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वाह रे अस्पताल! एक डॉक्टर, वह भी बीमार
Ujani
Updated Mon, 22 Jun 2015 07:04 PM IST
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सोमवार को मरीजों के लिए अजीब नजारे से रूबरू होना पड़ा। मरीजों ने जिस केबिन में झांका वहां खाली कुर्सियां ही नजर आईं। पिछले महीना से एपलॉयड टू ईएल पर चल रहे चिकित्साधीक्षक विश्वास अग्रवाल समेत कुछ डॉक्टरों की गैरमौजूदगी के बीच इकलौते बचे डॉ. निरंजन सिंह भी बीमार मिले। पूर्वाह्न तक मरीजों को देखते-देखते वह डी-हाइड्रेशन के शिकार हो गए। हालत बिगड़ने पर उन्हें ड्रिप का सहारा लेना पड़ा।
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पूर्वाह्न तक सबकुछ ठीकठाक चला, लेकिन दोपहर में जब डॉ. निरंजन सिंह की हालत बिगड़ी तो अधीनस्थों के भी हाथ-पैर फूल गए। आनन-फानन में उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। कोई और डॉक्टर मौजूद नहीं था, सो महिला रोग विशेषज्ञ हिना सबदर और फार्मेसिस्ट शिवम रस्तोगी ही डी-हाइड्रेशन के शिकार डॉ. सिंह को ड्रिप लगाने पहुंच गए। इमरजेंसी में वार्ड ब्यॉय मनोज कुमार पहले से ही बीमारी की वजह से भर्ती था। जबकि बीमारी के चलते ही नर्स भी स्टॉफ रूम में बेंच पर लेटी मिलीं। सेहत में सुधार होने पर डॉ. सिंह ने बताया कि करीब एक सौ मरीजों को उन्हें पूर्वाह्न तक देखा था।
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अस्पताल में डॉक्टरों के नहीं मिलने से परेशान मरीजों ने चिकित्साधीक्षक केबिन के बाहर हंगामा भी किया। जब उन्हें ड्यृटी पर तैनात इकलौते डॉक्टर के बीमार पड़ जाने की भनक लगी तो बिना इलाज कराए ही एक सौ से अधिक मरीज लौट गए।
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बता दें कि सीएचसी पर चिकित्साधीक्षक के अलावा डॉक्टरों के नाम पर विकास मिश्रा, एके अवस्थी, वीरेश कुमार, राजकुमार गंगवार और निरंजन सिंह की तैनाती है। राजकुमार को घरेलू कारणों से अचानक ही घर जाना पड़ गया था। चिकित्साधीक्षक तो पिछले महीना से ही एपलॉयड टू ईएल पर चले गए हैं पर अवस्थी, मिश्रा और वीरेश की गैरमौजूदगी बिना अफसरों की शह पर लोगों के गले नहीं उतर रही है।
एलटी करता है दस्तखत
महीना में दो-तीन बार पहुंचने वाले संविदा के एक डॉक्टर ने उपस्थिति रजिस्टर में खुद के हस्ताक्षर करने के लिए अपने परिचित क्षय रोग अनुभाग में तैनात एलटी को अधिकार सौंप रखा है। डॉक्टर साहब भले ही अपने निजी क्लीनिक पर बैठे हों, लेकिन रजिस्टर पर गौर करते ही पता लगेगा कि वह ड्यूटी पर हैं। पोल खुलने पर स्वास्थ्य कर्मियों ने गैरहाजिर डॉक्टर के कृपापात्र को हड़का भी दिया।
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चंदौसी से चलता है वित्तीय कामकाज
एपलॉयड टू ईएल पर चल रहे चिकित्साधीक्षक विश्वास अग्रवाल के बारे में सूत्रों की मानें तो वह भले ही अस्पताल नहीं पहुंचे, लेकिन वित्तीय कामकाज पूरा कराने और भुगतान के चेकों पर हस्ताक्षर कराने के लिए बाबू को चंदौसी जाना पड़ता है। सोमवार को भी एक बाबू चंदौसी के लिए गया। वहां जाकर उसने चिकित्साधीक्षक से अभिलेखीय औपचारिकताएं पूरी कराईं। मजेदार बात तो यह है कि चिकित्साधीक्षक की गैरमौजूदगी में किसी भी चिकित्साधिकारी को एमओआईसी का प्रभार नहीं सौंपा जाता है।
अच्छा रहेगा कि बंद करा दें अस्पताल
उझानी। डॉक्टरों की गैरमौजूदगी से परेशान मरीजों ने जब दास्तां सुनाई तो अफसरों के खिलाफ उनका गुस्सा भी उजागर हो गया। बोले-ऐसी सुविधा से अच्छा तो यही रहेगा कि अफसर अस्पताल ही बंद करा दें।
चिकित्साधीक्षक कक्ष के बार मरीजों की लाइन में खड़ी मिली बसोमा की प्रेमवती और जावित्री ने बताया कि दोनों ही दवा लेने के लिए पैदल चलकर अस्पताल पहुंची हैं। सुबह में भीड़ अधिक थी, सो नंबर नहीं आ पाया। भीड़ कम हुई तो डॉक्टर साहब ही बीमार पड़ गए। गंजशहीदा मोहल्ले की नाजरा ने सेहत महकमा की भूमिका पर ही सवाल उठा दिया। बोली, अफसरों के रहमोकरम पर डॉक्टर घर बैठे हैं।
मरीजों में शामिल बहादुरगंज मोहल्ले की कैलाशो उम्रदराज होने की वजह से परिसर में हांफती मिली। सांस फूलने लगी तो कुछ साफ कह नहीं पाई। अफसरी ने पीठ सहलाई तो राहत मिली। कैलाशो ने बताया कि शनिवार को आई तो भी उसे लाइन में खड़े रहना पड़ा था। जाते वक्त वह निजी क्लीनिक पर जाकर इलाज कराने की कहकर निकल गई।