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नगर पालिका में बिना टेंडर लगा दिए लाइटों पर सेंसर
Updated Sun, 22 Apr 2018 10:45 PM IST
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नगर पालिका में बिना टेंडर लगा दिए लाइटों पर सेंसर
- शहर में 450 लाइटों पर लगाए जा चुके हैं सेंसर
- बिना टेंडर कार्य किया जाना बना पालिका में चर्चा का विषय
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। नगर पालिका में बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए स्ट्रीट लाइटों पर सेंसर लगाने का मामला प्रकाश में आया है। बताया जा रहा है कि बिना टेंडर प्रक्रिया के एक ठेकेदार से मिलकर पालिका अफसरों ने पूरे खेल को अंजाम लेते हुए शासन को लाखों का नुकसान पहुंचाया है। पूरा मामला नगर पालिका में चर्चा का विषय बना हुआ है।
नगर पालिका क्षेत्र में लगी स्ट्रीट लाइटों पर सेंसर लगाए जा रहे हैं। सेंसर लगाए जाने से सेट किए गए टाइम के अनुसार लाइटें स्वत: ही जल और बुझ जाएंगी। जिससे न केवल बिजली की बचत होगी, बल्कि लाइटों के खराब होने की संभावनाएं भी कम होंगी। सेंसर लगाए जाने के लिए नगर पालिका में टेंडर प्रक्रिया अपनाकर कम कीमत पर कार्य करने वाले ठेकेदार को टेंडर देना था, लेकिन अफसरों ने बिना प्रक्रिया अपनाए सेंसर लगाने का कार्य शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि अभी तक 450 से अधिक लाइटों पर सेंसर लगाए जा चुके हैं। बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए लाइटों पर सेंसर लगाए जाने से पालिका को लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। सूत्रों ने दावा किया है कि एक सेंसर की कीमत तीन हजार रुपये से अधिक है। नगर पालिका ईओ एके सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है,जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।
बोर्ड बैठक में नहीं रखा कोई प्रस्ताव
नगर पालिका की बोर्ड बैठक में भी लाइटों पर सेंसर लगाने के लिए कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया। ऐसे में बिना प्रस्ताव और टेंडर प्रक्रिया के लाइटों पर सेंसर लगाने के मामले में अफ सरों की मंशा पर सवालिया निशान लग गए हैं।
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- शहर में 450 लाइटों पर लगाए जा चुके हैं सेंसर
- बिना टेंडर कार्य किया जाना बना पालिका में चर्चा का विषय
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। नगर पालिका में बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए स्ट्रीट लाइटों पर सेंसर लगाने का मामला प्रकाश में आया है। बताया जा रहा है कि बिना टेंडर प्रक्रिया के एक ठेकेदार से मिलकर पालिका अफसरों ने पूरे खेल को अंजाम लेते हुए शासन को लाखों का नुकसान पहुंचाया है। पूरा मामला नगर पालिका में चर्चा का विषय बना हुआ है।
नगर पालिका क्षेत्र में लगी स्ट्रीट लाइटों पर सेंसर लगाए जा रहे हैं। सेंसर लगाए जाने से सेट किए गए टाइम के अनुसार लाइटें स्वत: ही जल और बुझ जाएंगी। जिससे न केवल बिजली की बचत होगी, बल्कि लाइटों के खराब होने की संभावनाएं भी कम होंगी। सेंसर लगाए जाने के लिए नगर पालिका में टेंडर प्रक्रिया अपनाकर कम कीमत पर कार्य करने वाले ठेकेदार को टेंडर देना था, लेकिन अफसरों ने बिना प्रक्रिया अपनाए सेंसर लगाने का कार्य शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि अभी तक 450 से अधिक लाइटों पर सेंसर लगाए जा चुके हैं। बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए लाइटों पर सेंसर लगाए जाने से पालिका को लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। सूत्रों ने दावा किया है कि एक सेंसर की कीमत तीन हजार रुपये से अधिक है। नगर पालिका ईओ एके सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है,जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।
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बोर्ड बैठक में नहीं रखा कोई प्रस्ताव
नगर पालिका की बोर्ड बैठक में भी लाइटों पर सेंसर लगाने के लिए कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया। ऐसे में बिना प्रस्ताव और टेंडर प्रक्रिया के लाइटों पर सेंसर लगाने के मामले में अफ सरों की मंशा पर सवालिया निशान लग गए हैं।
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