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Budaun News: अब अंगूठा नहीं रोकेगा बैनामा, चेहरे से होगी पहचान

Mon, 13 Apr 2026 01:07 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 13 Apr 2026 01:07 AM IST
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Thumbprints Will No Longer Hold Up Property Deeds; Identification Will Be Based on Facial Recognition.
उप निबंधक कार्यालय
बदायूं। जिले के रजिस्ट्री कार्यालय में अब बैनामा कराने की प्रक्रिया और आसान हो गई है। एक अप्रैल से लागू नई व्यवस्था के तहत अब अंगूठे की छाप अनिवार्य नहीं रह गई है। यदि किसी व्यक्ति के अंगूठे के निशान मशीन पर स्पष्ट नहीं आते हैं, तो उसकी पहचान चेहरे के माध्यम से की जाएगी। इस नई सुविधा से खासतौर पर बुजुर्गों और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को राहत मिली है।
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जिले के रजिस्ट्री कार्यालय में प्रतिदिन औसतन 150 से 180 लोग बैनामा कराने के लिए पहुंचते हैं। इनमें करीब 25 से 30 प्रतिशत ऐसे लोग होते हैं, जिनके अंगूठे के निशान स्पष्ट नहीं आ पाते थे। इस वजह से उन्हें कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता था। बार-बार प्रयास करने के बाद भी काम पूरा नहीं हो पाता था।
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कई मामलों में लोगों को अगले दिन फिर से आना पड़ता था। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए शासन ने फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरे की पहचान) की नई तकनीक लागू की है। इस प्रणाली में व्यक्ति के चेहरे को स्कैन कर उसकी पहचान की जाती है और उसी के आधार पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है।
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अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीक पूरी तरह सुरक्षित और आधुनिक है। इससे किसी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका बेहद कम हो जाती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री प्रक्रिया में तेजी आई है। पहले जहां एक बैनामा पूरा होने में 20 से 25 मिनट तक लग जाते थे। वहीं अब यह समय घटकर 10 से 15 मिनट रह गया है। इससे कार्यालय में भीड़ का दबाव भी कम होने लगा है। (संवाद)




नई व्यवस्था बुजुर्गों के लिए वरदान

नई व्यवस्था बुजुर्गों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। पहले 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को अंगूठे के निशान दर्ज कराने में सबसे ज्यादा परेशानी होती थी। कई बार त्वचा के घिस जाने या सूखापन होने के कारण मशीन निशान नहीं पढ़ पाती थी। कई बार लोगों के हाथों में चोट लग जाने के कारण भी दिक्कत आती थी। लेकिन अब फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए उनकी पहचान आसानी से हो रही है। इससे उन्हें बार-बार लाइन में लगने और परेशान होने से राहत मिली है।




प्रक्रिया हुई तेज और पारदर्शी

फेस ऑथेंटिकेशन लागू होने से रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ी हैं। पहले जहां एक दिन में लगभग 150 से 180 बैनामे ही हो पाते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़ने लगी है। इसमें तकनीक के इस्तेमाल से मानव त्रुटि की आशंका भी कम हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, इससे फर्जीवाड़े पर भी अंकुश लगेगा और पूरी प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनेगी।





फेस ऑथेंटिकेशन से न केवल प्रक्रिया सरल हुई है, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ी है। अब पहचान से जुड़ी समस्याएं काफी हद तक खत्म हो गई हैं। आने वाले समय में इस व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त मशीनें भी लगाने की योजना है, ताकि लोगों को और अधिक सुविधा मिल सके। -सैय्यद नदीम रजा, सब रजिस्ट्रार उप निबंधक कार्यालय प्रथम
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