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Budaun News: 40 सेकंड में कर दिया जा रहा इलाज, गुणवत्ता पर सवाल
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बदायूं। आरोग्य मंदिरों में तैनात सीएचओ ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से मरीजों का उपचार कर रहे हैं। वह इस काम में महज 40 सेकंड ही लग रहे हैं। ऐसे में गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते हैं। इसको लेकर शासन की ओर से रिपोर्ट जारी की गई है।
आयुष्मान भारत योजना के तहत गांवाें और शहरी क्षेत्र में आरोग्य मंदिरों को खोले गए हैं। यहां पर सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) की तैनाती है। वह मरीजों का ई-संजीवनी पोर्टल पर पंजीकरण करते हैं। उसके बाद डॉक्टर से ऑनलाइन वार्ता कराते हैं। मरीज से बात करने के बाद डॉक्टर पोर्टल पर ही दवा लिख देते हैं। उसे देखकर सीएचओ दवा उपलब्ध करा देते हैं।
मानक के अनुसार इस काम में पांच मिनट तक लगना चाहिए, लेकिन इसमें महज 40 सेकंड से लेकर दो मिनट में इलाज मिल जा रहा है। इतने कम समय में इलाज उपलब्ध होने से गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते हैं। पिछले दिनों गुणवत्ता सुधारने के लिए पत्राचार किया गया था, लेकिन इसका अभी तक कोई असर नहीं दिख रहा है।
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28वें स्थान पर है जिला
ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से उपचार करने के मामले में जिले की स्थिति ठीक नहीं है। 21 जून को प्रदेश से जारी हुई रिपोर्ट में जिला 28वें स्थान पर है। इसको लेकर सीएमओ ने स्वास्थ्यकर्मियों को सुधार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि रैंकिंग में सुधार हो सके।
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निष्क्रिय रहें 77 सीएचओ
ई-संजीवनी पोर्टल पर जिले के 260 सीएचओ पंजीकृत हैं। इसमें से 21 जुलाई को 183 सीएचओ ही एक्टिव रहे हैं। बाकी 77 सीएचओ ने ओपीडी नहीं की। इसी तरह पोर्टल पर पंजीकृत 77 डाॅक्टर में से 33 डॉक्टर ने ही ओपीडी की।
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केस एक
- आरोग्य मंदिर सकरी जुंगले में कार्यरत सीएचओ ने 21 जून को ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से डॉक्टर और मरीज की महज 40 सेकेंड में वार्ता करा दी।
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केस दो
आरोग्य मंदिर बेहरा पाठक में 21 जून को पहुंचे एक मरीज का सीएचओ ने ई-संजीवनी पोर्टल पर पंजीकरण किया। इसके बाद 44 सेकेंड में वार्ता के बाद मरीज को दवा उपलब्ध करा दी।
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ई-संजीवनी पोर्टल पर उपचार कराने के लिए सीएचओ को गुणवत्ता ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। फिर भी ऐसा हो रहा है तो संबंधित से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
-डॉ.रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ
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आयुष्मान भारत योजना के तहत गांवाें और शहरी क्षेत्र में आरोग्य मंदिरों को खोले गए हैं। यहां पर सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) की तैनाती है। वह मरीजों का ई-संजीवनी पोर्टल पर पंजीकरण करते हैं। उसके बाद डॉक्टर से ऑनलाइन वार्ता कराते हैं। मरीज से बात करने के बाद डॉक्टर पोर्टल पर ही दवा लिख देते हैं। उसे देखकर सीएचओ दवा उपलब्ध करा देते हैं।
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मानक के अनुसार इस काम में पांच मिनट तक लगना चाहिए, लेकिन इसमें महज 40 सेकंड से लेकर दो मिनट में इलाज मिल जा रहा है। इतने कम समय में इलाज उपलब्ध होने से गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते हैं। पिछले दिनों गुणवत्ता सुधारने के लिए पत्राचार किया गया था, लेकिन इसका अभी तक कोई असर नहीं दिख रहा है।
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28वें स्थान पर है जिला
ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से उपचार करने के मामले में जिले की स्थिति ठीक नहीं है। 21 जून को प्रदेश से जारी हुई रिपोर्ट में जिला 28वें स्थान पर है। इसको लेकर सीएमओ ने स्वास्थ्यकर्मियों को सुधार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि रैंकिंग में सुधार हो सके।
निष्क्रिय रहें 77 सीएचओ
ई-संजीवनी पोर्टल पर जिले के 260 सीएचओ पंजीकृत हैं। इसमें से 21 जुलाई को 183 सीएचओ ही एक्टिव रहे हैं। बाकी 77 सीएचओ ने ओपीडी नहीं की। इसी तरह पोर्टल पर पंजीकृत 77 डाॅक्टर में से 33 डॉक्टर ने ही ओपीडी की।
केस एक
- आरोग्य मंदिर सकरी जुंगले में कार्यरत सीएचओ ने 21 जून को ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से डॉक्टर और मरीज की महज 40 सेकेंड में वार्ता करा दी।
केस दो
आरोग्य मंदिर बेहरा पाठक में 21 जून को पहुंचे एक मरीज का सीएचओ ने ई-संजीवनी पोर्टल पर पंजीकरण किया। इसके बाद 44 सेकेंड में वार्ता के बाद मरीज को दवा उपलब्ध करा दी।
ई-संजीवनी पोर्टल पर उपचार कराने के लिए सीएचओ को गुणवत्ता ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। फिर भी ऐसा हो रहा है तो संबंधित से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
-डॉ.रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