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Budaun News: बदायूं में गोवंशों की मौत के मामले में दो पशु चिकित्साधिकारी निलंबित
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बदायूं। ब्लॉक म्याऊं के अभिगांव की गोशाला और सलारपुर ब्लॉक के ब्यौर की गोशाला गोवंशों की मौत होने के मामले में डीएम अवनीश की ओर से भेजी गई जांच आख्या पर शासन ने बड़ी कार्रवाई की है।
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने बृहस्पतिवार को म्याऊं के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ज्ञानवीर सिंह और सलारपुर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुमित कुमार साहू को निलंबित कर दिया। साथ ही म्याऊं के बीडीओ राकेश कुमार निराला और सालारपुर के बीडीओ नितिन कुमार के खिलाफ निलंबित व अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति करते हुए प्रमुख सचिव ग्राम विकास विभाग को चिट्ठी लिखी है।
अपर मुख्य सचिव ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी बदायूं (सीवीओ) डॉ. प्रेम सिंह के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कराई है। पशुपालन विभाग के बरेली मंडल के अपर निदेशक ग्रेड-2 डॉ. एमपी सिंह को भी दोषी मानते हुए 15 दिन के भीतर पशुपालन विभाग के निदेशक, प्रशासन एवं विकास को स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि लगातार बारिश के बाद 27 सितंबर को अभिगांव और ब्यौर की गोशालाओं में बड़ी संख्या में गोवंशों की मौत हो गई थी। मामला शासन तक पहुंचने के बाद डीएम अवनीश राय ने जांच कराई और तत्काल दोनों ग्राम पंचायतों के सचिवों को निलंबित करने के बाद दोनों चिकित्साधिकारियों को निलंबित करने और सीवीओ के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू कराने की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव को भेजी थी।
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ये गंभीर आरोप लगे हैं
सीवीओ डॉ. प्रेम सिंह को दानवीर जन कल्याण सेवा समिति का एमओयू निरस्त करने की स्पष्ट संस्तुति करने के बावजूद डीएम को संबंधित पत्रावली उपलब्ध नहीं कराने में लापरवाह माना है। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। गो आश्रय स्थलों और संरक्षित गोवंशों की देखभाल पर उच्च स्तर से बार-बार निर्देश देने के बावजूद अपेक्षित ध्यान नहीं दिया।
दोनों बीडीओ पर ये गंभीर आरोप
अपर मुख्य सचिव की ओर से दोनों बीडीओ के विरुद्ध निलंबन की गई संस्तुति रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों अधिकारियों को कई बार निर्देश दिए, लेकिन आवश्यक व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया। 27 सितंबर को अभिगांव गोशाला में 20 गोवंशों की मौत हुई। यहां क्षमता 100 गोवंशों की थी, जबकि 428 गोवंश संरक्षित थे। बारिश का रेड अलर्ट जारी होने के बावजूद अतिरिक्त या अस्थायी शेड तक की व्यवस्था नहीं कराई थी। इसी तरह ब्यौर गोशाला में भी क्षमता से अधिक गोवंश संरक्षित थे। 100 गोवंशों की क्षमता के सापेक्ष 223 गोवंश रखे गए थे। यहां पर 14 गोवंशों की मौत हुई थी।
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पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने बृहस्पतिवार को म्याऊं के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ज्ञानवीर सिंह और सलारपुर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुमित कुमार साहू को निलंबित कर दिया। साथ ही म्याऊं के बीडीओ राकेश कुमार निराला और सालारपुर के बीडीओ नितिन कुमार के खिलाफ निलंबित व अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति करते हुए प्रमुख सचिव ग्राम विकास विभाग को चिट्ठी लिखी है।
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अपर मुख्य सचिव ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी बदायूं (सीवीओ) डॉ. प्रेम सिंह के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कराई है। पशुपालन विभाग के बरेली मंडल के अपर निदेशक ग्रेड-2 डॉ. एमपी सिंह को भी दोषी मानते हुए 15 दिन के भीतर पशुपालन विभाग के निदेशक, प्रशासन एवं विकास को स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि लगातार बारिश के बाद 27 सितंबर को अभिगांव और ब्यौर की गोशालाओं में बड़ी संख्या में गोवंशों की मौत हो गई थी। मामला शासन तक पहुंचने के बाद डीएम अवनीश राय ने जांच कराई और तत्काल दोनों ग्राम पंचायतों के सचिवों को निलंबित करने के बाद दोनों चिकित्साधिकारियों को निलंबित करने और सीवीओ के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू कराने की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव को भेजी थी।
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ये गंभीर आरोप लगे हैं
सीवीओ डॉ. प्रेम सिंह को दानवीर जन कल्याण सेवा समिति का एमओयू निरस्त करने की स्पष्ट संस्तुति करने के बावजूद डीएम को संबंधित पत्रावली उपलब्ध नहीं कराने में लापरवाह माना है। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। गो आश्रय स्थलों और संरक्षित गोवंशों की देखभाल पर उच्च स्तर से बार-बार निर्देश देने के बावजूद अपेक्षित ध्यान नहीं दिया।
दोनों बीडीओ पर ये गंभीर आरोप
अपर मुख्य सचिव की ओर से दोनों बीडीओ के विरुद्ध निलंबन की गई संस्तुति रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों अधिकारियों को कई बार निर्देश दिए, लेकिन आवश्यक व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया। 27 सितंबर को अभिगांव गोशाला में 20 गोवंशों की मौत हुई। यहां क्षमता 100 गोवंशों की थी, जबकि 428 गोवंश संरक्षित थे। बारिश का रेड अलर्ट जारी होने के बावजूद अतिरिक्त या अस्थायी शेड तक की व्यवस्था नहीं कराई थी। इसी तरह ब्यौर गोशाला में भी क्षमता से अधिक गोवंश संरक्षित थे। 100 गोवंशों की क्षमता के सापेक्ष 223 गोवंश रखे गए थे। यहां पर 14 गोवंशों की मौत हुई थी।