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बदहाल स्कूलों को भी बना दिया केंद्र
बदायूं।
Updated Sat, 03 Jan 2015 06:55 PM IST
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यूपी बोर्ड 2015 की बोर्ड परीक्षा देने के लिए इस बार स्टूडेंट्स को बदहाल व्यवस्थाओं के बीच बैठकर परीक्षा देनी होगी। क्योंकि विभागीय अफसरों ने आंखें मूंदकर अव्यवस्थित स्कूलों को जो केंद्र बना दिया है। इसमें दूरदराज क्षेत्रों की बात तो दूर शहर के बीचोबीच भी फर्नीचर, दरवाजे, खिड़कियों दुरस्त नहीं हैं। ऐसे में परीक्षा की पारदर्शिता पर भी सवालिया निशान लगना लाजमी हैं। जानकारों की माने तो देहात में कई स्कूलों में फर्नीचर तक उपलब्ध नहीं है।
जिले में सरकारी विद्यालयों की हालत भी ठीक नहीं है। इसका कई बार पुष्टि खुद विभागीय अफसर भी कर चुके हैं। बावजूद व्यवस्था को सुधारवाने के इन्हें जिम्मेदारियों से लाद दिया जाता है। इतना ही नहीं स्टूडेंट्स इन केंद्रों पर ढंग से परीक्षा दे सकेंगे या नहीं इसका भी ध्यान नहीं रखा जाता है। जबकि बदहाल व्यवस्था में संचालित स्कूलों को हर हाल में सेंटर न बनाए जाने के सख्त निर्देश भी हैं। जानकार बताते हैं शहर की स्थिति के अलावा देहात के कुछ ऐसे स्कूलों को भी केंद्र बना दिया गया है। जहां बैठने के लिए कुर्सी-मेज कम हैं और छात्रों की संख्या अधिक है। ऐसे में परीक्षा कैसे दिलवाई जाएगी यह देखना बाकी है। बताते हैं कि कई बार इन स्कूलों की शिकायत तक अफसरों के पास आई हैं, बावजूद इसके हर साल इन्हें सेंटर सूची में शामिल कर लिया जाता है। बिसौली, दातागंज, सहसवान में सबसे ज्याद बद्तर हालत हैं। यहां के केंद्रों की सच्चाई खुद परीक्षा के दौरान चलने वाले सचल दल के सामने तक आ चुकी हैं। इसे बताया भी गया है। लेकिन फिर भी इन्हीं स्कूलों को दोबारा केंद्र बना दिया गया है। विभागीय लोग बताते हैं।
इधर, डीआईओएस वीना यादव का कहना है कि सभी केंद्रों में उचित फर्नीचर, पेयजल, शौचालय की व्यवस्था करने के लिए बोला जा चुका है। ऐसा कोई भी विद्यालय नहीं है जो बदहाल हो और उसे केंद्र बनाया गया हो। अगर कहीं व्यवस्था चौपट मिलती हैं तो संबंधित केंद्र के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में सरकारी विद्यालयों की हालत भी ठीक नहीं है। इसका कई बार पुष्टि खुद विभागीय अफसर भी कर चुके हैं। बावजूद व्यवस्था को सुधारवाने के इन्हें जिम्मेदारियों से लाद दिया जाता है। इतना ही नहीं स्टूडेंट्स इन केंद्रों पर ढंग से परीक्षा दे सकेंगे या नहीं इसका भी ध्यान नहीं रखा जाता है। जबकि बदहाल व्यवस्था में संचालित स्कूलों को हर हाल में सेंटर न बनाए जाने के सख्त निर्देश भी हैं। जानकार बताते हैं शहर की स्थिति के अलावा देहात के कुछ ऐसे स्कूलों को भी केंद्र बना दिया गया है। जहां बैठने के लिए कुर्सी-मेज कम हैं और छात्रों की संख्या अधिक है। ऐसे में परीक्षा कैसे दिलवाई जाएगी यह देखना बाकी है। बताते हैं कि कई बार इन स्कूलों की शिकायत तक अफसरों के पास आई हैं, बावजूद इसके हर साल इन्हें सेंटर सूची में शामिल कर लिया जाता है। बिसौली, दातागंज, सहसवान में सबसे ज्याद बद्तर हालत हैं। यहां के केंद्रों की सच्चाई खुद परीक्षा के दौरान चलने वाले सचल दल के सामने तक आ चुकी हैं। इसे बताया भी गया है। लेकिन फिर भी इन्हीं स्कूलों को दोबारा केंद्र बना दिया गया है। विभागीय लोग बताते हैं।
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इधर, डीआईओएस वीना यादव का कहना है कि सभी केंद्रों में उचित फर्नीचर, पेयजल, शौचालय की व्यवस्था करने के लिए बोला जा चुका है। ऐसा कोई भी विद्यालय नहीं है जो बदहाल हो और उसे केंद्र बनाया गया हो। अगर कहीं व्यवस्था चौपट मिलती हैं तो संबंधित केंद्र के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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