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पांच हजार से अधिक बच्चों के फटे जूते
Updated Mon, 28 May 2018 12:12 AM IST
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परिषदीय स्कूलों में बांटे गए जूते तीन माह में ही फटे
बुलंदशहर। परिषदीय स्कूलों में पांच हजार से अधिक बच्चों के जूते समय से पहले ही फट गए। किरकिरी से बचने के लिए विभाग ने आनन-फानन में जूते बदलवा दिए, लेकिन अभी भी लगातार बच्चों के जूते फटने का सिलसिला जारी है। बीएसए का कहना है इसकी जांच करवाई जाएगी।
प्रदेश सरकार की ओर से परिषदीय स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों को निशुल्क किताब-कापी, ड्रेस, बैग और एमडीएम के अलावा इस बार निशुल्क जूते भी उपलब्ध करवाए गए। बच्चों को यह जूते ठंड से बचने के लिए दिए गए। जिस समय जूतों की खरीद की गई थी तो उस समय सरकारी नियमानुसार एक वर्ष की गारंटी के जूते खरीदे गए थे, लेकिन जिले में जूतों का वितरण फरवरी व मार्च में किया। बंटने के करीब तीन माह में ही जूते फटना शुरू हो गए। इस अवधि में पांच हजार से अधिक बच्चों के जूते समय से फटने की जब शिकायत विभाग को मिली तो किरकिरी से बचने के लिए आनन-फानन बदलवा दिए गए। इस पूरे मामले ने जूता खरीद की गई लापरवाही उजागर हो रही है। जूते बदलवाकर इस पूरे मामले को संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने दबाने का भी प्रयास किया है। वहीं, सरकार नियम का भी पालन न होने का भी खुलासा हुआ है। उधर, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अंबरीष कुमार सिंह यादव का कहना है कि जूतोें की खरीद उनके कार्यकाल से पहले ही हुई थी। मामला गंभीर है और इसकी जांच करवाई जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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बुलंदशहर। परिषदीय स्कूलों में पांच हजार से अधिक बच्चों के जूते समय से पहले ही फट गए। किरकिरी से बचने के लिए विभाग ने आनन-फानन में जूते बदलवा दिए, लेकिन अभी भी लगातार बच्चों के जूते फटने का सिलसिला जारी है। बीएसए का कहना है इसकी जांच करवाई जाएगी।
प्रदेश सरकार की ओर से परिषदीय स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों को निशुल्क किताब-कापी, ड्रेस, बैग और एमडीएम के अलावा इस बार निशुल्क जूते भी उपलब्ध करवाए गए। बच्चों को यह जूते ठंड से बचने के लिए दिए गए। जिस समय जूतों की खरीद की गई थी तो उस समय सरकारी नियमानुसार एक वर्ष की गारंटी के जूते खरीदे गए थे, लेकिन जिले में जूतों का वितरण फरवरी व मार्च में किया। बंटने के करीब तीन माह में ही जूते फटना शुरू हो गए। इस अवधि में पांच हजार से अधिक बच्चों के जूते समय से फटने की जब शिकायत विभाग को मिली तो किरकिरी से बचने के लिए आनन-फानन बदलवा दिए गए। इस पूरे मामले ने जूता खरीद की गई लापरवाही उजागर हो रही है। जूते बदलवाकर इस पूरे मामले को संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने दबाने का भी प्रयास किया है। वहीं, सरकार नियम का भी पालन न होने का भी खुलासा हुआ है। उधर, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अंबरीष कुमार सिंह यादव का कहना है कि जूतोें की खरीद उनके कार्यकाल से पहले ही हुई थी। मामला गंभीर है और इसकी जांच करवाई जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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