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मृतक के खाते का हो रहा संचालन, मृतक पर बैंक की तीन लाख 9
Updated Tue, 20 Feb 2018 12:53 AM IST
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सात साल पहले हो गई थी मौत, खाता चला रहा बैंक
बुगरासी। बैंक में किसानों की कर्ज माफी में खेल चल रहा है। किसान करन सिंह के परिजनों का दावा है कि उनके पिता की मौत सात साल पहले ही हो गई लेकिन बैंक उसके खाते से लेन-देन करता रहा। इसका खुलासा तब हुआ जब कर्ज माफी की टीम सर्वे के लिए परिजनों के पास पहुंची और मृतक के नाम के केसीसी कर्ज और उसकी माफी और बची रकम का ब्यौरा परिजनों को दिया।
खुलासे के बाद बैंक अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। परिजनों ने जब मामले को जांचा तो पाया की करन सिंह की मौत के सात साल बाद भी उसका खाता बैंक द्वारा संचालित किया जा रहा है। बैंक बकायदा खाते से लेन-देन कर रहा था। मृतक के बेटे ने बैंक अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की है, जिस पर बैंक को कानूनी नोटिस भी जारी करा दिया है।
हाजीपुर निवासी किसान करन सिंह का इलाहाबाद बैंक बुगरासी में केसीसी और बचत खाता है। करन सिंह की 19 फरवरी 2011 को मौत हो गई थी। बड़े बेटे फतह सिंह का कहना है कि उसने पिता की मौत की सूचना बैंक में लिखित रूप से दी थी। करन सिंह के छोटे बेटे चरन सिंह ने बताया कि उनके पिता ने वर्ष 2008 में एक लाख रुपये का केसीसी लोन लिया था। पिता की मृत्यु के बाद भी बैंक ने खाते को बंद नहीं किया। आज तक बैंक ने उनके पिता के लोन की रिकवरी से संबंधित कोई सूचना भी नहीं दी। हाल ही में जब करन सिंह का नाम कर्ज माफी की लिस्ट में शामिल नहीं हुआ, तो जानकारी की गई। चरन सिंह ने बताया कि बैंक स्टेटमेंट निकालने पर पता चला कि उनके पिता के खाते का अभी भी बैंक अधिकारी लगातार संचालन कर रहे हैं। इस कारण एक लाख की छूट तो मिली ही नहीं, साथ ही लोन की रकम भी बढ़कर तीन लाख 987 रुपये हो गई। चरन सिंह ने बैंक प्रबंधक सहित जोनल ऑफिसर व सीएमडी को लीगल नोटिस जारी कराया है। साथ ही गलत तरीके से मृतक के खाते से लेनदेन करने पर रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए न्यायालय की शरण ली है।
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वर्जन
जब तक लोन की रकम जमा नहीं की जाती है, तब तक खाता बंद नहीं होता है। केसीसी और सेविंग में एक एंट्री की है इसे खाता संचालन नहीं कहा जाता है। इससे खाते को दुरुस्त किया जाता है।
राजवीर सिंह, शाखा प्रबंधक
इस मामले की मुझे जानकारी नहीं है। अभी मैं बाहर हूं। बैंक जाकर खाता चेक करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- जितेंद्र कुमार, चीफ मैनेजर मुरादाबाद हेड ऑफिस
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बुगरासी। बैंक में किसानों की कर्ज माफी में खेल चल रहा है। किसान करन सिंह के परिजनों का दावा है कि उनके पिता की मौत सात साल पहले ही हो गई लेकिन बैंक उसके खाते से लेन-देन करता रहा। इसका खुलासा तब हुआ जब कर्ज माफी की टीम सर्वे के लिए परिजनों के पास पहुंची और मृतक के नाम के केसीसी कर्ज और उसकी माफी और बची रकम का ब्यौरा परिजनों को दिया।
खुलासे के बाद बैंक अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। परिजनों ने जब मामले को जांचा तो पाया की करन सिंह की मौत के सात साल बाद भी उसका खाता बैंक द्वारा संचालित किया जा रहा है। बैंक बकायदा खाते से लेन-देन कर रहा था। मृतक के बेटे ने बैंक अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की है, जिस पर बैंक को कानूनी नोटिस भी जारी करा दिया है।
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हाजीपुर निवासी किसान करन सिंह का इलाहाबाद बैंक बुगरासी में केसीसी और बचत खाता है। करन सिंह की 19 फरवरी 2011 को मौत हो गई थी। बड़े बेटे फतह सिंह का कहना है कि उसने पिता की मौत की सूचना बैंक में लिखित रूप से दी थी। करन सिंह के छोटे बेटे चरन सिंह ने बताया कि उनके पिता ने वर्ष 2008 में एक लाख रुपये का केसीसी लोन लिया था। पिता की मृत्यु के बाद भी बैंक ने खाते को बंद नहीं किया। आज तक बैंक ने उनके पिता के लोन की रिकवरी से संबंधित कोई सूचना भी नहीं दी। हाल ही में जब करन सिंह का नाम कर्ज माफी की लिस्ट में शामिल नहीं हुआ, तो जानकारी की गई। चरन सिंह ने बताया कि बैंक स्टेटमेंट निकालने पर पता चला कि उनके पिता के खाते का अभी भी बैंक अधिकारी लगातार संचालन कर रहे हैं। इस कारण एक लाख की छूट तो मिली ही नहीं, साथ ही लोन की रकम भी बढ़कर तीन लाख 987 रुपये हो गई। चरन सिंह ने बैंक प्रबंधक सहित जोनल ऑफिसर व सीएमडी को लीगल नोटिस जारी कराया है। साथ ही गलत तरीके से मृतक के खाते से लेनदेन करने पर रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए न्यायालय की शरण ली है।
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जब तक लोन की रकम जमा नहीं की जाती है, तब तक खाता बंद नहीं होता है। केसीसी और सेविंग में एक एंट्री की है इसे खाता संचालन नहीं कहा जाता है। इससे खाते को दुरुस्त किया जाता है।
राजवीर सिंह, शाखा प्रबंधक
इस मामले की मुझे जानकारी नहीं है। अभी मैं बाहर हूं। बैंक जाकर खाता चेक करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- जितेंद्र कुमार, चीफ मैनेजर मुरादाबाद हेड ऑफिस