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Budaun News: उझानी के पूर्व इंस्पेक्टर व एसआई समेत तीन के खिलाफ पुलिस ने लगाई एफआर
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बदायूं। करीब पांच साल पहले उझानी कोतवाली परिसर में ही गोलीकांड में सिपाही और दरोगा के घायल होने के मामले में पांच नवंबर को नया मोड़ आ गया था। इस मामले में पुलिस ने तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक, दरोगा समेत तीन के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कर ली थी।विवेचना मंडल स्तर के अधिकारियों की देखरेख में इंस्पेक्टर प्रवीन कुमार सिंह को सौंपी गई। अब इस मामले में कोई साक्ष्य न मिलने पर विवेचक ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर फाइल कोर्ट में दाखिल कर दी है।
कोतवाली में तैनात सिपाही ललित कुमार की पत्नी की ओर से दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा गया है कि दरोगा (वरिष्ठ उप निरीक्षक) रामऔतार सिंह उससे अश्लील कमेंट और गंदे इशारे किया करते थे। सिपाही ने इसकी शिकायत दरोगा से की थी। कहासुनी के दौरान दरोगा ने उनके पति को देख लेने की धमकी दी थी। आरोप है कि इसके दूसरे दिन महिला का सिपाही पति जब तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ओमकार सिंह से उच्चाधिकारियों से मिलने के लिए अनुमति मांगने पहुंचा तो फिर कहासुनी हो गई।
तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ने पहले से मौजूद दरोगा को उकसा दिया। दरोगा और एक अन्य अज्ञात आरोपी ने सिपाही ललित की रायफल छीन ली। उसी रायफल से दरोगा ने पहले ललित को गोली मारी, फिर परिसर में हवाई फायरिंग करते हुए खुद को गोली मार ली। आरोप है कि तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक के कहने पर सिपाही को फंसाने के लिए दरोगा ने खुद को घायल कर लिया था। आरोप था कि महिला की शिकायत के बाद भी कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी। उस वक्त उनके शिकायती पत्रों पर भी गौर नहीं किया गया। अब इस मामले में उझानी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज हुई है।
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कोर्ट के आदेश पर पांच नवंबर को मामला दर्ज हुआ था। विवेचक ने दरोगा रामऔतार (पीलीभीत में है तैनानी) और तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ओमकार सिंह के रामपुर जिले में जाकर बयान लिए। लगाए गए आरोपों के साक्ष्य नहीं मिल सके। मामला निराधार साबित हुआ इसके बाद मामले में एफआर लगाते हुए कोर्ट में फाइल दाखिल कर दी गई है।
यह था पूरा मामला, दरोगा के गुप्तांग में लगी थी गोली
करीब पांच साल पहले कोतवाली परिसर में हुए गोलीकांड में घायल दरोगा रामऔतार सिंह और सिपाही ललित कुमार का कई दिन तक हायर सेंटरों पर इलाज चला था। दरोगा के गोली गुप्तांग के पास तो सिपाही के कंधे के पास लगी थी। सिपाही ललित कुमार के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। बाद में उसे बर्खास्त कर दिया गया था। बहाली के बाद वह पुलिस लाइन में तैनात है।
पांच महीने पहले एडीजी ने किया था हकीकत पर गौर
गोलीकांड को लेकर आरोप और प्रत्यारोप का दौर कई बार चला। पांच महीने पहले एडीजी रमित शर्मा, डीआईजी अजय कुमार साहनी और एसएसपी ब्रजेश कुमार सिंह ने कोतवाली पहुंचकर घटना से जुड़े अभिलेखों पर गौर किया था। घटना के समय कोतवाली में तैनात कुछेक पुलिस कर्मियों और विवेचक से भी पुलिस अफसरों ने जानकारी की थी। माना जा रहा था कि एडीजी का दौरा सिपाही की पत्नी की शिकायत के कारण हुआ था। बाद में कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज हुआ था।
