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पिता ने शादी में भेजने से इंकार किया तो किशोरी ने दी जान
Updated Fri, 06 Jul 2018 10:46 PM IST
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पिता ने शादी में भेजने से इंकार किया तो किशोरी ने दी जान
- गर्मी के कारण पिता ने चचेरे भाई की शादी में जाने से कर दिया था मना
अमर उजाला ब्यूरो
बुगरासी। कस्बा क्षेत्र के एक गांव में एक किशोरी ने मात्र इस बात पर अपनी लीला समाप्त कर ली कि उसके पिता ने उसे शादी में भेजने से इंकार कर दिया था। बृहस्पतिवार को किशोरी के चचेरे भाई की शादी थी। किशोरी ने शादी में जाने के लिए पहले ही मन बना लिया था। शादी के दिन किशोरी ने अपने पिता से शादी में जाने के लिए कहा तो पिता ने गर्मी को देखते हुए किशोरी को मना कर दिया। बताया जाता है कि पिता का कहना था कि बारिश और बीच में निकलने वाली तेज धूप में गर्मी में परेशानी को देखते हुए अपनी बेटी को घर ही रहने की सलाह दी। नाराज बेटी ने घर के सभी सदस्यों के शादी वाले घर में जाने के बाद अपने घर के मेन गेट को अंदर से बंद कर लिया तथा कमरे में जाकर पंखे पर लटक अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। परिजन जब घर आए तो गेट बंद था। दीवार फांदकर घर में घुसे तो नजारा देखकर पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन-फानन में बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मामले की सूचना पुलिस को नहीं दी गई। अंतिम संस्कार के बाद गमगीन माहौल में विवाह की रस्में पूरी की गईं। वहीं पुुलिस ने मामले की जानकारी से इंकार किया हैै।
बच्चों में बढ़ रही आत्महत्या की प्रवृत्ति
बुगरासी। माता-पिता की डांट और बच्चों की गलत बात का समर्थन नहीं करने पर बच्चों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। समाजसेवी एकल परिवार के बढ़ते चलन और टीवी व इंटरनेट की आदत को इसका जिम्मेदार मान रहे हैं। लगभग छह माह पूर्व स्कूल नहीं जाने पर परिजनों की डांट के बाद निकटवर्ती एक गांव में 11 वर्षीय एक बच्चे ने फंदा लगाकर जान देे दी थी। बृहस्पतिवार को एक 15 वर्षीय किशोरी ने पिता द्वारा शादी में भेजने की बात से नाराज होकर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इसके अतिरिक्त अनेक ऐसे मामले हैं जिनमें माता-पिता की बात और डांट से क्षुब्ध होकर कई युवकों ने जहरीले पदार्थ का सेवन किया है। इनमें कुछ को समय रहते बचा लिया गया, जबकि कुछ युवकों की जान चली गई। मनोविचारक सुरेंद्र सिंह माहुर ने कहा कि संयुक्त परिवार खत्म होते जा रहे हैं। बढ़ती महंगाई में माता-पिता घर का खर्चा चलाने के लिए नौकरी करते हैं और बच्चे समय काटने के लिए मोबाइल पर इंटरनेट, टीवी आदि का सहारा लेते हैं। अधिकांश समय अलग रहने के कारण बच्चों में अपने माता-पिता के प्रति स्नेह नहीं रहता। इंटरनेट पर गलत बातों से बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। इससे बच्चे मानसिक तनाव में जरा सी बात पर गलत कदम उठा लेते हैं। समाजसेवी ओमप्रकाश लोधी ने कहा कि प्रतिदिन बच्चों के साथ कम से कम एक घंटा बिताएं। बच्चों के मन की सुनें और उन्हें संस्कार दें। बड़ों की प्रति श्रद्घा और सही-गलत की जानकारी से गलत घटनाओं पर अंकुश लग सकता है। ब्यूरो
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- गर्मी के कारण पिता ने चचेरे भाई की शादी में जाने से कर दिया था मना
अमर उजाला ब्यूरो
बुगरासी। कस्बा क्षेत्र के एक गांव में एक किशोरी ने मात्र इस बात पर अपनी लीला समाप्त कर ली कि उसके पिता ने उसे शादी में भेजने से इंकार कर दिया था। बृहस्पतिवार को किशोरी के चचेरे भाई की शादी थी। किशोरी ने शादी में जाने के लिए पहले ही मन बना लिया था। शादी के दिन किशोरी ने अपने पिता से शादी में जाने के लिए कहा तो पिता ने गर्मी को देखते हुए किशोरी को मना कर दिया। बताया जाता है कि पिता का कहना था कि बारिश और बीच में निकलने वाली तेज धूप में गर्मी में परेशानी को देखते हुए अपनी बेटी को घर ही रहने की सलाह दी। नाराज बेटी ने घर के सभी सदस्यों के शादी वाले घर में जाने के बाद अपने घर के मेन गेट को अंदर से बंद कर लिया तथा कमरे में जाकर पंखे पर लटक अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। परिजन जब घर आए तो गेट बंद था। दीवार फांदकर घर में घुसे तो नजारा देखकर पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन-फानन में बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मामले की सूचना पुलिस को नहीं दी गई। अंतिम संस्कार के बाद गमगीन माहौल में विवाह की रस्में पूरी की गईं। वहीं पुुलिस ने मामले की जानकारी से इंकार किया हैै।
बच्चों में बढ़ रही आत्महत्या की प्रवृत्ति
बुगरासी। माता-पिता की डांट और बच्चों की गलत बात का समर्थन नहीं करने पर बच्चों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। समाजसेवी एकल परिवार के बढ़ते चलन और टीवी व इंटरनेट की आदत को इसका जिम्मेदार मान रहे हैं। लगभग छह माह पूर्व स्कूल नहीं जाने पर परिजनों की डांट के बाद निकटवर्ती एक गांव में 11 वर्षीय एक बच्चे ने फंदा लगाकर जान देे दी थी। बृहस्पतिवार को एक 15 वर्षीय किशोरी ने पिता द्वारा शादी में भेजने की बात से नाराज होकर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इसके अतिरिक्त अनेक ऐसे मामले हैं जिनमें माता-पिता की बात और डांट से क्षुब्ध होकर कई युवकों ने जहरीले पदार्थ का सेवन किया है। इनमें कुछ को समय रहते बचा लिया गया, जबकि कुछ युवकों की जान चली गई। मनोविचारक सुरेंद्र सिंह माहुर ने कहा कि संयुक्त परिवार खत्म होते जा रहे हैं। बढ़ती महंगाई में माता-पिता घर का खर्चा चलाने के लिए नौकरी करते हैं और बच्चे समय काटने के लिए मोबाइल पर इंटरनेट, टीवी आदि का सहारा लेते हैं। अधिकांश समय अलग रहने के कारण बच्चों में अपने माता-पिता के प्रति स्नेह नहीं रहता। इंटरनेट पर गलत बातों से बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। इससे बच्चे मानसिक तनाव में जरा सी बात पर गलत कदम उठा लेते हैं। समाजसेवी ओमप्रकाश लोधी ने कहा कि प्रतिदिन बच्चों के साथ कम से कम एक घंटा बिताएं। बच्चों के मन की सुनें और उन्हें संस्कार दें। बड़ों की प्रति श्रद्घा और सही-गलत की जानकारी से गलत घटनाओं पर अंकुश लग सकता है। ब्यूरो
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