बिल्सी। कछला रोड स्थित ज्वाला प्रसाद जैन स्कूल में सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथावाचक रामचन्दाचार्य ने सुदामा चरित्र का वर्णन किया। कहा कि मित्रता करो, तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करो।
एक सच्चा मित्र वही है, जो अपने मित्र के दुःख को बिना कहे समझ जाए। दुःख, कष्ट के समय हमेशा सहयोग के लिए खड़ा रहे। अपने मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताए ही मदद कर दे, परंतु आजकल स्वार्थ की मित्रता रह गई है। जब तक स्वार्थ सिद्ध नहीं होता है, तब तक मित्रता रहती है। जब स्वार्थ पूरा हो जाता है, मित्रता खत्म हो जाती है। उन्होंने कहा कि सुदामा संसार में सबसे अनोखे भक्त रहे हैं। वह जीवन में जितने गरीब नजर आए, उतने वे मन से धनवान थे। उन्होंने अपने सुख व दुखों को भगवान की इच्छा पर सौंप दिया था। श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। उन्होंने कहा कि जब सुदामा भगवान श्रीकृष्ण ने मिलने आए तो उन्होंने सुदामा के फटे कपड़े नहीं देखे, बल्कि मित्र की भावनाओं को देखा। मनुष्य को अपना कर्म नहीं भूलना चाहिए। अगर सच्चा मित्र है तो श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होना चाहिए। जीवन में मनुष्य को श्रीकृष्ण की तरह अपनी मित्रता निभानी चाहिए। कथावाचक ने इससे पहले यहां कई अन्य प्रसंगों की सुनाया। बाद में भगवान की आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। इस मौके पर महंत मटरुमल शर्मा महाराज, संजीव शर्मा, राजीव शर्मा, दीपक माहेश्वरी, सौरभ सोमानी, चारु सोमानी, जितेंद्र कुमार, सुभाष चंद्र वाहेती, सुवीन माहेश्वरी, अनीता माहेश्वरी, शरद माहेश्वरी, रंजन माहेश्वरी, विशाल भारत खासट, डा.राजाबाबू वाष्र्णेय, अनूप माहेश्वरी, नीरेश माहेश्वरी, निशांत, नीरज, सरिता, मोहित देवल आदि मौजूद रहे।

भागवत कथा सुनाते कथावाचक रामचन्दाचार्य। संवाद