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गंगा में पानी बढ़ा, बाढ़ का खतरा
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बदायूं। गंगा एक बार फिर उफान की ओर है। बृहस्पतिवार को गंगा में नरौरा बैराज से 1,11,969 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे कछला में गंगा का मीटर गेज बढ़ गया है। कुछ स्थानों पर गंगा ने फैलाव लिया है। कटान होने के साथ तटवर्ती गांवों में बाढ़ का पानी घुसने का खतरा पैदा हो गया है। फिलहाल तटवर्ती इलाकों में हालात सामान्य बताए जा रहे हैं।
गंगा में जून के तीसरे सप्ताह में लगातार तीन दिन तक नरौरा से दो लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया था। इससे सहसवान, कछला, उसहैत, कादरचौक, जरीफनगर के करीब 20 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। कुछ स्थानों पर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों की शरण लेनी पड़ी थी। बाद में बारिश थमी तो गंगा में वाटर डिस्चार्ज कम हो गया। जुलाई की बात करें तो बृहस्पतिवार को पहली बार सबसे ज्यादा 1,11,969 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। इससे गंगा में उफान आ गया है। बृहस्पतिवार को कछला में गंगा का मीटर गेज 162.00 से बढ़कर 162.35 पर पहुंच गया है। सहसवान, जरीफनगर और उसहैत के तटवर्ती गांवों को एक बार फिर से खतरा पैदा होने लगा है। कई स्थानों पर गंगा ने एक बार फिर से काफी फैलाव के साथ कटान भी शुरू कर दिया है।
अब कम हो सकता है वाटर डिस्चार्ज
हालांकि, मैदानी इलाकों के साथ पहाड़ों पर लगातार बारिश हो रही है। इसके बाद भी अधिकारियों का कहना है कि बृहस्पतिवार को गंगा में जो पानी छोड़ा गया है वह शुक्रवार शाम तक उतर जाएगा। इसके बाद वाटर डिस्चार्ज कुछ कम होगा। दरअसल, बृहस्पतिवार को नरौरा से 84481 और हरिद्वार से 84699 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बाढ़ खंड के अधिकारियों का कहना हे कि जब हरिद्वार और बिजनौर से ज्यादा पानी छोड़ा जाता है जब ही नरौरा से ज्यादा वाटर डिस्चार्ज किया जाता है। ऐसे में बाढ़ का खतरा कम ही है। अगर गंगा में लगातार दो से तीन दिन तक दो लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी आता है तब बाढ़ का खतरा पैदा होता है।
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बृहस्पतिवार को गंगा में नरौरा से एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया है। बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं। कुछ स्थानों पर गंगा ने फैलाव जरूर लिया है। फिलहाल स्थिति सामान्य है। कहीं पर खास कटान भी नहीं हो रहा है। सभी तटबंधों और बांधों की निगरानी की जा रही है।
- जयंती प्रसाद, सहायक अभियंता बाढ़ खंड
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गंगा में जून के तीसरे सप्ताह में लगातार तीन दिन तक नरौरा से दो लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया था। इससे सहसवान, कछला, उसहैत, कादरचौक, जरीफनगर के करीब 20 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। कुछ स्थानों पर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों की शरण लेनी पड़ी थी। बाद में बारिश थमी तो गंगा में वाटर डिस्चार्ज कम हो गया। जुलाई की बात करें तो बृहस्पतिवार को पहली बार सबसे ज्यादा 1,11,969 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। इससे गंगा में उफान आ गया है। बृहस्पतिवार को कछला में गंगा का मीटर गेज 162.00 से बढ़कर 162.35 पर पहुंच गया है। सहसवान, जरीफनगर और उसहैत के तटवर्ती गांवों को एक बार फिर से खतरा पैदा होने लगा है। कई स्थानों पर गंगा ने एक बार फिर से काफी फैलाव के साथ कटान भी शुरू कर दिया है।
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अब कम हो सकता है वाटर डिस्चार्ज
हालांकि, मैदानी इलाकों के साथ पहाड़ों पर लगातार बारिश हो रही है। इसके बाद भी अधिकारियों का कहना है कि बृहस्पतिवार को गंगा में जो पानी छोड़ा गया है वह शुक्रवार शाम तक उतर जाएगा। इसके बाद वाटर डिस्चार्ज कुछ कम होगा। दरअसल, बृहस्पतिवार को नरौरा से 84481 और हरिद्वार से 84699 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बाढ़ खंड के अधिकारियों का कहना हे कि जब हरिद्वार और बिजनौर से ज्यादा पानी छोड़ा जाता है जब ही नरौरा से ज्यादा वाटर डिस्चार्ज किया जाता है। ऐसे में बाढ़ का खतरा कम ही है। अगर गंगा में लगातार दो से तीन दिन तक दो लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी आता है तब बाढ़ का खतरा पैदा होता है।
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बृहस्पतिवार को गंगा में नरौरा से एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया है। बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं। कुछ स्थानों पर गंगा ने फैलाव जरूर लिया है। फिलहाल स्थिति सामान्य है। कहीं पर खास कटान भी नहीं हो रहा है। सभी तटबंधों और बांधों की निगरानी की जा रही है।
- जयंती प्रसाद, सहायक अभियंता बाढ़ खंड