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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   The woman returned to the village after 34 years, the land was encroached upon, the son said - dead mother

Budaun News: 34 वर्ष बाद गांव लौटी महिला... जमीन पर हो गया कब्जा, बेटा बोला- मर चुकी मां

Sat, 08 Jul 2023 01:08 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jul 2023 01:08 AM IST
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The woman returned to the village after 34 years, the land was encroached upon, the son said - dead mother
रामवेटी। फाइल फोटो
-पीड़िता ने जमीन कब्जा मुक्त कराने के लिए डीएम से लगाई गुहार
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-शहर के नजदीक पड़उआ गांव का मामला, पति और बेटों ने अलग अलग लोगों को कर दिया बैनामा
संवाद न्यूज एजेंसी

बदायूं। 34 वर्ष पहले लापता हुई महिला अपने गांव लौटी तो उसे पता चला कि कुछ लोगों ने उसकी जमीन पर कब्जा कर लिया है। काबिज लोगों का कहना है कि जमीन महिला के पति और बेटों ने ही उनके नाम की है। उधर, महिला जिस शख्स को अपना पति बता रही है, उसका बेटा उसे मां मानने को तैयार नहीं हैं। उसका कहना है कि मां की मौत हो चुकी है। इस महिला का नाम-पता व पति का नाम अलग है। वह जमीन के लालच में उसकी मां बनने की कोशिश कर रही है।
मामला सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के गांव पड़उआ का है। यहां की निवासी बताते हुए महिला ने तीन दिन पहले डीएम को शिकायती पत्र दिया।
महिला ने अपना नाम रामबेटी बताया है। रामबेटी के अनुसार, 34 साल पहले परिवार वालों ने उसे पीटकर घर से निकाल दिया था।

तब से वह चंडीगढ़ में रहकर मेहनत-मजदूरी कर रही है। इस बीच पति वेदराम और पिता डल्ली का निधन हो गया। बेटों का नाम सिपट्टर और

भूरे है। गांव में उसकी करीब छह बीघा जमीन थी, जिसमें 13 बिस्वा जमीन का बैनामा वर्ष 1991 में नत्थूलाल के नाम कर दिया था। शेष

जमीन की मालकिन वह आज भी है। मगर अब उस पर गांव के रामेश्वर दयाल, दीनदयाल और डालचंद ने कब्जा कर लिया है।


इस संबंध में सिपट्टर ने बताया कि रामबेटी उसकी मां का नाम जरूर है। मगर उनकी वर्ष 1989 में मौत हो चुकी है। कुछ दिन पहले गांव के नत्थूलाल महिला को उसके घर लेकर आए।कहा कि यह तुम्हारी मां हैं। उसने कुछ दिन महिला को अपने घर में रखा था। जब आधार कार्ड मांगा तो उसमें महिला का नाम सरला पत्नी राकेश और पता चंडीगढ़ का दर्ज है। इसके बाद उसने महिला को घर से निकाल दिया। महिला उसकी मां नहीं है। वह आज भी नत्थूलाल के घर में रह रही है।
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रामेश्वर बोले- हर जगह जीते

ग्राम पडौआ निवासी रामेश्वर दयाल ने बताया कि वर्ष 1989 में रामबेटी लापता हो गई थी। परिवार वालों ने उसे मृत मान लिया था। रामबेटी के नाम जमीन उसकी मां पुनो की मौत के बाद आई थी। रामबेटी लापता हो गईं तो उसके पति वेदराम जमीन के सरंक्षक बन गए। कई वर्षों तक रामबेटी का पता नहीं चला तो वेदराम ने जमीन अपने नाम करा ली। उन्होंने अपनी जरूरत के अनुसार हमें और उझानी निवासी लोगों को जमीन बेच दी। नत्थूलाल ने इसके विरोध में दीवानी में मुकदमा डाला था। तहसील में भी मुकदमा चला। वह दोनों जगह जीत गए। नत्थूलाल ने अब फिर से मुकदमा के खिलाफ अपील की है।
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रामबेटी ने कर ली थी दूसरी शादी

नत्थूलाल के बेटे गुड्डू ने बताया कि रामबेटी आज भी जीवित हैं। वह अपने घर से चली गई थीं। उन्होंने वजीरगंज के राकेश से दूसरी शादी कर ली थी। रामबेटी ने ही उसके पिता को खेत बेचे थे। उसी खेत का बैनामा रामेश्वर दयाल आदि ने वेदराम से कराया था, जबकि वह जमीन रामबेटी की थी।
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महिला ने जो शिकायती पत्र दिया है। उसकी जांच कराई जाएगी। उसमें जो भी सच्चाई होगी। उसके अनुसार कार्रवाई कराई जाएगी।



- मनोज कुमार, डीएम
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