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Budaun News: झटका मशीन के प्रयोग से फसलों की रखवाली का झंझट खत्म

Mon, 17 Apr 2023 12:57 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 17 Apr 2023 12:57 AM IST
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The hassle of guarding crops ends with the use of blow machine
उझानी क्षेत्र में झटका मशीन के इस्तेमाल को एक खेत की मेड़ पर लगे तार। संवाद
- बारह हजार वोल्ट की मशीन करीब 50 बीघा खेत की मेड़ पर लगे तारों में करंट प्रवाहित रखने में है सक्षम
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- मशीन से जुड़े तारों की चपेट में आते ही जानवर या तो गश खाकर गिर पड़ेगा या फिर दौड़ता नजर आएगा
संवाद न्यूज एजेंसी
उझानी (बदायूं)। छुट्टा जानवरों से फसलों को नुकसान की समस्या से जूझ रहे किसानों ने इलेक्ट्रिक झटका मशीन का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। मशीन से जुड़े तारों की चपेट में आते ही जानवर या तो गश खाकर जमीन पर गिर पड़ेगा या फिर दौड़ता नजर आएगा। इसका इस्तेमाल बढ़ने से फसलों की रखवाली का झंझट कम हो गया है।
बारह हजार वोल्ट क्षमता की झटका मशीन करीब 50 बीघा खेत की मेड़ पर लगे तारों में करंट प्रवाहित रखने में सक्षम बताई जाती है। तीन से चार हजार रुपये कीमत की इस मशीन के बारे में बुटला के किसान प्रेमपाल ने बताया कि पिछले साल छुट्टा जानवरों से मक्का की फसल तबाह हो गई थी। इस बार बुआई से पहले ही खेत की तारकशी कराके झटका मशीन लगा दी। एक बार इसकी चपेट में आने के बाद कोई भी जानवर दोबारा फसल की तरफ देखने का भी नाम नहीं लेता। वैसे, कुछेक किसान 18 हजार वोल्ट की मशीन का भी इस्तेमाल करते हैं।
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कटरी के गांवों के लोगों ने अपने अधिकतर खेतों के आसपास तारकशी करा दी है। हुसैनपुर खेड़ा निवासी किसान नजाकत का कहना है कि रात में फसलों की रखवाली के दौरान जंगली जानवरों में खासकर सुअरों के हमले का डर बना रहता है। शाम को खेत में मशीन रखकर तार जोड़ आओ, फिर घर आकर चैन से सो जाते हैं।
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बाइक के प्लग जैसा होता है करंट
झटका मशीन से 12 हजार वोल्ट का डायरेक्ट करंट (डीसी) निकलता है, जो बाइक के प्लग से निकलने वाले करंट जैसा होता है। मशीन से करंट निरंतर नहीं, बल्कि कुछ क्षण के अंतराल से निकलता है। यह कह सकते हैं कि इससे जोर का झटका पर टुकड़ों में लगता है। मशीन में 12 वोल्ट की बैटरी का इस्तेमाल होता है। इसे चार्ज करने के लिए किसान सोलर पैनल लगवा लेते हैं।


ब्लेड लगे तारों के इस्तेमाल में गिरावट
जंगली और छुट्टा जानवरों से फसलों को बचाने के लिए पिछले सालों में ब्लेड लगे तारों का प्रयोग होता रहा है। ब्लेडयुक्त तारों का प्रयोग तो इन दिनों भी हो रहा है, लेकिन इसके रकबा में गिरावट आई है। बताते हैं कि ब्लेडयुक्त तार की बाड़ में फंसकर जानवर अमूमन लहूलुहान हो जाते रहे हैं। कभी-कभी तो लहूलुहान जानवरों की मौत भी हो जाती है। ऐसे तार हालांकि प्रतिबंधित हैं, लेकिन बाजार में खुलेआम बिक रहे हैं। ब्लेडयुक्त तारों ने सबसे ज्यादा संरक्षित प्रजाति के छुट्टा जानवरों को नुकसान पहुंचाया है।
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