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धरा रह गया फरमान... भूगर्भ जलस्तर संरक्षण योजना ‘धड़ाम’

Sat, 06 Oct 2018 11:48 PM IST
Updated Sat, 06 Oct 2018 11:48 PM IST
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धरा रह गया फरमान... भूगर्भ जलस्तर संरक्षण योजना ‘धड़ाम’

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भूगर्भ जलस्तर संरक्षण योजना ‘धड़ाम’
बुलंदशहर। शासन से मिले आदेश के बावजूद मानसून खत्म होने के बाद भी भूगर्भ जलस्तर संरक्षण योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। इस योजना से संबंधित काम धरातल पर पहुंचने से पहले ही धड़ाम साबित हुए हैं। बारिश का पानी तालाबों में नहीं पहुंचा जिस कारण वह सूखे पड़े हैं। जबकि जिले के 12 ब्लॉक डार्कजोन में शामिल हो गए हैं।
जनपद में छह हजार से अधिक तालाब हैं जिसके लिए मानसून से पहले शासन व प्रशासन स्तर से आदेश जारी हुए थे कि भूगर्भ जलस्तर संरक्षण के लिए अफसर योजनाएं बनाएं और उसका क्रियान्वयन कराएं। जनपद में प्रत्येक वर्ष पानी का अधिक दोहन होने के कारण एक से डेढ़ फीट पानी नीचे जा रहा है। जिले के अधिकतर हिस्से में जलस्तर 200 फीट से अधिक नीचे चला गया है। यही वजह है कि अब तक 12 ब्लॉक डार्कजोन में शामिल हो गए हैं। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने तालाबों की सफाई और अन्य योजनाएं बनाकर बारिश के पानी से जलस्तर को बढ़ाने का प्रयास किया है। लेकिन यह सब धरातल से पहले ही कागजों तक ही सिमटकर रह गई। जिले के अधिकतर तालाब सूखे पड़े हैं। एक दशक पहले बने तालाबों में भी आज तक बारिश और गांव का पानी नहीं पहुंच पाया है। जबकि इसके लिए मनरेगा के लाखों रुपये की राशि जारी की गई थी। नए और पुराने तालाबों में पानी पहुंचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए। रजवाहों के लिए जारी की गई राशि का भी विभागीय अफसर प्रयोग नहीं कर पाए।
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ये थी योजनाएं और किए गए प्रयास
गत वर्ष शासन की खेत तालाब योजना से छह तालाब का लक्ष्य मिला। 50 फीसदी अनुदान पर तालाब के लिए अफसर किसानों की तलाश नहीं कर पाए। केंद्र सरकार की भूगर्भ जल स्तर को बढ़ाने के लिए 65 नए तालाब खुदवाने की योजना आई, लेकिन इस योजना के तहत आज तक एक भी तालाब की खुदाई नहीं हो पाई। बारिश के पानी की ग्राउंड वाटर रिचार्ज सिस्टम की योजना जिले में अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाई है। मानसून से पहले जिला प्रशासन ने 300 से अधिक तालाबों की सफाई करवाने और 50 से अधिक तालाब नए तालाब खुदवाने की योजना बनाई थी। साथ ही सड़कों और गांव को जाने वाले मुख्य मार्गों के किनारे गड्ढा खोदकर बारिश का पानी एकत्रित करने की योजना बनाई थी। यह सब कागजों तक ही सीमित रही। नए तालाब हो या फिर एक दशक पहले बने तालाब सब सूखे पड़े हैं।
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ये ब्लॉक हो चुके हैं डार्कजोन में शामिल
जिले में 16 ब्लॉक हैं। इनमें से 12 ब्लॉक डार्कजोन में शामिल हो चुके हैं। ब्लॉक बुलंदशहर, गुलावठी और सिकंदराबाद ब्लॉक अति दोहित श्रेणी में शामिल हैं। पहासू, खुर्जा, दानपुर, बीबीनगर, शिकारपुर और जहांगीराबाद क्रिटिकल श्रेणी में हैं। जबकि स्याना, ऊंचागांव और डिबाई सेमी क्रिटिकल श्रेणी में शामिल हैं। शेष ब्लॉक अरनिया, अगौता, अनूपशहर और लखावठी ब्लॉक ही सुरक्षित बचे हैं।

कोट
जिले में भूगर्भ जलस्तर को बढ़ाने के लिए सरकारी योजनाएं और जिला प्रशासन की ओर से किए जा रहे प्रयास जारी हैं। कुछ योजनाओं के लिए किसानों के आगे नहीं आने के कारण पूरी नहीं हो पाई। इन योजनाओं को पूरा करने के भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। तालाबों की सफाई और उनमें पानी पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। - सर्वेश चंद, प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी, बुलंदशहर
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