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Budaun News: पानी घटा, शाहजहांपुर को जाने वाले दो मार्ग पर यातायात शुरू
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दातागंज। गंगा और रामगंगा में जलस्तर कम होने पर लोगों ने राहत की सांस ली है। शाहजहांपुर को जाने वाले मार्ग पर दो और चार पहिया वाहनों का आवागमन शुरू हो गया है। इसके साथ ही खेतों से भी पानी कम हुआ है।
जिले में नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है। रामगंगा के जलस्तर में तेजी से गिरावट आई है। 18 सितंबर को रामगंगा का जलस्तर 161.120 मीटर था, जो 21 सितंबर को घटकर 160.110 मीटर पर पहुंच गया। दातागंज के बेलाडांडी, तिलहर होते हुए शाहजहांपुर को जाने वाले मार्ग पर भी पानी कम हो गया है। दो पाहिया और चार पहिया वाहनों का आवागमन शुरू हो गया हैं। यही हाल हजरतपुर से हर्रामपुर होते हुए लालपुर खादर को जाने वाले मार्ग का है। हालांकि प्रशासन ने अभी बड़े वाहनाें के आवागमन पर रोक लगा रखी है।
बाढ़ का प्रभाव तो कम हुआ है, लेकिन जिन गांवों में पानी पहुंच चुका था, उनकी दुश्वारियां कम नहीं हुईं हैं। वहां पर पानी कम होने के बाद कीचड़ फैली हुई है। इसकी वजह से ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है।
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फसलें बाढ़ में बहीं, चारे का संकट बरकरार
रामगंगा में आई बाढ़ की वजह से खेतों, सड़कों और गांवों तक में पानी भर गया था। रामगंगा का पानी कम होने की वजह से खेतों में जमीन दिखाई देने लगी है, लेकिन खेतों में उगी घास पर मिट्टी छा गई है। वहीं जो चरी और बाजरा की बुवाई की गई थी उसकी फसल छोटी थी, जो बाढ़ के पानी में बह चुकी है। ऐसे में पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है। क्योंकि उनके पास बेहद कम मात्रा में ही भूसा एकत्र है।
जल्द शुरू होगा सर्वे का काम
बाढ़ कम होने से प्रशासन ने नुकसान को लेकर सर्वे कराने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। ताकि समय रहते सर्वे का काम पूरा किया जा सके। जिन किसानों को मुआवजा दिया जाना है। उनको समय से उसका भुगतान कराया जा सके।
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जिले में नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है। रामगंगा के जलस्तर में तेजी से गिरावट आई है। 18 सितंबर को रामगंगा का जलस्तर 161.120 मीटर था, जो 21 सितंबर को घटकर 160.110 मीटर पर पहुंच गया। दातागंज के बेलाडांडी, तिलहर होते हुए शाहजहांपुर को जाने वाले मार्ग पर भी पानी कम हो गया है। दो पाहिया और चार पहिया वाहनों का आवागमन शुरू हो गया हैं। यही हाल हजरतपुर से हर्रामपुर होते हुए लालपुर खादर को जाने वाले मार्ग का है। हालांकि प्रशासन ने अभी बड़े वाहनाें के आवागमन पर रोक लगा रखी है।
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बाढ़ का प्रभाव तो कम हुआ है, लेकिन जिन गांवों में पानी पहुंच चुका था, उनकी दुश्वारियां कम नहीं हुईं हैं। वहां पर पानी कम होने के बाद कीचड़ फैली हुई है। इसकी वजह से ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है।
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फसलें बाढ़ में बहीं, चारे का संकट बरकरार
रामगंगा में आई बाढ़ की वजह से खेतों, सड़कों और गांवों तक में पानी भर गया था। रामगंगा का पानी कम होने की वजह से खेतों में जमीन दिखाई देने लगी है, लेकिन खेतों में उगी घास पर मिट्टी छा गई है। वहीं जो चरी और बाजरा की बुवाई की गई थी उसकी फसल छोटी थी, जो बाढ़ के पानी में बह चुकी है। ऐसे में पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है। क्योंकि उनके पास बेहद कम मात्रा में ही भूसा एकत्र है।
जल्द शुरू होगा सर्वे का काम
बाढ़ कम होने से प्रशासन ने नुकसान को लेकर सर्वे कराने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। ताकि समय रहते सर्वे का काम पूरा किया जा सके। जिन किसानों को मुआवजा दिया जाना है। उनको समय से उसका भुगतान कराया जा सके।