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Budaun News: प्रदेश भर में पहुंचेगी बदायूं के पेड़े की मिठास

Tue, 05 May 2026 01:10 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 05 May 2026 01:10 AM IST
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The sweetness of Badaun's Pedas will reach across the entire state.The sweetness of Badaun's Pedas will reach across the entire state.
शहर की एक दुकान पर रखे पेड़े। संवाद
बदायूं। जिले की पहचान बन चुके मावा के पेड़े को अब प्रदेश स्तर पर नई पहचान मिलने जा रही है। प्रदेश सरकार की बहुप्रतीक्षित ‘एक जिला एक व्यंजन’ योजना में बदायूं के मशहूर पेड़े को शामिल कर लिया गया है। सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही जिले के मिठाई कारोबारियों और कारीगरों में उत्साह की लहर दौड़ गई है।
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सरकार की इस पहल के तहत अब बदायूं के पेड़े की मिठास प्रदेश के हर कोने तक पहुंचेगी। योजना में शामिल होने के बाद स्थानीय स्तर पर पेड़ा बनाने वाले कारीगरों, हलवाइयों और वेंडर्स का पंजीकरण कराया जाएगा। उन्हें एमएसएमई सेक्टर से जोड़ा जाएगा। इससे न केवल पारंपरिक व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों को स्वरोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
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पैकेजिंग, ब्रांडिंग और ऑनलाइन बिक्री को मिलेगा बढ़ावा
योजना के अंतर्गत पेड़े की आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही जीआई टैगिंग की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे, ताकि बदायूं के पेड़े को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान मिल सके। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़कर इसे ऑनलाइन उपलब्ध कराने की भी तैयारी है, ताकि लोग घर बैठे बदायूं के प्रसिद्ध पेड़े मंगा सकें।
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ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा है पेड़ों का स्वाद
बदायूं के पेड़ों का इतिहास भी काफी पुराना और गौरवपूर्ण रहा है। स्थानीय कारीगरों के अनुसार वर्ष 1825 में मम्मन खान पहलवान ने यहां पेड़े बनाने की शुरुआत की थी। उनकी दुकान की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि उस स्थान का नाम ही ‘मम्मन चौक’ पड़ गया, जो अब सुभाष चौक के नाम से जाना जाता है। इसके बाद वर्ष 1914 में अलापुर निवासी हब्बू हलवाई ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया और उनके बनाए पेड़े दूर-दूर तक प्रसिद्ध हुए। आज भी ‘हब्बू के पेड़े’ के नाम से जिले में सैकड़ों दुकानें संचालित हैं और यह नाम गुणवत्ता की पहचान बन चुका है।


कारोबार को मिलेगी नई गति
सरकार की इस योजना से जुड़े लाभों के चलते पेड़ा व्यवसाय से जुड़े लोगों को आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद है। आधुनिक तकनीक, विपणन सहायता और सरकारी प्रोत्साहन के जरिए यह पारंपरिक मिठाई उद्योग अब नए मुकाम तक पहुंचेगा। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि योजना लागू होने के बाद बदायूं का पेड़ा न केवल प्रदेश बल्कि देशभर में अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा। उपायुक्त उद्योग सचिन जैन ने बताया कि इससे कारोबार को बढ़ावा मिलने से व्यापारियों को फायदा सकेगा।
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