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हौंसलों की उड़ान में उम्र भी नहीं बन पाई बाधा
Updated Sat, 23 Dec 2017 11:13 PM IST
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हौसलों की उड़ान में उम्र भी नहीं बन पाई बाधा
- 50 वर्ष की उम्र में तरुणा ने शुरू किया महिलाओं के लिए अभियान
- शादी से पहले 15 वर्षों तक बाइक राइडिंग कर चुकी हैं तरुणा सिंह
- 47 की उम्र में दिल्ली की सुजाता ने भी गाड़े झंडे
पुनीत शर्मा
बुलंदशहर। कहावत है कि मन में किसी कार्य को करने की ठान लें तो उम्र व सभी बाधाएं अपने आप दूर हो जाती हैं। इस कहावत को जयपुर की रहने वाली तरुणा सिंह और दिल्ली की सुजाता ने पूरी तरह से सही साबित किया है। जिस उम्र में लोग जीने का हौसला खो देते हैं, उस उम्र में इन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए अलख जगाई हुई है।
महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार, सामाजिक संगठन, धार्मिक संगठन नित नए-नए कार्यक्रमों का आयोजन कर बढ़ावा देने का दावा कर रहे हैं। वहीं अपनी जिंदगी के पांच दशक देखने के बाद महिला सशक्तिकरण के लिए आगे आईं तरुणा सिंह लोगों के लिए एक प्रेरणा बनीं हुई हैं। मूल रूप से जयपुर राजस्थान निवासी तरुणा सिंह वर्तमान में अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती हैं। पेशे से फुटबाल कोच तरुणा सिंह ने बताया कि शादी से पहले उन्हें बाइक राइडिंग का शौक था, लेकिन शादी के बाद वह अपने परिवार के साथ सबकुछ भूल गईं। खुद को जिमनास्टिक दीपा कारमाकर की बचपन की दोस्त बताते हुए तरुणा सिंह ने बताया कि जब से दीपा ने ओलंपिक में भारत का गौरव बढ़ाया तो उनका भी हौसला सातवें आसमान पर पहुंच गया। इसके बाद गत वर्ष उन्होंने फिर से बाइक राइडिंग कर सामाजिक मुद्दों पर लोगों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया। दूसरी ओर दिल्ली निवासी 47 वर्षीय सुजाता सिंह ने भी उम्र को महज एक नंबर बताते हुए सभी बाधाओं को दूर कर महिला सशक्तिकरण के लिए मुहिम छेड़ दी। महिला सशक्तिकरण के लिए बाइक रैली निकालकर जागरूक करने वाली टीम में तरुणा सिंह सबसे उम्रदराज हैं तो सुजाता सिंह दूसरे स्थान पर हैं। दोनों का कहना है कि वह हर संभव प्रयास कर अधिक से अधिक महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगी।
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- 50 वर्ष की उम्र में तरुणा ने शुरू किया महिलाओं के लिए अभियान
- शादी से पहले 15 वर्षों तक बाइक राइडिंग कर चुकी हैं तरुणा सिंह
- 47 की उम्र में दिल्ली की सुजाता ने भी गाड़े झंडे
पुनीत शर्मा
बुलंदशहर। कहावत है कि मन में किसी कार्य को करने की ठान लें तो उम्र व सभी बाधाएं अपने आप दूर हो जाती हैं। इस कहावत को जयपुर की रहने वाली तरुणा सिंह और दिल्ली की सुजाता ने पूरी तरह से सही साबित किया है। जिस उम्र में लोग जीने का हौसला खो देते हैं, उस उम्र में इन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए अलख जगाई हुई है।
महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार, सामाजिक संगठन, धार्मिक संगठन नित नए-नए कार्यक्रमों का आयोजन कर बढ़ावा देने का दावा कर रहे हैं। वहीं अपनी जिंदगी के पांच दशक देखने के बाद महिला सशक्तिकरण के लिए आगे आईं तरुणा सिंह लोगों के लिए एक प्रेरणा बनीं हुई हैं। मूल रूप से जयपुर राजस्थान निवासी तरुणा सिंह वर्तमान में अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती हैं। पेशे से फुटबाल कोच तरुणा सिंह ने बताया कि शादी से पहले उन्हें बाइक राइडिंग का शौक था, लेकिन शादी के बाद वह अपने परिवार के साथ सबकुछ भूल गईं। खुद को जिमनास्टिक दीपा कारमाकर की बचपन की दोस्त बताते हुए तरुणा सिंह ने बताया कि जब से दीपा ने ओलंपिक में भारत का गौरव बढ़ाया तो उनका भी हौसला सातवें आसमान पर पहुंच गया। इसके बाद गत वर्ष उन्होंने फिर से बाइक राइडिंग कर सामाजिक मुद्दों पर लोगों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया। दूसरी ओर दिल्ली निवासी 47 वर्षीय सुजाता सिंह ने भी उम्र को महज एक नंबर बताते हुए सभी बाधाओं को दूर कर महिला सशक्तिकरण के लिए मुहिम छेड़ दी। महिला सशक्तिकरण के लिए बाइक रैली निकालकर जागरूक करने वाली टीम में तरुणा सिंह सबसे उम्रदराज हैं तो सुजाता सिंह दूसरे स्थान पर हैं। दोनों का कहना है कि वह हर संभव प्रयास कर अधिक से अधिक महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगी।
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