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84 करोड़ बकाया के बोझ तले दबीं जिले की 132 समितियां
बदायूं, ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jun 2016 11:38 PM IST
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सहकारी समितियों से दबंग किसान ही हासिल कर पाते हैं लाभ
वेतन नहीं मिल पाता, फिर भी काम करते हैं समितियों के सचिव
जिले में 132 साधन सहकारी समितियां धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोती जा रही हैं। अब तक 84 करोड़ रुपये का बकाया समितियों के सिर पर बोझ की तरह लदा हुआ है। इनकी कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं आया है। समितियों के सुधार के लिए ऋण माफी की प्रक्रिया भी अपनाई जा चुकी है। बावजूद इसके समितियां की स्थिति जस की तस बनी हुई है। या यूं मानिए कि समितियां भगवान भरोसे चल रही हैं। इनका उचित लाभ गरीब किसानों को नहीं मिल पाता। दबंग और बड़े किसान ही यहां से खाद-बीज और ऋण का लाभ उठा रहे हैं।
जिले में 132 समितियों में से करीब छह समितियां तो अराजकता की भेंट चढ़कर लगभग बंद ही हो चुकी हैं। चार समितियां ऐसी हैं जो विवादों से घिरी हुई हैं। इनकी जांच भी चल रही है। सहकारी समितियों के मकड़जाल में उलझकर किसान परेशान हो उठता है। उसकी सुनवाई भी नहीं होती। पिछले वर्ष उझानी क्षेत्र में ऋण का उगाही के बाद भी ऋण का काश्तकारों पर बकाया दिखा दिया गया था। डीएम के हस्तक्षेप से प्रकरण का निस्तारण हो सका था। ऐसे तमाम मामले हैं कि सचिव और कर्मचारी वसूली करते हैं और राजस्व में जमा नहीं करते। सचिवों के आलीशान मकान खड़े हैं और किसान कर्जदार बना बैठा है। यहां तक कि सचिवों को विभाग की कंगाली हालत के कारण सालों और महीनों वेतन तक का भुगतान नहीं होता। सचिवों के एडीशनल चार्ज लेने के लिए समितियों के कर्मचारियों में होड़ सी लगी रहती है।
राकेश गुप्ता बदायूं में समिति सचिव था
बदायूं। चार समितियां आर्थिक घोटालों के विवादों में फंसी हैं। इनमें लोहाठेर, जमालपुर, असरासी और प्रसिद्धपुर शामिल हैं। यहां बता दें कि मथुरा के जवाहर बाग कांड का आरोपी राकेश गुप्ता यहां प्रसिद्धपुर साधन सहकारी समिति का सचिव है। उसकी समिति पहले से ही विवादों में घिरी रहती थी। अब इसकी नये सिरे से घोटालों की जांच चल रही है। अभी इसकी रिपोर्ट आना बाकी है। सूत्रों की मानें तो इस समिति में लंबा घपला हुआ है।
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मेरे समय से पहले के कुछ घपले समितियों को विवादित बनाए हुए हैं। मेरा प्रयास है कि समितियों का संचालन ठीक प्रकार से हो। समितियों पर घपले न हो इसके लिए निरीक्षण भी जारी रखते हैं। अब वसूली में तेजी लाई जाएगी ताकि समितियों की सेहत सुधरे।
- अंबिका प्रसाद सिंह यादव, सहायक निबंधक (सहकारी समितियां)
वेतन नहीं मिल पाता, फिर भी काम करते हैं समितियों के सचिव
जिले में 132 साधन सहकारी समितियां धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोती जा रही हैं। अब तक 84 करोड़ रुपये का बकाया समितियों के सिर पर बोझ की तरह लदा हुआ है। इनकी कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं आया है। समितियों के सुधार के लिए ऋण माफी की प्रक्रिया भी अपनाई जा चुकी है। बावजूद इसके समितियां की स्थिति जस की तस बनी हुई है। या यूं मानिए कि समितियां भगवान भरोसे चल रही हैं। इनका उचित लाभ गरीब किसानों को नहीं मिल पाता। दबंग और बड़े किसान ही यहां से खाद-बीज और ऋण का लाभ उठा रहे हैं।
जिले में 132 समितियों में से करीब छह समितियां तो अराजकता की भेंट चढ़कर लगभग बंद ही हो चुकी हैं। चार समितियां ऐसी हैं जो विवादों से घिरी हुई हैं। इनकी जांच भी चल रही है। सहकारी समितियों के मकड़जाल में उलझकर किसान परेशान हो उठता है। उसकी सुनवाई भी नहीं होती। पिछले वर्ष उझानी क्षेत्र में ऋण का उगाही के बाद भी ऋण का काश्तकारों पर बकाया दिखा दिया गया था। डीएम के हस्तक्षेप से प्रकरण का निस्तारण हो सका था। ऐसे तमाम मामले हैं कि सचिव और कर्मचारी वसूली करते हैं और राजस्व में जमा नहीं करते। सचिवों के आलीशान मकान खड़े हैं और किसान कर्जदार बना बैठा है। यहां तक कि सचिवों को विभाग की कंगाली हालत के कारण सालों और महीनों वेतन तक का भुगतान नहीं होता। सचिवों के एडीशनल चार्ज लेने के लिए समितियों के कर्मचारियों में होड़ सी लगी रहती है।
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राकेश गुप्ता बदायूं में समिति सचिव था
बदायूं। चार समितियां आर्थिक घोटालों के विवादों में फंसी हैं। इनमें लोहाठेर, जमालपुर, असरासी और प्रसिद्धपुर शामिल हैं। यहां बता दें कि मथुरा के जवाहर बाग कांड का आरोपी राकेश गुप्ता यहां प्रसिद्धपुर साधन सहकारी समिति का सचिव है। उसकी समिति पहले से ही विवादों में घिरी रहती थी। अब इसकी नये सिरे से घोटालों की जांच चल रही है। अभी इसकी रिपोर्ट आना बाकी है। सूत्रों की मानें तो इस समिति में लंबा घपला हुआ है।
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मेरे समय से पहले के कुछ घपले समितियों को विवादित बनाए हुए हैं। मेरा प्रयास है कि समितियों का संचालन ठीक प्रकार से हो। समितियों पर घपले न हो इसके लिए निरीक्षण भी जारी रखते हैं। अब वसूली में तेजी लाई जाएगी ताकि समितियों की सेहत सुधरे।
- अंबिका प्रसाद सिंह यादव, सहायक निबंधक (सहकारी समितियां)