मामले की जांच में आरोप निराधार पाए गए हैं। साक्ष्य न मिलने की वजह से मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है। उच्चाधिकारियों द्वारा लगातार मामले पर निगाह बनी हुई थी। किसी निर्दोष पर कार्रवाई नहीं हो सकती। विवेचना समाप्त करते हुए विवेचक प्रवीन कुमार ने एफआर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है। - देवेंद्र कुमार, सीओ, उझानी
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कोतवाली में तैनात सिपाही ललित कुमार की पत्नी की ओर से दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा गया है कि दरोगा (वरिष्ठ उप निरीक्षक) रामऔतार सिंह उससे अश्लील कमेंट और गंदे इशारे किया करते थे। सिपाही ने इसकी शिकायत दरोगा से की थी। कहासुनी के दौरान दरोगा ने उनके पति को देख लेने की धमकी दी थी। आरोप है कि इसके दूसरे दिन महिला का सिपाही पति जब तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ओमकार सिंह से उच्चाधिकारियों से मिलने के लिए अनुमति मांगने पहुंचा तो फिर कहासुनी हो गई।
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तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ने पहले से मौजूद दरोगा को उकसा दिया। दरोगा और एक अन्य अज्ञात आरोपी ने सिपाही ललित की रायफल छीन ली। उसी रायफल से दरोगा ने पहले ललित को गोली मारी, फिर परिसर में हवाई फायरिंग करते हुए खुद को गोली मार ली। आरोप है कि तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक के कहने पर सिपाही को फंसाने के लिए दरोगा ने खुद को घायल कर लिया था। आरोप था कि महिला की शिकायत के बाद भी कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी। उस वक्त उनके शिकायती पत्रों पर भी गौर नहीं किया गया। अब इस मामले में उझानी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज हुई है।
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कोर्ट के आदेश पर पांच नवंबर को मामला दर्ज हुआ था। विवेचक ने दरोगा रामऔतार (पीलीभीत में है तैनानी) और तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ओमकार सिंह के रामपुर जिले में जाकर बयान लिए। लगाए गए आरोपों के साक्ष्य नहीं मिल सके। मामला निराधार साबित हुआ इसके बाद मामले में एफआर लगाते हुए कोर्ट में फाइल दाखिल कर दी गई है।
यह था पूरा मामला, दरोगा के गुप्तांग में लगी थी गोली
करीब पांच साल पहले कोतवाली परिसर में हुए गोलीकांड में घायल दरोगा रामऔतार सिंह और सिपाही ललित कुमार का कई दिन तक हायर सेंटरों पर इलाज चला था। दरोगा के गोली गुप्तांग के पास तो सिपाही के कंधे के पास लगी थी। सिपाही ललित कुमार के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। बाद में उसे बर्खास्त कर दिया गया था। बहाली के बाद वह पुलिस लाइन में तैनात है।
पांच महीने पहले एडीजी ने किया था हकीकत पर गौर
गोलीकांड को लेकर आरोप और प्रत्यारोप का दौर कई बार चला। पांच महीने पहले एडीजी रमित शर्मा, डीआईजी अजय कुमार साहनी और एसएसपी ब्रजेश कुमार सिंह ने कोतवाली पहुंचकर घटना से जुड़े अभिलेखों पर गौर किया था। घटना के समय कोतवाली में तैनात कुछेक पुलिस कर्मियों और विवेचक से भी पुलिस अफसरों ने जानकारी की थी। माना जा रहा था कि एडीजी का दौरा सिपाही की पत्नी की शिकायत के कारण हुआ था। बाद में कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज हुआ था।
मामले की जांच में आरोप निराधार पाए गए हैं। साक्ष्य न मिलने की वजह से मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है। उच्चाधिकारियों द्वारा लगातार मामले पर निगाह बनी हुई थी। किसी निर्दोष पर कार्रवाई नहीं हो सकती। विवेचना समाप्त करते हुए विवेचक प्रवीन कुमार ने एफआर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है। - देवेंद्र कुमार, सीओ, उझानी