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Budaun News: गंगा की तलहटी में हर्बल खेती की तलाशी जा रहीं संभावना

Thu, 30 Mar 2023 12:15 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 30 Mar 2023 12:15 AM IST
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The possibility of herbal farming is being explored in the foothills of the Ganges
उझानी (बदायूं)। गंगा की तलहटी में औषधीय पौधे उगाने की संभावना तलाशने के लिए पतंजलि ऑर्गेनिक रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने मिट्टी और पानी का परीक्षण शुरू कर दिया है। वैज्ञानिकों की टीम मंगलवार को कछला पहुंची। वैज्ञानिकों ने बुधवार को एक दर्जन से अधिक स्थानों से मिट्टी के साथ ही गंगाजल के भी नमूने लिए। इनका परीक्षण हरिद्वार में होगा। मिट्टी औषधीय पौधों के अनुरूप मिली तो इसका सीधा फायदा इलाके के किसानों को भी होगा।
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पतंजलि ऑर्गेनिक रिसर्च इंस्टीट्यूट हरिद्वार के वैज्ञानिकों ने नमूने लेने का काम जल शक्ति मंत्रालय की नमामि गंगे योजना के तहत शुरू किया है। टीम में शामिल वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनुपम श्रीवास्तव के नेतृत्व में सदस्यों ने बुधवार पूर्वाह्न गंगाजल के आधा दर्जन से अधिक नमूने लिए। जल के नमूने इससे पहले सहसवान और बुलंदशहर जिले के नरौरा जिले में भी लिए जा चुके हैं। मिट्टी के नमूने लिए जाने का काम गंगाघाट से पांच किलोमीटर दूर तक चला।
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वैज्ञानिक डॉ. अनुपम श्रीवास्तव के मुताबिक, मृदा परीक्षण का मुख्य उद्देश्य इलाके में औषधीय पौधे उगाना है। परीक्षण में रिपोर्ट अच्छी आई तो गंगा किनारे औषधीय पौधे रोपे जाएंगे। उनका आयुर्वेद से जुड़ी दवाओं में इस्तेमाल होगा। औषधीय पौधे उगाने का काम इलाके के ही किसानों को सौंपा जाएगा। इससे उनकी आमदनी भी बढ़ेगी। गंगोत्री से शुरू नमूने लेने का काम प्रयागराज तक चलेगा। इसके लिए वैज्ञानिकों की आठ-नौ टीमें लगी हुई हैं। कछला गंगाघाट पर आई टीम में डॉ. भास्कर जोशी, राजेश मिश्रा, मनोज भाटी, अमित कुमार, प्रियंका त्यागी, अमिता सिंह, प्रशांत और अंकुर कुमार शामिल हैं।
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संत-महात्माओं को दिए पादप संरक्षण के टिप्स
गंगाघाट पर वैज्ञानिकों की टीम ने शिविर लगाकर इलाके के लोगों समेत संत और महात्माओं को पादप सुरक्षा और गंगा को प्रदूषणमुक्त रखने के टिप्स दिए। कहा कि गंगा किनारे पौधे लगाने से पर्यावरण की भी रक्षा होगी। जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए। जैविक खेती से उत्पन्न अन्न खाने से शरीर रोगमुक्त रहता है। वैज्ञानिकों ने घरेलू नुस्खे से रोगों के उपचार के भी टिप्स दिए। चिकित्सकीय ज्ञान का आदान-प्रदान भी आवश्यक होता है। इसका आम आदमी को भी फायदा मिलता है।


गंगा किनारे औषधीय पौधे उगाने की जो कवायद पतंजलि ने शुरू की है, उसका आने वाले दिनों लोगों को काफी फायदा होगा। सबसे अच्छी बात यह है कि लोगों में जड़ी-बूटियों से इलाज कराने में विश्वास बढ़ेगा। इलाके के लोगों को आर्थिक फायदा भी होगा।
- सुरेंद्र सिंह, जिला प्रभारी, पतंजलि योग समिति
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