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Budaun News: टमाटर ने छुआ महंगाई का शतक, रसोई का बिगड़ा जायका
Sun, 14 Jul 2024 05:00 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Sun, 14 Jul 2024 05:00 AM IST
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बदायूं/वज़ीरगंज। बारिश और बाढ़ के चलते सब्जी की फसल बर्बाद हुई है। खपत अधिक होने और पैदावार कम होने से दाम आसमान छू रहे हैं। टमाटर ने महंगाई का शतक लगाया है। वहीं, भिंडी और तोरई भी दोगुने दाम पर पहुंच गईं हैं।
बदायूं की आवास विकास कॉलोनी के पीके शर्मा कहते हैं कि हरी सब्जी कम खरीद रहे हैं। आलू की मात्रा ज्यादा कर दी है। खीरा जो 10-20 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर था, अब 50-60 रुपये प्रति किलोग्राम है। वजीरगंज के पोशाकी लाल कहते हैं कि टमाटर कम खरीद रहे हैं, लेकिन हरी सब्जी के बिना काम नहीं चलता। घर के दूसरे खर्चों में कटौती करके काम चला रहे हैं। सब्जी विक्रेता अनूप कुमार ने कहा कि पहले संभल का टमाटर बड़ी मात्रा में बदायूं मंडी तक आता था, लेकिन जब से बारिश आई है, इससे आवक घट गई। संभल और बदायूं में बारिश और बाढ़ के पानी में सब्जियों की पैदावार मारी गई। इसलिए महंगाई छाई है।
महंगाई ने पहले से ही लोगों की कमर तोड़ दी है, अब सब्जियों के बढ़े दामों से तो रसोई का बजट ही गड़बड़ा गया है। मृदुला वार्ष्णेय
महंगाई का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग पर है। महिलाएं किसी तरह सामंजस्य बनाकर अपने बजट में रसोई का संचालन करती हैं, मगर अचानक सब्जियों पर आई महंगाई ने रसोई का जायका ही बिगाड़ दिया है। वंदना वार्ष्णेय
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बारिश से पहले - बारिश के बाद
पालक 30-40 60- 70
टमाटर 30-40 80-100
आलू 15- 20 25- 30
तरोई 10-20 50- 60
भिंडी 20-30 60-70
शिमला मिर्च 40-60 80-100
प्याज 30-40- 40-50
लौकी 20-25 60-70
अरबी 20- 30 50- 60
खीरा 10-20 50-60
(दाम प्रति किलोग्राम की दर से हैं)
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बदायूं की आवास विकास कॉलोनी के पीके शर्मा कहते हैं कि हरी सब्जी कम खरीद रहे हैं। आलू की मात्रा ज्यादा कर दी है। खीरा जो 10-20 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर था, अब 50-60 रुपये प्रति किलोग्राम है। वजीरगंज के पोशाकी लाल कहते हैं कि टमाटर कम खरीद रहे हैं, लेकिन हरी सब्जी के बिना काम नहीं चलता। घर के दूसरे खर्चों में कटौती करके काम चला रहे हैं। सब्जी विक्रेता अनूप कुमार ने कहा कि पहले संभल का टमाटर बड़ी मात्रा में बदायूं मंडी तक आता था, लेकिन जब से बारिश आई है, इससे आवक घट गई। संभल और बदायूं में बारिश और बाढ़ के पानी में सब्जियों की पैदावार मारी गई। इसलिए महंगाई छाई है।
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महंगाई ने पहले से ही लोगों की कमर तोड़ दी है, अब सब्जियों के बढ़े दामों से तो रसोई का बजट ही गड़बड़ा गया है। मृदुला वार्ष्णेय
महंगाई का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग पर है। महिलाएं किसी तरह सामंजस्य बनाकर अपने बजट में रसोई का संचालन करती हैं, मगर अचानक सब्जियों पर आई महंगाई ने रसोई का जायका ही बिगाड़ दिया है। वंदना वार्ष्णेय
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बारिश से पहले - बारिश के बाद
पालक 30-40 60- 70
टमाटर 30-40 80-100
आलू 15- 20 25- 30
तरोई 10-20 50- 60
भिंडी 20-30 60-70
शिमला मिर्च 40-60 80-100
प्याज 30-40- 40-50
लौकी 20-25 60-70
अरबी 20- 30 50- 60
खीरा 10-20 50-60
(दाम प्रति किलोग्राम की दर से हैं)