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जलभराव से लोगों को आवागमन में दिक्कत

Mon, 02 Mar 2015 08:39 PM IST
badaun
badaun Updated Mon, 02 Mar 2015 08:39 PM IST
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Trouble logging in traffic people
शनिवार की रात से रुक-रुक शुरू हुई बारिश सोमवार को भी थमी नहीं। बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। पिछले दिनों 24 तक पहुंचा पारा लुढ़ककर 17 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। वहीं लगातार बारिश होने से नाले और नालियां उफना गए। निचले इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं। इस कारण लोगों को आवागमन में भी परेशानी का सामना करना पडा। सर्द हवाएं चलने से लोग जहां फिर गर्म कपड़ों में दुबके नजर आए वहीं गेहूं और सरसों की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा दातागंज में अफीम की फसल भी पूरी तरह चौपट हो गई है।
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जनजीवन प्रभावित
उझानी। बारिश से ने बिल्सी रोड बाजार सबसे अधिक प्रभावित हुई। पहले से खस्ताहाल सड़क पर गड्डों में भरे बरसाती पानी से आवागमन में लोगों को खासी परेशानी हुई। इसके अलावा गद्दीटोला से साहूकारा, बाजारकलां और नझियाई होकर नगला इलाके तक मुख्य नाला बरसाती पानी की वजह से उफान पर रहा। नाले का पानी बुर्रा रोड के खेतों में भरने से गेहूं और आलू की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। लिंक रोड मोड से स्टेशन रोड तक सड़क किनारे पानी भरा है। डॉ. पीके गोयल ने बताया कि जलभराव रविवार से दूसरे दिन भी बरकरार है।
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बेमौसम हुई बरसात से अफीम की खेती चौपट
दातागंज। बेमौसम बरसात और तेज हवा से अफीम की फसल पूरी तरह से चौपट हो गई है। अकाई को तैयार अफीम की फसल खेतों में बिछ गई है। काश्तकारों ने जिला अफीम अधिकारी को फसल नष्ट होने की सूचना दी है।
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क्षेत्र में सेरहा और बछलिया दो गांवों में अफीम की पैदावार को लाइसेंस जारी किए गए हैं। 135 दिनों में तैयार होने वाली फसल में अफीम निकलने को तैयार थी। सेरहा के अफीम नंबरदार अनीस खां ने बताया कि होली के बाद बोड़ा अफीम के फल में चीरा लगाकर अकाई शुरू करने वाले थे, लेकिन पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश और तेज हवा से अफीम की फसल खेतों में बिछ गई है। 30-40 प्रतिशत पौधे तो जड़ से ही अकड़ गए हैं। नंबरदार के मुताबिक अफीम के पौधे की जड़ वैसे ही कमजोर होती और बोड़ा आने के बाद पौधे का ऊपरी भाग वजनदार हो जाता है इसलिए हवा चलने पर जड़ पौधे का भार सहन नहीं कर पाती है। एक-एक काश्तकार को 15 से 20 ऐरी की काश्त करने का अफीम विभाग से लाइसेंस जारी हुआ है। बछलिया गांव में कुल आठ काश्तकारों ने एक सौ बीस ऐरी और सेरहा में 14 काश्तकारोें ने ढाई सौ ऐरी अफीम की काश्त की है। अफीम की फसल तैयार करने में 25 से 30 हजार रुपये प्रति काश्तकार को लागत लगानी पड़ती है।

किसान लिखित शिकायत करते हैं तो विभागीय अधिकारी अपने सामने अफीम की फसल उजड़वा देंगे। लगातार दो सीजन फसल उजाड़ी जाती है तो संबंधित काश्तकार को अफीम की पैदावार का लाइसेंस समाप्त हो जाएगा। विभाग अपनी शर्तों पर ही लाइसेंस देता है।

-मोहम्मद इस्लाम, अफीम अधिकारी

पिछले साल भी इन्हीं परिस्थितियों में अफीम की फसल चौपट हुई थी। विभागीय अधिकारियों ने अपने सामने फसल उजड़वाई थी। इस बार भी वहीं स्थिति है। काश्तकारों के लिए लाइसेंस बचाना मुश्किल होगा। अब बाराबंकी मुख्यालय बना दिया है। काश्तकार वहीं शिकायत दर्ज कराएंगे।
- अनीस खां, अफीम नंबरदार।
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