जाने और किए गए प्रयास के बाद भी काली नदी की दशा नहीं सुधर सकी है।
जनपद के चार ब्लॉकों से गुजरने वाली काली नदी के आसपास करीब पांच हजार और व्यावसायिक प्लांट बने हुए हैं। काली नदी जनपद के चार ब्लॉक अगौता, बुलंदशहर शिकारपुर और पहासू से होकर गुजर रही है। बुलंदशहर काली नदी पुल के आसपास करीब तीन हजार परिवार बसे हैं। आबादी क्षेत्र में जल निकासी का सही प्रबंधन नहीं होने से वहां का गंदा पानी काली नदी में बहा दिया जाता है। इससे काली नदी जहरीली हो चुकी है। काली नदी को वजूद में लाने के लिए एनजीटी ने वर्ष 2016 में जिला प्रशासन को नोटिस भेज ऐसे तत्वों को चिन्हित करने का आदेश दिया है, जो नदी को गंदा करने में लगे हुए हैं। एनजीटी ने कहा कि जो लोग काली नदी में गंदा पानी बहा रहे हैं। वह जल्द ऐसी व्यवस्था कर लें ताकि गंदा पानी काली नदी में न गिरे। यदि पानी गिराया भी जाए तो ट्रीटमेंट के बाद गिराया जाना चाहिए। यह सभी कार्य बीडीए को सौंपा गया था, लेकिन अभी तक सभी काम शून्य ही हैं।
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नहीं रुके गंदे नाले
एनजीटी ने जिला प्रशासन को आदेश दिया था कि काली नदी में गिरने वाले गंदे नालों को बंद कराया जाए। इसके बावजूद जिला प्रशासन न तो सजग हुआ न ही गिरने वाले नालों का पानी रोक पाया है। पानी का ट्रीटमेंट करवाना तो दूर की बात है। फैक्ट्री आदि से निकलने वाला गंदा पानी भी लगातार नदी मेें पहुंच रहा है।
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नदी के आसपास का पानी भी हो चुका दूषित
काली नदी के आसपास गांवों का पानी भी दूषित हो चुका है। नदी के आसपास चारों ब्लॉकों में करीब 80 गांव आते हैं। साथ ही नगर क्षेत्र एक बड़ा हिस्सा भी इसके संपर्क में है।
काली नदी में आर्सेनिक फ्लोराइड
जलनिगम की रिपोर्ट पहले ही खुलासा कर चुकी है कि काली नदी के पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे हानिकारक तत्व हैं। यह तत्व स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। इससे कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने की संभावना अधिक रहती है। साथ ही कई और बीमारियां भी लोगों को चपेट में ले लेती हैं। इस तरह के मामले पूर्व में कई बार सामने आते रहे हैं।
कोट
काली नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। गंदे नाले का पानी रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही एनजीटी के आदेश पर सख्त रवैया अपनाया जाएगा। - ज्ञानेंद्र वर्मा, सचिव बीडीए।