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शहरियों के काम नहीं आ रही सीवर मशीन
बदायूं, ब्यूरो
Updated Tue, 12 Apr 2016 11:50 PM IST
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सीवर टैंक साफ कराने के लिए परेशान हो रहे शहरी
खुले में शौच जाने से रोकने के लिए पीएम मोदी और सीएम अखिलेश यादव की ओर से योजनाएं संचालित हैं, जिससे अधिकांश लोग अपने घरों में शौचालय बनवाएं। शहर में तमाम लोगों ने अपने घरों में शौचालय तो बनवा लिए, लेकिन उनके टैंक भर जाने पर उसे खाली कराना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सीवर टैंक साफ कराने के लिए शहरियों को सफाई कर्मियों की मिन्नत करनी पड़ती है। इसके बदले में उनसे मोटी कमाई वसूल की जाती है।
नगर पालिका परिषद की ओर से लाखों रुपये खर्च करके सीवर टैंक सफाई करने की मशीन मंगवाई गई थी। सोच थी कि शहर के लोगों को सीवर सफाई के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। साथ ही उनका काम मुनासिब खर्च में हो जाएगा। इस मशीन से सीवर टैंक की सफाई करने के एवज में दो हजार रुपये की करीब फीस रखी गई थी, लेकिन इसका खास फायदा शहरियों को नहीं मिल सका। नाममात्र के लोगों ने सीवर मशीन से टैंकों की सफाई करा पाई। इसकी गवाही पालिका परिषद में रखा रजिस्टर भी देगा, जिसमें मशीन ले जाने वाले लोगों की इंट्री की जाती है।
पालिका कर्मियों के मुताबिक सीवर सफाई के लिए जिसे भी मशीन की जरूरत होती है, वह एक प्रार्थना पत्र के साथ फीस जमा करता है। उसके बाद मशीन सफाई करती है। सूत्रों के मुताबिक लंबे समय से तो सीवर मशीन ही खराब रही। ऐसे में जिन लोगों ने सीवर सफाई के लिए आवेदन किया, उन्हें मय प्रार्थना पत्र के बैरंग लौटा दिया।
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नगर पालिका परिषद की सीवर मशीन के पहिये खराब हो गए थे। उन्हें सही करा दिया गया है। किसी को सीवर टैंक साफ कराना हो तो वह पालिका परिषद में प्रार्थना पत्र देने के साथ उसकी फीस करीब दो हजार रुपये जमा करे। उसके बाद ही मशीन को भेजा जाता है।
ललतेश सक्सेना, ईओ, नगर पालिका परिषद
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खुले में शौच जाने से रोकने के लिए पीएम मोदी और सीएम अखिलेश यादव की ओर से योजनाएं संचालित हैं, जिससे अधिकांश लोग अपने घरों में शौचालय बनवाएं। शहर में तमाम लोगों ने अपने घरों में शौचालय तो बनवा लिए, लेकिन उनके टैंक भर जाने पर उसे खाली कराना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सीवर टैंक साफ कराने के लिए शहरियों को सफाई कर्मियों की मिन्नत करनी पड़ती है। इसके बदले में उनसे मोटी कमाई वसूल की जाती है।
नगर पालिका परिषद की ओर से लाखों रुपये खर्च करके सीवर टैंक सफाई करने की मशीन मंगवाई गई थी। सोच थी कि शहर के लोगों को सीवर सफाई के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। साथ ही उनका काम मुनासिब खर्च में हो जाएगा। इस मशीन से सीवर टैंक की सफाई करने के एवज में दो हजार रुपये की करीब फीस रखी गई थी, लेकिन इसका खास फायदा शहरियों को नहीं मिल सका। नाममात्र के लोगों ने सीवर मशीन से टैंकों की सफाई करा पाई। इसकी गवाही पालिका परिषद में रखा रजिस्टर भी देगा, जिसमें मशीन ले जाने वाले लोगों की इंट्री की जाती है।
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पालिका कर्मियों के मुताबिक सीवर सफाई के लिए जिसे भी मशीन की जरूरत होती है, वह एक प्रार्थना पत्र के साथ फीस जमा करता है। उसके बाद मशीन सफाई करती है। सूत्रों के मुताबिक लंबे समय से तो सीवर मशीन ही खराब रही। ऐसे में जिन लोगों ने सीवर सफाई के लिए आवेदन किया, उन्हें मय प्रार्थना पत्र के बैरंग लौटा दिया।
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नगर पालिका परिषद की सीवर मशीन के पहिये खराब हो गए थे। उन्हें सही करा दिया गया है। किसी को सीवर टैंक साफ कराना हो तो वह पालिका परिषद में प्रार्थना पत्र देने के साथ उसकी फीस करीब दो हजार रुपये जमा करे। उसके बाद ही मशीन को भेजा जाता है।
ललतेश सक्सेना, ईओ, नगर पालिका परिषद