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शफीनगर के ग्राम प्रधान व सचिव पर भी गिरी गाज
Updated Sat, 06 Oct 2018 11:37 PM IST
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शफीनगर के ग्राम प्रधान व सचिव पर भी गिरी गाज
बुलंदशहर। शौचालय निर्माण में फर्जीवाड़ा और लाखों की हेराफोरी करने के आरोप में फंसे ऊंचागांव ब्लॉक क्षेत्र के गांव शफीनगर के ग्राम प्रधान के साथ ग्राम सचिव पर भी गाज गिर गई है। डीएम ने ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए, जबकि ग्राम सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही आगामी कार्रवाई के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का भी गठन कर दिया है।
ऊंचागांव क्षेत्र के गांव शफीनगर निवासी संतराम और सुरेंद्र सिंह ने डीएम को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि ग्राम प्रधान ने गांव में बनाए जा रहे शौचालयो में फर्जीवाड़ा कर लाखों की हेराफेरी की है। शिकायत मिलने पर डीएम के आदेश पर जब गांव में जांच करवाई गई तो लगाए गए आरोप सही पाए गए। साथ ही जांच में खुलासा हुआ था कि प्रधान ने पुराने शौचालयों को नया और अपात्रों के भी शौचालय बना दिए हैं। उस समय 12 लाख से अधिक की राशि की हेराफेरी का खुलासा हुआ था। इस पर ग्राम प्रधान को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन ग्राम प्रधान ने दोबारा जांच की मांग की थी। इस पर जिला प्रशासन ने दोबारा जांच करवाई। यह जांच जिला कृषि अधिकारी अश्विनी कुमार सिंह ने की थी और लगाए गए आरोप सही पाए गए थे। साथ ही शौचालय निर्माण की लगभग पौने नौ लाख की राशि की हेराफेरी सामने आई। प्रथम दृष्ट्या जांच मेें प्रधान के साथ ग्राम सचिव भी इसमें दोषी पाया गया। जिला पंचायती राज अधिकारी अमरजीत सिंह ने बताया कि डीएम अनुज कुमार झा ने आदेश जारी कर ग्राम प्रधान के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार आगामी आदेश तक सीज कर दिए हैं। ग्राम सचिव को नोटिस जारी किया है। साथ ही इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है। कमेटी की जांच रिपोर्ट आ जाने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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बुलंदशहर। शौचालय निर्माण में फर्जीवाड़ा और लाखों की हेराफोरी करने के आरोप में फंसे ऊंचागांव ब्लॉक क्षेत्र के गांव शफीनगर के ग्राम प्रधान के साथ ग्राम सचिव पर भी गाज गिर गई है। डीएम ने ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए, जबकि ग्राम सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही आगामी कार्रवाई के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का भी गठन कर दिया है।
ऊंचागांव क्षेत्र के गांव शफीनगर निवासी संतराम और सुरेंद्र सिंह ने डीएम को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि ग्राम प्रधान ने गांव में बनाए जा रहे शौचालयो में फर्जीवाड़ा कर लाखों की हेराफेरी की है। शिकायत मिलने पर डीएम के आदेश पर जब गांव में जांच करवाई गई तो लगाए गए आरोप सही पाए गए। साथ ही जांच में खुलासा हुआ था कि प्रधान ने पुराने शौचालयों को नया और अपात्रों के भी शौचालय बना दिए हैं। उस समय 12 लाख से अधिक की राशि की हेराफेरी का खुलासा हुआ था। इस पर ग्राम प्रधान को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन ग्राम प्रधान ने दोबारा जांच की मांग की थी। इस पर जिला प्रशासन ने दोबारा जांच करवाई। यह जांच जिला कृषि अधिकारी अश्विनी कुमार सिंह ने की थी और लगाए गए आरोप सही पाए गए थे। साथ ही शौचालय निर्माण की लगभग पौने नौ लाख की राशि की हेराफेरी सामने आई। प्रथम दृष्ट्या जांच मेें प्रधान के साथ ग्राम सचिव भी इसमें दोषी पाया गया। जिला पंचायती राज अधिकारी अमरजीत सिंह ने बताया कि डीएम अनुज कुमार झा ने आदेश जारी कर ग्राम प्रधान के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार आगामी आदेश तक सीज कर दिए हैं। ग्राम सचिव को नोटिस जारी किया है। साथ ही इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है। कमेटी की जांच रिपोर्ट आ जाने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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