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तंत्र बदहालः पहले सीएचसी का इलाज हो फिर मरीजों का

Sun, 06 Nov 2022 12:41 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 06 Nov 2022 12:41 AM IST
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The system is in bad shape: first the CHC should be treated then the patients
उझानी अस्पताल में बच्चे को देखतीं डेंटिस्ट अवनी सिंह। संवाद - फोटो : BADAUN
उझानी (बदायूं)। बुखार, मलेरिया और डेंगू का प्रकोप है। लेकिन उझानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लाचार है। भुगतान न होने के कारण डिजिटल एक्सरे और अन्य जांच की सुविधा मुहैया कराने वाली कंपनी ने अपने संसाधन समेट लिए हैं। सुविधाओं के अभाव में यहां आने वाले मरीजों को जिला अस्पताल या मेडिकल जाना पड़ता है। विशेषज्ञ डॉक्टर भी नहीं हैं।
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प्रथम संदर्भन इकाई (एफआरयू) की सुविधा वाले हर अस्पताल में प्रत्येक बीमारी के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर, जांच के लिए अत्याधुनिक मशीनें और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। यहां जनरल सर्जन और एमबीबीएस डॉक्टरों के अलावा महिला, हड्डी और बालरोग विशेषज्ञ की कमी काफी समय से खल रही है। तीन दिन पहले अस्पताल में नए मरीजों के पंजीकरण की संख्या 500 के पार हो चुकी है। शनिवार को भी लगभग 300 मरीज यहां पहुंचे। दंतरोग विशेषज्ञ अवनी सिंह बच्चों और महिला मरीजों को दवा देती मिलीं।
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करीब चार साल पहले शासकीय अनुबंध पर एक कंपनी की ओर से ब्लड सैंपल लेकर जांच कराने और डिजिटल एक्सरे आदि की सुविधा शुरू कराई थी, लेकिन कंपनी को भुगतान नहीं मिला तो पहले ब्लड जांच, फिर एक्सरे मशीनें वापस मंगा लीं। अब यहां मलेरिया और डेंगू के अलावा टीबी और एचआईवी की जांच ही हो पा रही है।
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बोले तीमारदार, रेफर किए जा रहे मरीज
सर्दी-बुखार से पीड़ित ढाई साल की नित्या को लेकर सीएचसी पहुंची गंजशहीदा मोहल्ला की उसकी मां रिंकी ने बताया कि तीन दिन से बुखार कम नहीं हो रहा है। अब, उसे मेडिकल कॉलेज में बच्ची का इलाज कराने की सलाह दी गई है। वहीं, एक साल की लाड़ो को लेकर आए अयोध्यागंज मोहल्ले के अमन का कहना है कि बाल रोग विशेषज्ञ होता तो ज्यादा फायदा मिलता। दो दिन पहले देवरमई की रामकली का हाथ टूट गया तो उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल जाना पड़ा। अढौली निवासी सूरजपाल ने बताया कि गले में दर्द होने पर वह अस्पताल आया, लेकिन उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
सेवा शाहजहांपुर में, वेतन यहां से
नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेमशंकर मौर्य चार साल पहले तक यहां तैनात थे। अभिलेखों में उनकी मूल तैनाती अभी भी यहीं है, लेकिन वह अटैचमेंट पर शाहजहांपुर जिला अस्पताल में सेवा दे रहे हैं। हर महीना उनकी उपस्थिति पत्रावली उझानी आती है और वेतन यहीं से अवमुक्त करा दिया जाता है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती और गंभीर बीमारियों की जांच के लिए विभागीय स्तर पर पत्राचार शुरू किया जा चुका है। रही बात अटैचमेंट की तो इन दिनों प्रेमशंकर मौर्य के अलावा कोई और चिकित्सक बाहर कार्यरत नहीं है। अफसरों को हकीकत का पता है। -डॉ. राजकुमार गंगवार, चिकित्साधीक्षक
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