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पहले समायोजन और अब पदस्थापन में खेल
Updated Sun, 30 Sep 2018 12:06 AM IST
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पहले समायोजन और अब पदस्थापन में खेल
बुलंदशहर। किसी न किसी बात को लेकर सुर्खियों में रहने वाला जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय एक बार फिर चर्चाओं में है। पहले शिक्षकों के समायोजन और अब पदस्थापन का खेल शुरू हो गया है। इसके नाम पर अवैध वसूली के आरोप लग रहे हैं। पदस्थापन भी नियम ताक पर रखकर किए जा रहे हैं।
वैसे तो जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय किसी न किसी विवाद के चलते चर्चाओं में रहता आया है। पिछले दिनों परिषदीय स्कूल शिक्षकों के समायोजन किए गए। इसकी जब लिस्ट जारी की गई तो उजागर हुआ कि समायोजन नियम के आधार पर नहीं किया। अधिकतर शिक्षकों को राहत देते हुए जहां तैनात थे वहीं, तैनाती दे दी। जहां पहले से एक विषय के दो शिक्षक तैनात थे। वहां तीसरे का और समायोजन कर दिया। इसे लेकर शिक्षकों ने विरोध जताया था और शिक्षक नेताओं ने अवैध वसूली के आरोप लगाए थे। मामला डीएम के संज्ञान में पहुंचा तो जांच के लिए एक टीम का गठन किया गया। इस टीम की रिपोर्ट भी आज तक उजागर नहीं की गई और अब शिक्षकों के पदस्थापन का खेल शुरू हो गया है। इसका जीता जागता उदाहरण शिकारपुर क्षेत्र के एक गांव में संचालित अंग्रेजी माध्यम का परिषदीय स्कूल है। इसमें तीन शिक्षकों की नियुक्ति दूसरे गांव के स्कूल से की गई। लेकिन अब उन्हें हिंदी भाषा का दर्शाते हुए उनका पदस्थापन कर दिया गया। इस स्कूल में अब शिक्षकों कम रह गए और पढ़ाई बाधित हो रही है। इसी तरह के पदस्थापन के अनेक मामले सामने आ रहे हैं। शिक्षक नेता वेदप्रकाश गुप्ता का कहना है कि पदस्थापन का खेल नियम के विरुद्ध किया जा रहा है। इसके एवज में अवैध वसूली भी हो रही है। समायोजन की जांच रिपोर्ट न उजागर कर अब कार्यालय में पदस्थापन का सहारा लेकर अफसर व कर्मचारी मौज कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अंबरीष कुमार का कहना है कि शिक्षकों से संबंधी जो भी काम किया जा रहा है। वह नियम के अनुसार हो रहा है। किसी तरह अवैध वसूली नहीं हो रही और यदि ऐसा हो रहा है तो उसकी जांच करवाई जाएगी।
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बुलंदशहर। किसी न किसी बात को लेकर सुर्खियों में रहने वाला जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय एक बार फिर चर्चाओं में है। पहले शिक्षकों के समायोजन और अब पदस्थापन का खेल शुरू हो गया है। इसके नाम पर अवैध वसूली के आरोप लग रहे हैं। पदस्थापन भी नियम ताक पर रखकर किए जा रहे हैं।
वैसे तो जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय किसी न किसी विवाद के चलते चर्चाओं में रहता आया है। पिछले दिनों परिषदीय स्कूल शिक्षकों के समायोजन किए गए। इसकी जब लिस्ट जारी की गई तो उजागर हुआ कि समायोजन नियम के आधार पर नहीं किया। अधिकतर शिक्षकों को राहत देते हुए जहां तैनात थे वहीं, तैनाती दे दी। जहां पहले से एक विषय के दो शिक्षक तैनात थे। वहां तीसरे का और समायोजन कर दिया। इसे लेकर शिक्षकों ने विरोध जताया था और शिक्षक नेताओं ने अवैध वसूली के आरोप लगाए थे। मामला डीएम के संज्ञान में पहुंचा तो जांच के लिए एक टीम का गठन किया गया। इस टीम की रिपोर्ट भी आज तक उजागर नहीं की गई और अब शिक्षकों के पदस्थापन का खेल शुरू हो गया है। इसका जीता जागता उदाहरण शिकारपुर क्षेत्र के एक गांव में संचालित अंग्रेजी माध्यम का परिषदीय स्कूल है। इसमें तीन शिक्षकों की नियुक्ति दूसरे गांव के स्कूल से की गई। लेकिन अब उन्हें हिंदी भाषा का दर्शाते हुए उनका पदस्थापन कर दिया गया। इस स्कूल में अब शिक्षकों कम रह गए और पढ़ाई बाधित हो रही है। इसी तरह के पदस्थापन के अनेक मामले सामने आ रहे हैं। शिक्षक नेता वेदप्रकाश गुप्ता का कहना है कि पदस्थापन का खेल नियम के विरुद्ध किया जा रहा है। इसके एवज में अवैध वसूली भी हो रही है। समायोजन की जांच रिपोर्ट न उजागर कर अब कार्यालय में पदस्थापन का सहारा लेकर अफसर व कर्मचारी मौज कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अंबरीष कुमार का कहना है कि शिक्षकों से संबंधी जो भी काम किया जा रहा है। वह नियम के अनुसार हो रहा है। किसी तरह अवैध वसूली नहीं हो रही और यदि ऐसा हो रहा है तो उसकी जांच करवाई जाएगी।
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