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कालीन कारोबारी चितिंत, लड़ाई में नाटो शामिल हुआ तो प्रभावित होगा कारोबार
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सहसवान में कालीन बुनती महिला कारीगर। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। यूक्रेन पर रूस के हमले से बदायूं के कालीन व जरी कारोबारियों की धड़कनें भी बढ़ी हैं। ठेकेदारों व वेंडरों को आशंका है कि नाटो के युद्ध में शामिल होने से उनके कारोबार को ज्यादा नुकसान हो सकता है। जल मार्ग का आवागमन प्रभावित होने व बंदरगाहों पर हमले की स्थिति में धंधे को नुकसान होगा। इस कारोबार से जुड़े लोगों से हमने बात की तो उन्होंने नुकसान की आशंका के बारे में बताया।
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दो देशों की लड़ाई का हमेशा कारोबार पर फर्क पड़ता है। इस बार तो लड़ाई और बड़ी होने का खतरा है। इसलिए युद्ध लंबा होने पर नुकसान भी उसी अनुपात में बढ़ सकता है। हालांकि अभी नुकसान के बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
- राशिद, कालीन वेंडर उझानी
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बदायूं से कई देशों को कालीन सप्लाई होता है। इसमें रूस भी शामिल है। जलमार्ग से देश के बड़े एक्सपोर्टर कालीन वहां भेजते हैं। ऐसे में अगर नाटो लड़ाई में शामिल हुआ और उसने रूस को हमले का केंद्र बनाया तो कालीन उद्योग पर भी बुरा असर पड़ेगा।
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- मनोज बाबा, कालीन ठेकेदार, सहसवान
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तृतीय विश्वयुद्ध की नौबत आई तो जल मार्ग का सीमित होना या दूरी बढ़ना तय है। बदायूं से कालीन कई देशों को जाती हैं। ऐसे में कारोबार पर असर पड़ना स्वाभाविक है। हालांकि हम लोगों का काम और जानकारी इस मामले में सीमित है। नुकसान कितना होगा या नहीं होगा, यह दिल्ली मुंबई के एक्सपोर्टर ही बता सकते हैं।
- सचिन सक्सेना, कालीन वेंडर, सहसवान
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रूस और यूक्रेन के युद्ध पर हम लोग भी मीडिया के जरिये जानकारी जुटा रहे हैं। हमारे यहां से जरी का काम जयपुर के एक्सपोर्टर के पास तक जाता है। फिलहाल किसी नुकसान की सूचना नहीं है, हो सकता है कि लड़ाई लंबी खिंचने पर असर आए। कोरोना काल में काम काफी प्रभावित हुआ है। अब नया नुकसान उठाने की स्थिति में नहीं है। - साकिब खान, जरी ठेकेदार
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दो देशों की लड़ाई का हमेशा कारोबार पर फर्क पड़ता है। इस बार तो लड़ाई और बड़ी होने का खतरा है। इसलिए युद्ध लंबा होने पर नुकसान भी उसी अनुपात में बढ़ सकता है। हालांकि अभी नुकसान के बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
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- राशिद, कालीन वेंडर उझानी
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बदायूं से कई देशों को कालीन सप्लाई होता है। इसमें रूस भी शामिल है। जलमार्ग से देश के बड़े एक्सपोर्टर कालीन वहां भेजते हैं। ऐसे में अगर नाटो लड़ाई में शामिल हुआ और उसने रूस को हमले का केंद्र बनाया तो कालीन उद्योग पर भी बुरा असर पड़ेगा।
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- मनोज बाबा, कालीन ठेकेदार, सहसवान
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तृतीय विश्वयुद्ध की नौबत आई तो जल मार्ग का सीमित होना या दूरी बढ़ना तय है। बदायूं से कालीन कई देशों को जाती हैं। ऐसे में कारोबार पर असर पड़ना स्वाभाविक है। हालांकि हम लोगों का काम और जानकारी इस मामले में सीमित है। नुकसान कितना होगा या नहीं होगा, यह दिल्ली मुंबई के एक्सपोर्टर ही बता सकते हैं।
- सचिन सक्सेना, कालीन वेंडर, सहसवान
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रूस और यूक्रेन के युद्ध पर हम लोग भी मीडिया के जरिये जानकारी जुटा रहे हैं। हमारे यहां से जरी का काम जयपुर के एक्सपोर्टर के पास तक जाता है। फिलहाल किसी नुकसान की सूचना नहीं है, हो सकता है कि लड़ाई लंबी खिंचने पर असर आए। कोरोना काल में काम काफी प्रभावित हुआ है। अब नया नुकसान उठाने की स्थिति में नहीं है। - साकिब खान, जरी ठेकेदार