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आखिर कौन है कल्लू यादव का सरपरस्त
बदायूं, ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jun 2016 12:15 AM IST
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बदायूं। ये महज संयोग है लेकिन रामवृक्ष यादव और कल्लू यादव की कहानी में कुछ समानताएं हैं। यह भी बात सामने आ रही है कि दोनों ने अपनी बिरादरी को अपने साथ जोड़ कर अपना आतंक बनाने की कोशिश की। कल्लू को यादव बहुल गांवों में ही संरक्षण मिलता था। यह बात कही जा रही है कि उसे खाकी और खादी पहने अपने बिरादरी के ही कुछ लोगों का संरक्षण प्राप्त था लेकिन किसका यह कोई नहीं बता रहा है। यह भी संयोग है कि इन दोनों की वजह से दो साहसी दरोगा एसओ संतोष यादव और सर्वेश यादव शहीद हो गए और दोनों की इसी जाति को थे।
कहने को तो इसे महज इत्तफाक भी कहा जा सकता है, लेकिन कहीं न कहीं खाकी और खादी के गठजोड़ से अपराधियों के पनपने की बात सामने आ रही है। मथुरा के जवाहर बाग कांड के पीछे खादी का कनेक्शन पहले ही सामने आ चुका है। जवाहर बाग में सत्याग्रह के नाम पर कब्जा जमाए रामवृक्ष यादव को पुलिस-प्रशासन का खौफ नहीं था। कारण, उसको सूबे की सरकार अपनी लगती थी। इसी के बल पर वह बेखौफ होकर पुलिस से भी भिड़ गया। उस वक्त एसओ संतोष यादव ने यादव कनेक्शन के चलते दिलेरी दिखाई थी, लेकिन वह भीड़ के मंसूबों को नहीं जान सके और अपनी जान गवां बैठे।
बुधवार को बिनावर में हाइवे पर बदमाश होने की सूचना पर एसआई सर्वेश यादव ने दिलेरी दिखाई, वह बगैर फोर्स लिए बदमाशों की तलाश में निकल गए। चेकिंग की, तो सफेद अपाचे पर तीन संदिग्ध लोग आते दिखे। वे जब रोकने पर नहीं रुके तो प्राइवेट गाड़ी पर अपने हमराह सिपाही प्रमोद को लेकर पीछे लगे गए। बाइक पर सवार शातिर कल्लू यादव भी बेखौफ था। उसने गोली चला दी। इस रियल मुठभेड़ में सर्वेश यादव शहीद हो गए और सिपाही घायल। हालांकि कल्लू भी घायल हो गया, लेकिन उसके दो साथी भागने में सफल हो गए थे। आईजी कहते भी हैं कि पुलिस बिना तैयारी के पहुंची। अति उत्साहित सर्वेश यादव अपराधियों के शिकार हो गए।
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ाजपा जिलाध्यक्ष हरीश शाक्य कहते हैं कि सपा सरकार में जाति और परिवारवाद सिर के चढ़ के बोलता है। अधिकतर थाने पर जाति विशेष के लोगों की तैनाती होती है। सपा सरकार आने पर अपराधी और अराजकतत्व बेलगाम हो जाते हैं। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव ओमकार सिंह कहते हैं कि सपा की सरकार में अधिकारी से लेकर चपरासी तक यादव को बनाए जाने को तरजीह दी जाती है। कानून नाम की चीज नहीं रहती। पुलिस पिटती है। हमलों में मारी जाती है। एक हत्यारोपी यादव को पीटने के कारण एसपी तक को सस्पेंड कर दिया जाता है। आखिर इसका अपराधियों में क्या संदेश जाएगा?
कहने को तो इसे महज इत्तफाक भी कहा जा सकता है, लेकिन कहीं न कहीं खाकी और खादी के गठजोड़ से अपराधियों के पनपने की बात सामने आ रही है। मथुरा के जवाहर बाग कांड के पीछे खादी का कनेक्शन पहले ही सामने आ चुका है। जवाहर बाग में सत्याग्रह के नाम पर कब्जा जमाए रामवृक्ष यादव को पुलिस-प्रशासन का खौफ नहीं था। कारण, उसको सूबे की सरकार अपनी लगती थी। इसी के बल पर वह बेखौफ होकर पुलिस से भी भिड़ गया। उस वक्त एसओ संतोष यादव ने यादव कनेक्शन के चलते दिलेरी दिखाई थी, लेकिन वह भीड़ के मंसूबों को नहीं जान सके और अपनी जान गवां बैठे।
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बुधवार को बिनावर में हाइवे पर बदमाश होने की सूचना पर एसआई सर्वेश यादव ने दिलेरी दिखाई, वह बगैर फोर्स लिए बदमाशों की तलाश में निकल गए। चेकिंग की, तो सफेद अपाचे पर तीन संदिग्ध लोग आते दिखे। वे जब रोकने पर नहीं रुके तो प्राइवेट गाड़ी पर अपने हमराह सिपाही प्रमोद को लेकर पीछे लगे गए। बाइक पर सवार शातिर कल्लू यादव भी बेखौफ था। उसने गोली चला दी। इस रियल मुठभेड़ में सर्वेश यादव शहीद हो गए और सिपाही घायल। हालांकि कल्लू भी घायल हो गया, लेकिन उसके दो साथी भागने में सफल हो गए थे। आईजी कहते भी हैं कि पुलिस बिना तैयारी के पहुंची। अति उत्साहित सर्वेश यादव अपराधियों के शिकार हो गए।
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ाजपा जिलाध्यक्ष हरीश शाक्य कहते हैं कि सपा सरकार में जाति और परिवारवाद सिर के चढ़ के बोलता है। अधिकतर थाने पर जाति विशेष के लोगों की तैनाती होती है। सपा सरकार आने पर अपराधी और अराजकतत्व बेलगाम हो जाते हैं। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव ओमकार सिंह कहते हैं कि सपा की सरकार में अधिकारी से लेकर चपरासी तक यादव को बनाए जाने को तरजीह दी जाती है। कानून नाम की चीज नहीं रहती। पुलिस पिटती है। हमलों में मारी जाती है। एक हत्यारोपी यादव को पीटने के कारण एसपी तक को सस्पेंड कर दिया जाता है। आखिर इसका अपराधियों में क्या संदेश जाएगा?