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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   The game commission and guardians facing

कमीशन का खेल और झेल रहे अभिभावक

Sun, 17 Apr 2016 12:22 AM IST
बदायूं, ब्यूरो
बदायूं, ब्यूरो Updated Sun, 17 Apr 2016 12:22 AM IST
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सीबीएसई बोर्ड के नियमों को दरकिनार कर अभी कई स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें लगा रहे हैं। सारा खेल पुस्तक विक्रेता और स्कूल के बीच कमीशन का है। इससे अभिभावकों में गुस्सा है। शनिवार को टिकटगंज स्थित एक पुस्तक भंडार पर मधुवन कॉलोनी में रहने वाली महिला बेटी के साथ कोर्स की पुस्तक खरीदने पहुंचीं। आरोप है कि जरूरत की पुस्तकें लेने के बाद जब रुपये चुकाने की बात आई तो विक्रेता ने किताबों का पूरा सेट खरीदने को बाध्य किया। महिला ने मना किया तो अभद्रता की गई। इसके बाद एक संगठन के लोग पहुंच गए तो विक्रेता ने उन्हें भी दो टूक जवाब दे दिया।
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बता दें कि सीबीआई बोर्ड ने साफ कर दिया है कि स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें नहीं चलेंगी, लेकिन कुछ स्कूल वाले अभी अपना जाल फैलाए हैं। इसके चलते अभिभावकों की पुस्तक विक्रेताओं से नोकझोंक हो रही है। शनिवार को टिकटगंज में ऐसा ही वाकया देखने को मिला। आरोप है कि बेटी के लिए किताबें लेनी गई महिला के साथ दुकानदार ने न सिर्फ अभद्रता की बल्कि हाथ से ऐसे किताब छीनी की उनकी चूड़ियां टूट गईं। इस बीच दुकान पर हो रहे हंगामे को देख आसपास के लोगों ने दुकानदार को समझाया। महिला से भी जाने को कहा। इसके बाद महिला ने दुकानदार को कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी और वहां से चली गई। इस पूरे घटनाक्रम के कुछ ही घंटे बाद युवा मंच छात्र संगठन के कार्यकर्ता पुस्तक विक्रेता कि पास पहुंचे। उन्होंने जरूरत के मुताबिक, किताबेें देने के लिए कहा। विक्रेता ने साफ तौर पर कहा कि जिन विद्यालयों से उसका टाईअप है, उन्हीं स्कूलों की किताबें वह बेचता है।  
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किताब खरीदने को दी जाती है स्लिप
बदायूं। जिले में लगभग दर्जनभर सीबीएसई और एक आईसीएसई बोर्ड का विद्यालय है। इन विद्यालयों में बच्चों को एनसीईआरटी और सीबीएसई बोर्ड की किताबों से ही शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए, लेकिन निजी स्कूल अपने स्वार्थ के लिए प्राइवेट लेखकों की किताबों को अपने विद्यालयों में लगा लेते हैं। इन किताबों को बेचने के लिए मार्केट में सिर्फ एक दुकानदार से अनुबंध किया जाता है। अभिभावकों को बाकायदा एक स्लिप दी जाती है, जिससे उसी दुकान पर किताब पूरी कीमत पर मिलती है। निजी स्कूलों से मार्केट में एक दुकानदार से किए हुए अनुबंध के अनुसार प्रत्येक बड़े विद्यालय का कमीशन लगभग सात से आठ लाख रुपये बनता है। जिसका सीधा असर अभिभावकों की जेब पर पड़ता है।  
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ये भी है विकल्प
बदायूं। यदि बाजार में किताबें नहीं मिलती हैं तो इंटरनेट से किताबों को मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है। इसके लिए सीबीएसई ने ई-पाठशाला डॉट कॉम लांच किया है। अभिभावक इसका लाभ उठा सकते हैं।
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